BJP अध्यक्ष के खिलाफ ही खोला मोर्चा! | Uttarakhand BJP | CM Dhami | Ajendr Avariya|Uttarakhand News

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दोस्तों, उत्तराखंड की सियासी गलियारों में हलचल तेज है बीजेपी के अंदरूनी घमासान की वजह से पार्टी में बगावत की खबरें सामने आ रही हैं और ये आती रहती हैं लेकिन कोई खुलाकर बगावती तेवर नहीं दिखाता लेकिन इस बार तो कुछ ऐसा हो गया गया कि बीजेपी वाले कुछ सोच में पड़े हैं तो कांग्रेस अपने लिए रास्ता खोज रही है। दोस्तो अजेंद्र अजय ने खुद पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अंदरूनी नाराजगी का चेहरा क्या दिखाया। वहीं, इस मौके का फायदा उठाते हुए कांग्रेस ने भी सियासी एंट्री मारी ली तो अब क्या बीजेपी से नाराज दिख रहे हैं बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्ष कांग्रेस का हिस्सा होंगे। सियासत है कुछ कहा तो जा नहीं सकता है कुछ भी हो सकता है। दोस्तो भाजपा नेता अजेंद्र अजय के बयान से पार्टी के भीतर गदर मचा हुआ है। एक तरफ इसे कार्यकर्ताओं की नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है, तो इस सिचुएशन पर कांग्रेस ने भी एंट्री करते हुए इसे नाराजगी की शुरुवात बताया है। खास बात ये है कि बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की हिदायद भी इन हालातों को सुधारने में सफल नहीं दिख रही है। ऐसे में पार्टी किसी बड़े कदम को उठाने के भी मूड में दिख रही है। दोस्तो उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों भाजपा के भीतर की खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है. बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता अजेंद्र अजय के एक बयान ने न केवल पार्टी के अंदर हलचल मचा दी है, बल्कि विपक्ष को भी भाजपा पर हमला करने का मौका दे दिया है। स्थिति ऐसी बन गई है कि पार्टी नेतृत्व को भी सामने आकर नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की हिदायत देनी पड़ी है तो क्या आने वाले वक्त में बीजेपी के अंदर चुनाव से पहले कोई बड़ा विद्रोह देखने को मिलेगा।

दरअसल उत्तराखंड में भाजपा की राजनीतिक स्थिति लंबे समय से मजबूत मानी जाती रही है। लगातार चुनावी सफलताओं और संगठनात्मक मजबूती के कारण पार्टी सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर प्रभावशाली स्थिति में है। लेकिन समय-समय पर पार्टी के भीतर से उठने वाली नाराजगी की आवाजें नेतृत्व के लिए चुनौती बनती रही हैं। इसी कड़ी में अब अजेंद्र अजय का बयान चर्चा का विषय बन गया है, जो सबसे बड़ा विद्रोह माना जा रहा है। दोस्तो मामला तब शुरू हुआ जब अजेंद्र अजय ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से व्यवस्थाएं चल रही हैं, उससे वे आहत हैं उन्होंने यह भी कहा कि यदि हालात ऐसे ही रहे, तो वे राजनीति से संन्यास लेने तक पर विचार कर सकते हैं.और दोस्तो खास बात क्या थी पता है वो ये कि अजेंद्र अजय ने अपनी नाराजगी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान से भी जोड़ा, जिसमें उन्होंने कहा था कि आने वाला दशक उत्तराखंड का दशक होगा। अजेंद्र अजय का कहना था कि यदि सच में राज्य के लिए यह दशक महत्वपूर्ण बनने वाला है, तो राज्य में व्यवस्थाओं और कामकाज में भी उसी स्तर की गंभीरता दिखाई देनी चाहिए। दोस्तो अजेंद्र अजय का यह बयान सामने आते ही भाजपा के भीतर असहज स्थिति बन गई क्योंकि मामला केवल सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे प्रधानमंत्री के बयान से जोड़कर देखा जाने लगा। ऐसे में पार्टी के लिए इसे हल्के में लेना संभव नहीं था। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने किया हस्तक्षेप: मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने अजेंद्र अजय से बातचीत कर स्थिति को संभालने की कोशिश की और पार्टी नेताओं को सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर संयम बरतने की नसीहत दी। महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पार्टी के भीतर किसी भी तरह की असहमति या नाराजगी को सार्वजनिक करने के बजाय संगठन के मंचों पर उठाया जाना चाहिए तो आखिर क्यों काम नहीं आई महेंद्र भट्ट की नसीहत ये सवाल भी पूछा जा रहा है।

दोस्तो प्रदेश अध्यक्ष की यह कोशिश ज्यादा असरदार साबित होती नहीं दिखी। इसके बाद भी अजेंद्र अजय ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात दोहराते हुए प्रदेश अध्यक्ष की हिदायत पर भी तीखी प्रतिक्रिया दे दी। इससे यह संकेत मिला कि मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति कहीं न कहीं गहराई तक मौजूद है। दोस्तो भाजपा के भीतर चल रही इस हलचल के बीच विपक्षी दल कांग्रेस भी सक्रिय हो गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के भीतर बढ़ती नाराजगी का संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि अजेंद्र अजय ने जो कहा है, वह केवल उनकी व्यक्तिगत राय नहीं है, बल्कि भाजपा के कई कार्यकर्ताओं की भावना को दर्शाता है। BJP में इस समय जिस तरह की परिस्थितियां बनी हुई हैं, उससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। भाजपा में विचारधारा से ज्यादा सत्ता की राजनीति हावी हो चुकी है, जिसके कारण कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। दोस्तो राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह पहली बार नहीं है जब भाजपा के भीतर से इस तरह की आवाजें सामने आई हों। इससे पहले भी कई वरिष्ठ नेता समय-समय पर अपने बयानों से पार्टी नेतृत्व को असहज स्थिति में डाल चुके हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता अरविंद पांडे और बिशन सिंह चुफाल जैसे नेताओं के बयान भी कई बार चर्चा में रहे हैं। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी अपने बयानों के कारण कई बार राजनीतिक हलकों में सुर्खियां बटोरते रहे हैं। इन तमाम घटनाओं के बीच अब अजेंद्र अजय का बयान भाजपा के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आया है। खासकर तब जब पार्टी आगामी राजनीतिक रणनीतियों और संगठनात्मक मजबूती पर काम कर रही है। फिलहाल दोस्तो भाजपा नेतृत्व इस पूरे मामले को संभालने की कोशिश में जुटा हुआ है, लेकिन विपक्ष इसे पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी के तौर पर पेश करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस अंदरूनी असंतोष को किस तरह संभालती है और क्या यह विवाद यहीं थमता है या फिर आगे भी राजनीतिक बहस का विषय बना रहता है।