जी हां दोस्तो उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल क्या है ये किसी से छिपा नहीं, लेकिन तब क्या हो जब कोई अस्पताल पैसे के लिए एक गरीब की लाश को घंटो बंधक बना ले इसलिए कहना पड़ रहा है साबह। ऐसे अस्पातालों से भगवान बचाए, मै आज आपको ऐसे अस्पताल का काला सच बताने के लिए आया हूं जिसे देख कर आप चौकं जाएंगे। दोस्तो एक चौंकाने वाली खबर सामने आई। इमरजेंसी में भर्ती मरीज का दो घंटे के इलाज पर 80 हजार रुपये का बिल बनाया फिर भी इलाज के दौरान मौत हो गई, लेकिन इससे भी ज़्यादा शर्मनाक बात ये कि मृतक का शव घंटों तक बंधक अस्पताल ने बनाए रखा और परिजनों से पूरा पैसा वसूलने की कोशिश की गई। दोस्तो उत्तराखंड में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हल्द्वानी के एमबी इंटर कॉलेज के पास स्थित चन्दन हॉस्पिटल पर आरोप है कि इलाज के दौरान महिला की मौत के बाद अतिरिक्त पैसे जमा न करने पर मृतका का शव देने से इनकार कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। दोस्तो समझिये जरा पहाड़ी इलाकों से लोग अपने मरीज को हद्वानी इस आस में लाते हैं कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यस्था का हाल है बेहाल लेकिन हल्द्वानी पहुंचेने पर बच जाएगी जान, लेकिन तब क्या हो जब हल्द्नवानी के अस्पतालों ने इधर बना रखा हो ठगी और लूट का प्लना तब क्या हो। दोस्तो 03 जनवरी 2026 की रात अल्मोड़ा जिले के गोलना करड़िया धारानौला निवासी नन्दन बिरौड़िया ने एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजुनाथ टीसी को फोन कर अपनी पीड़ा बताई।
दोस्तो पीड़ित के अनुसार, उनकी पत्नी सीमा बिरौड़िया को बेस अस्पताल अल्मोड़ा से रेफर कर चन्दन हॉस्पिटल, हल्द्वानी लाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। दोस्तो मौत तो हो गई लोगों ने सोच लिया कि उपर वाले को यहीं मंजूर होगा, लेकिन इसके बाद जो खेल अस्पताल का शुरू हुआ उसने मरी हुई महिला के हर परिजनों को जिंदा ही मारने का कार दिया। दो परिजनों का आरोप है कि, इलाज के नाम पर पहले ही ₹57,000 जमा करा लिए गए। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने ₹30,000 और जमा करने की मांग की और दोस्तो पैसे न देने पर शव सौंपने से इनकार कर दिया गया। गरीब परिवार के सामने न तो पैसे थे और न ही धार्मिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करने का अधिकार मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर पुलिस अस्पताल पहुंची। इसके बाद मृतका का शव परिजनों को सौंपा गया। मृत्यु प्रमाण पत्र भी दिलाया गया। अस्पताल प्रबंधन को भविष्य में ऐसा न करने की हिदायत दी गई। दोस्तो ये मामला केवल अल्मोड़ा के एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर चल रही मनमानी और वसूली की संस्कृति को उजागर करता है, क्या इलाज के बाद भी शव पाने के लिए पैसे देना जरूरी है? गरीब मरीजों के लिए क्या प्राइवेट अस्पताल सिर्फ कमाई का जरिया हैं? क्या स्वास्थ्य विभाग ऐसे मामलों पर कभी स्वतः संज्ञान लेगा? चौंकाने वाली बात यह है कि इसी चन्दन हॉस्पिटल का उद्घाटन उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत द्वारा किया गया था।
अब सवाल यह है कि क्या मंत्री और स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर जवाबदेही तय करेंगे? या यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दब जाएगा? यह घटना निजी अस्पतालों के उस काले चेहरे को सामने लाती है, जहां पहले इलाज, फिर बिल, और अंत में लाश तक को सौदेबाजी का जरिया बना दिया जाता है। अब जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग और सरकार ऐसे अस्पतालों पर सख़्त कार्रवाई करे, ताकि किसी और परिवार को अपनों की देह पाने के लिए दर-दर की ठोकर न खानी पड़े। इमरजेंसी में दो घंटे के इलाज पर 80 हजार रुपये बिल बनाया गया, मरीज की मौत के बाद बॉडी को घंटों बंधक रखा। दोस्तो आरोप है कि मरीज को इमरजेंसी में भर्ती किया गया था, जहां मात्र दो घंटे के इलाज के लिए 80 हजार रुपये का बिल बनाया गया। इलाज के दौरान ही मरीज की मौत हो गई, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने शव को घंटों तक बंधक बनाकर रखा और परिजनों से पूरी राशि वसूलने की कोशिश की वाह गजब व्यवस्था है दोस्तो अपनी देवभूमि में जहां मूल भूत सुविधाएँ तक धड़ाम है और जो जिम्मेदारी नीजि हाथो में सौंपी गई है उन्होंने तो खोल दी लूट की दुकान। हल्द्वानी के चंदन हॉस्पिटल का वह मामला, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और मानवता—दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इमरजेंसी में इलाज, मौत के बाद शव को बंधक बनाना और भारी भरकम बिल—ये सिर्फ़ लापरवाही नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है, फिलहाल पुलिस कार्रवाई शुरू हो चुकी है और अस्पताल मैनेजर से पूछताछ जारी है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या ऐसी घटनाओं पर सिर्फ़ कार्रवाई काफी है, या फिर निजी अस्पतालों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए ठोस सिस्टम की ज़रूरत है? गरीब और मजबूर परिवारों के साथ ऐसा व्यवहार किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है उम्मीद है कि इस मामले में दोषियों को कड़ी सज़ा मिलेगी और भविष्य में किसी परिवार को अपनों के शव के लिए इस तरह जूझना नहीं पड़ेगा।