अंकिता केस पर सरकार का जवाब… | Ankita Bhandari Case | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो एक तरफ उत्तराखंड में उबाल है अंकिता केस में वीआईपी को लेकर, इधऱ पहली बार आया सरकार का पक्ष क्या कहा कैबिनेट मंत्री ने, कैसे जांच की बात कह कर नहीं दिया वीआईपी और सीबीआई जांच पर ठोस जोवाब। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासत उबाल पर है सरकार का आज पक्ष सुना, तो लगा बहुत कुछ हो रहा है इस मामले में लेकिन वीआईपी और सीबीआई जांच जैसे अहम सवालों पर अब भी ठोस जवाब नहीं मिल पाया। Ankita Bhandari Murder Case क्या इस सफाई से जनता संतुष्ट होगी। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सरकार और बीजेपी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस मामले में कांग्रेस ही नहीं बल्कि, अब प्रदेश से लेकर दिल्ली तक के सामाजिक संगठन और आम लोग भी लगातार सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। वहीं, मामले को बढ़ता देख अब सरकार की तरफ से कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने पक्ष रखा है। जी हां दोस्तो आज फिर वही रटा-रटाया जवाब सामने आया है, सरकार कह रही है कि सब कुछ हो चुका है, जांच हो गई, सज़ा मिल गई, और जो नए सवाल उठ रहे हैं वो “प्रोपेगंडा” हैं, लेकिन दोसतो सच्चाई इससे कहीं ज़्यादा असहज है।

CBI जांच की मांग आज नहीं उठी। यह मांग उसी दिन से है जब अंकिता की हत्या हुई थी। तब भी लोग सड़कों पर थे, तब भी सवाल थे, तब भी भरोसा डगमगाया था। उस वक्त जांच क्यों नहीं कराई गई, इसका जवाब आज तक नहीं मिला। आज जब नए ऑडियो सामने आए हैं, तो कहा जा रहा है कि जिसके पास सबूत हैं वो पुलिस को दे। दोस्तो सवाल ये जायज़ है कि अब सबूत जुटाने की जिम्मेदारी जनता और मीडिया की क्यों बन गई? दगड़ियो अगर यही तर्क है, तो फिर जांच, पूछताछ और जवाबदेही भी जनता पर ही छोड़ दी जाए क्या? न्याय का मतलब सिर्फ सज़ा सुनाना नहीं होता। न्याय का मतलब है भरोसा। और भरोसा तब टूटता है जब सवाल पूछने वालों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाए। दोस्तो ये कोई क्यों नहीं जानता कि यह मामला सिर्फ एक केस नहीं है। यह उस सिस्टम की परीक्षा है जो कहता है कि उसने सब कुछ सही किया और अगर सच में सब सही है, तो सवालों से डर कैसा? दोस्तो देहरादून के बलबीर रोड स्थित बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने अंकिता हत्याकांड में कोर्ट के फैसले पर कुछ बिंदुओं पर फोकस करते हुए कहा कि ‘कोर्ट के फैसले में साफ लिखा गया है कि किसी भी रसूखदार को बचाने का प्रयास नहीं किया गया है। जिस रिकॉर्डिंग से यह पूरा मामला सामने आया है, उसी रिकॉर्डिंग में अंकिता भंडारी की आत्महत्या की बात कही गई है।

दोस्तो कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि ‘जिन कॉल रिकॉर्डिंग को आधार बनाकर इस मुद्दे को उठाया जा रहा है, उस कॉल रिकॉर्डिंग में दो बातें सामने आ रही हैं। उसमें अंकिता भंडारी की आत्महत्या की बात भी आई तो उसी रिकॉर्डिंग में हत्या की बात कही जा रही है। जबकि, एक तरफ कोर्ट ने उसे हत्या माना है और आरोपियों को सजा दी है। दूसरी तरफ कुछ लोग अंकिता की हत्या से ही इनकार कर रहे हैं। दोस्तो सीबीआई जांच क्यों नहीं करा रही है सरकार? इस सवाल के जवाब में सुबोध उनियाल का कहना है कि ‘मामले में तथ्यों की प्रमाणिकता को देखना होगा, उसके बाद किसी फैसले पर जाया जा सकता है। जब हाईकोर्ट ने एसआईटी जांच को सही माना है और मामले में किसी को बचाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। कुछ लोग हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट भी गए। सरकार साफतौर पर कह रही है कि कोई भी ठोस सबूत लाएं, सरकार हर जांच को तैयार है। दोस्तो बता दें कि साल 2022 में 18 सितंबर को अंकिता भंडारी संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। अंकिता गंगा भोगपुर स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की जॉब करती थी। आरोप है कि रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य के साथ उसके सहयोगी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता ने अंकिता पर कथित तौर पर अनुचित कार्य करने का दबाव बनाया जिसका विरोध अंकिता ने कर दिया। आरोप है कि इसी वजह से उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में तीनों आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है, जो इस वक्त अभी जेल में बंद है। इस मामले को लेकर उस वक्त प्रदेशभर में आंदोलन हुए, फिर मामला शांत पड़ गया, लेकिन दिसंबर 2025 में मामले ने उस वक्त एकाएक तूल पकड़ा, जब बीजेपी से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर ने एक कॉल रिकॉर्डिंग के साथ वी डियो जारी कर दी।