Congress ‘तांत्रिक’ वाले तंज पर Harish Rawat का पहला रिएक्शन! | Prakash Joshi | Uttarakhand News

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उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर शब्दों की जंग तेज हो गई है। इस बार चर्चा में हैं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, जिन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में खुद को “तांत्रिक” और “घमंडी” कहकर नया राजनीतिक बयान दे दिया है। दरअसल, कांग्रेस के ही एक कार्यक्रम में “नेता और तांत्रिक” को लेकर दिए गए बयान के बाद जो सियासी बहस शुरू हुई थी, वह अब सीधे पार्टी के भीतर गहराते मतभेदों तक पहुंचती नजर आ रही है। हरीश रावत के इस जवाब के बाद कांग्रेस के अंदर हलचल तेज हो गई है और सियासी गलियारों में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। पूरी खबर और हरीश रावत का क्या आया जवाब। दोस्तो एक तरफ कांग्रेस में तमाम तरह की गुटबाजी पर ब्रेक लागाने की कवाद चल ही रही थी कि कांग्रेस के घर में एक तांत्रिक ने एंट्री मार ली और इस तांत्रिक ने ऐसी झाड़ फूक की कि जहां एक तरफ लग रहा था कि कांग्रेस की अंदुरुनी लड़ाई शायद अब खत्म हो जाएगी लेकिन नहीं ऐसा हो ना सका। दोस्तो कुछ दिन पहले हल्द्वानी में कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के सामने कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी ने अपने संबोधन में ‘नेता और तांत्रिक’ का जिक्र किया था। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नेता और तांत्रिक के बीच का अंतर समझने की बात कही थी।

जी हां दोस्तो इस बयान के बाद उत्तराखंड में चर्चा तेज हो गई थी कि आखिर कांग्रेस में ये तांत्रिक कौन है। लोग दबी जुबान में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता की ओर इस इशारे को मान रहे थे लेकिन दोस्तो अब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस से सबसे सीनियर लीडर हरीश रावत ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने अपने सेशल मीडिया अकाउंट पर एक लंबी पोस्ट लिखी है. पोस्ट की शुरुआत। वाह, am I – #Tantrik…!! से की गई है. इसके बाद हरीश रावत ने लिखा- थोड़ा गैर कीजिगा। हरीश रावत की इस लंबे चौड़े लेख में बहुत लिखा है। कई दसकों की सियासत और इंदिरा गांधी तक का जिक्र हरीश रावत ने बहुत कुछ कहा है। वाह, am I – #Tantrik…..!! क्या भला कहा कि गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि “मेरे बिना कांग्रेस नहीं चलेगी”। क्या मैंने कभी ऐसा कहा? मैं तांत्रिक हूं। 1968 में देश के सभी दिग्गज आदरणीय इंदिरा गांधी जी के विरुद्ध हो गए थे। सिंडिकेट-इंडिकेट का संघर्ष था। लखनऊ विश्वविद्यालय में उन्हें आमंत्रित किया। श्री राज नारायण जी और तत्कालीन मुख्यमंत्री टी.एम. सिंह आदि के प्रबल विरोध के बावजूद लखनऊ विश्वविद्यालय में उनकी सभा करवाई। सबके मन को जीतकर वह दिल्ली चली गई। उन्होंने इतिहास बनाया और मैं युवक कांग्रेस का कार्यकर्ता बन गया। वर्ष 1977 में हमारे जिलों में कांग्रेस लगभग खाली हो गई। मैं, इंदिरा भक्त कांग्रेसजनों और युवा कांग्रेसजनों के साथ कांग्रेस का झंडा थामकर खड़ा रहा। सन् 1990 के बाद पहाड़ों में कांग्रेस संकट में आई। कई सूरमा दाएं-बाएं हो गए।

राज्य आंदोलन के फलस्वरूप कांग्रेस को खलनायक चित्रित करने लगे। यहां तक कि सन् 1996 में लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार नहीं मिल पा रहे थे, तब भी मैं साथियों के साथ कांग्रेस का झंडा थामे खड़ा रहा। आज के कालखंड में भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के खिलाफ झंडा थामे खड़ा हूं। केंद्र सरकार का दंश झेला और झेल रहा हूं। मगर कांग्रेस और उत्तराखंडियत का झंडा थामे अटल खड़ा हूं। मैं हारा, मगर हार के बाद न कांग्रेस छोड़ी, न क्षेत्र छोड़ा। यदि अल्मोड़ा संसदीय सीट आरक्षित नहीं होती, हारता-जीतता मगर वहीं से लड़ता।हरिद्वार ने मुझे अपनाया, तो मैं अभी पूरी शक्ति और समर्पण के साथ हरिद्वार के भाई-बहनों के साथ हूं। मैंने हर चुनाव में सीट नहीं बदली है। कार्यकर्ताओं के साथ हार में भी खड़ा रहा हूं। यही कारण है कि जिन विधानसभा सीटों में मैं हारा, दूसरे चुनाव में कांग्रेस जीती है।शायद इसलिए मैं तांत्रिक हूं, शायद इसीलिए मैं घमंडी हूं और गलतफहमी का शिकार हूं। तंत्र का सहारा लिए अब भी खड़ा हूं। मगर यह तंत्र कार्यकर्ताओं और उत्तराखंडियत पर विश्वास रखने वाले भाई-बहनों का है तो दोस्तो ये बात तो रही हरीश रावत के पोस्ट की।

दरअसल दोस्तो हरीश रावत के सीएम रहने के दौरान उनके सबसे पावरफुल साथी रहे रामनगर से कांग्रेस के नेता रणजीत रावत ने उनसे मनमुटाव के बाद एक बार आरोप लगाया था कि हरीश रावत चुनाव जीतने के लिए तंत्र मंत्र का सहारा लेते हैं और इसके बाद पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी ने तांत्रिक वाली बात छेड़ी तो हरीश रावत ने इसका जवाब दे दिया है. कांग्रेस के अंदर इस समय जो अंदरूनी राजनीति चल रही है, आने वाले दिनों में इसमें बयानबाजी और बढ़ेगी ये तय है। कांग्रेस के भीतर उठे “तांत्रिक” बयान से शुरू हुआ पूरा सियासी विवाद, जो अब सीधे पार्टी के दिग्गज नेताओं की बयानबाजी तक पहुंच चुका है। हरीश रावत के इस तीखे और भावनात्मक जवाब के बाद जहां कांग्रेस के अंदर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं, वहीं सियासी गलियारों में भी इस बयान को लेकर अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। अब देखना होगा कि पार्टी इस पूरे विवाद को कैसे संभालती है या फिर आने वाले दिनों में ये बयानबाजी और ज्यादा तूल पकड़ती है फिलहाल उत्तराखंड की राजनीति में “तांत्रिक” शब्द ने एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ा दिया है।