जी हां दोस्तो देहरादून में विक्रम शर्मा की हत्या एक सुनियोजित साजिश थी, जिसका मास्टरमाइंड आशुतोष निकला। पुलिस जांच में सामने आया कि ये हत्या तात्कालिक रंजिश नहीं, बल्कि पेशेवर ढंग से की गई थी। इस मामले में जमशेदपुर, नोएडा और हरिद्वार तक फैले एक आपराधिक नेटवर्क का खुलासा हुआ है, लेकिन अभी और खुलेंगे राज। Dehradun Vikram Sharma Murder Case दोस्तो देहरादून में हुई विक्रम शर्मा की सनसनीखेज हत्या अब एक संगठित और पेशेवर साजिश के रूप में सामने आ रही है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह कोई अचानक उपजी रंजिश नहीं थी, बल्कि महीनों की रेकी, फर्जी पहचान, किराये के फ्लैट, डिजिटल पेमेंट और राज्यों के पार फैले नेटवर्क के जरिए अंजाम दी गई सुनियोजित वारदात थी दोस्तो देहरादून पुलिस के मुताबिक इस पूरे सनसनीखेज वारदात में शामिल दो आरोपियों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया है। हत्याकांड की पटकथा शूटर आशुतोष कुमार ने लिखी। योजना बनाने से लेकर शूटर तय करने और फरारी के रूट तक हर कड़ी उसी ने जोड़ी।
दोस्तो एसएसपी देहरादून और एसटीएफ के मुताबिक मामले में गणेश सिंह और अखिलेश सिंह की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि साजिश की कई परतें अभी खुलनी बाकी हैं। इसके अलावा दोस्तो इधर जांच में यह भी सामने आया कि छात्र मोहित की मुलाकात कुछ वर्ष पहले उसके मामा विकास महतो ने आशुतोष से कराई थी। यहीं से संपर्क की वह कड़ी बनी, जिसने आगे चलकर इस हत्याकांड का रूप ले लिया। सूत्रों के अनुसार आशुतोष का एक ही लक्ष्य था—विक्रम को खत्म करना, चाहे जहां मौका मिले। शुरुआती योजना जमशेदपुर में ही वारदात को अंजाम देने की थी, लेकिन हर वक्त सुरक्षा घेरे में रहने के कारण सफलता नहीं मिली। इसके अलावा दोस्तो जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपितों ने पहले नोएडा में हत्या की साजिश रची थी। अंकित वर्मा के नाम से फ्लैट किराये पर लिया गया। विक्रम की दिनचर्या पर नजर रखने के लिए उसी जिम को जॉइन किया गया, जहां वह नियमित रूप से जाता था। लेकिन काफी कोशिशों के बावजूद मौका नहीं मिला तो प्लान को देहरादून शिफ्ट किया गयाmऔर अब बात करता हूं देहरादून कि कैसे जिम से मिली लोकेशन, बाहर निकलते ही कैसे बरसी गोलियां और खत्म हो गई विक्रम की जिंदगी। दोस्तो गौर कीजिएगाघटना वाले दिन बागबेड़ा निवासी अंकित वर्मा ने फोन कर आशुतोष को सूचना दी कि विक्रम जिम में मौजूद है। जैसे ही वह बाहर निकले, पहले से घात लगाए बैठे आशुतोष और विशाल ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। कुछ ही सेकेंड में पूरी वारदात को अंजाम दे दिया गया।
इसके अलावा दोस्तो आरोपियों के पास फरार होने का का पूरा का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार था दोस्तो हत्या के तुरंत बाद आरोपित सहस्त्रधारा क्षेत्र में पहले से खड़ी बाइक तक पहुंचे। वहां से दूसरी बाइक और स्कूटी के जरिए हरिद्वार पहुंचे। किराये के वाहन लौटाने के बाद पहले से खड़ी काली स्कॉर्पियो से नोएडा के फ्लैट में जा छिपे। दोस्तो सीसीटीवी फुटेज और रूट मैप खंगालते हुए पुलिस ने ग्रेटर नोएडा के अल्फा-दो अपार्टमेंट से वारदात में इस्तेमाल स्कॉर्पियो बरामद की। पूछताछ में मोहित उर्फ अक्षत ठाकुर ने आशुतोष, अंकित वर्मा, विशाल सिंह, आकाश और अन्य नाम उजागर किए, जिसके बाद उसकी भी गिरफ्तारी हुई। दोस्तो इस पूरे हत्याकांड में पुलिस को खुलासा करने में काफी दिन लगे और बाइक, यूपीआई और स्कॉर्पियो से खुलीं परतें जांच में कई अहम कड़ियां सामने आईं- जैसे कि सहस्त्रधारा रोड से बरामद बाइक जमशेदपुर निवासी जितेंद्र कुमार साहू के नाम पर पंजीकृत मिली। हरिद्वार से किराये पर ली गई बाइक-स्कूटी आकाश कुमार प्रसाद की आईडी पर ली गई थीं। भुगतान राजकुमार सिंह की यूपीआई आईडी से किया गया।
फरारी में इस्तेमाल स्कॉर्पियो जमशेदपुर की सारिका इंटरप्राइजेज के प्रापराइटर यशराज के नाम पर रजिस्टर्ड थी। जांच में सामने आया कि यशराज, राजकुमार का बेटा है और वाहन आशुतोष व उसके साथियों को उपलब्ध कराया गया था। इतना ही नहीं दोस्तो पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मोहित ठाकुर जिस फ्लैट में रहता था, वह उसके नाना बाबू महतो के नाम पर है। इसी फ्लैट के नीचे कथित रूप से एक ‘टार्चर रूम’ बनाया गया था, जहां लोगों को लाकर मारपीट की जाती थी। स्थानीय थाने में इसकी शिकायतें पहले भी दर्ज कराई गई थीं। इधर पुलिस का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि राज्यों के पार फैले आपराधिक गठजोड़ का संकेत देता है। डिजिटल ट्रेल, किराये के वाहन, फर्जी पहचान और लोकल नेटवर्क—हर एंगल से जांच जारी है। विक्रम शर्मा हत्याकांड अब महज एक सनसनी नहीं, बल्कि संगठित अपराध की परतें खोलती एक बड़ी कहानी बन चुका है। आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।