जी हां दोस्तो उत्तराखंड के पहाड़ों में एक अनोखी तस्वीर सामने आई है, जहां पहाड़ के युवाओं को छोड़ दूसरे प्रदेश के युवाओं को दे दी जिम्मेदारी अब पहाड़ी नहीं बल्की हरियाणा का युवक पहाड़ों में बांट रहा चिट्ठी-पत्री। आखिर क्या है इसकी वजह और क्यों बना हरियाणा का युवक पहाड़ों का पोस्टमैन? बाताउंगा आपको पूरी खबर। जी हां दोस्तो उत्तराखंड के पहाड़ों से पलायन की कहानी कोई नई नहीं है, लेकिन अब तस्वीर और भी चिंताजनक होती जा रही है। रोजगार और सुविधाओं की कमी ने जहां पहाड़ी युवाओं को गांव छोड़ने पर मजबूर किया है, वहीं अब उनके हिस्से की नौकरियों पर बाहर के लोग काबिज होते दिख रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि ठेठ पहाड़ के गांवों में चिट्ठी-पत्री बांटने का काम भी अब पहाड़ के युवाओं के बजाय हरियाणा के युवा करेंगे। आखिर ये व्यवस्था किस ओर इशारा कर रही है?त्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से लगातार पलायन हो रहा है ,जिसकी मुख्य वजह रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। इतना ही नहीं बल्कि पहाड़ के युवा रोजगार की तलाश में अपना घर गांव छोड़ने तक को मजबूर है ,वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड में ही उनकी नौकरियों पर बाहर के लोग डाका डालने लगे हैं। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि अब ठेठ पहाड़ के गांव में चिट्ठी पत्री बांटने का कार्य भी पहाड़ के युवाओं के इससे नहीं आ रहा है बल्कि इस काम को अब हरियाणा के युवा करेंगे।
दोस्तो आपको जानकारी देते चले चमोली और रुद्रप्रयाग जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में डाकघर के ग्रामीण डाक सेवक विभागीय तौर पर शाखा डाक पाल और सहायक डाक पाल कहे जाते हैं। दरअसल यहां पर 80 शाखा डाक पाल और सहायक डाकपाल पद पर 75 ऐसे युवाओं की नियुक्ति हुई है जो हरियाणा के हैं। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हरियाणा के युवा ठेठ पहाड़ के गांव में लोगों को कैसे और किस भाषा बोलचाल में संपर्क कर दायित्व का निर्वहन करेंगे। सूत्रों की माने तो चमोली डाक मंडल जिसमें चमोली और रुद्रप्रयाग जिला आता है, यहां 80 ग्रामीण डाकपाल जिसमें शाखा डाकपाल और सहायक डाकपाल के पद हैं वहां पर 75 पदों पर हरियाणा के युवाओं की तैनाती हुई है। जबकि केवल 5 पदों पर स्थानीय जिलों और उत्तराखंड के युवाओं को नियुक्ति मिली… दोस्तो ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जिन्हे पहाड़ की भौगोलिक स्थिति रहन-सहन और बोली भाषा तक मालूम नहीं आखिर वह किस तरह से ठेठ पहाड़ के गांव में चिट्ठी पत्री बाटेंगे और पोस्ट ऑफिस से संबंधित सरकार की नीतियों और योजनाओं को समझाएंगे तथा बताएंगे। दोस्तो इससे पहले भी चमोली और रुद्रप्रयाग जिले के डाकघर यहां तक की मुख्य डाकघर गोपेश्वर में भी बिहार के युवाओं की तैनाती महत्वपूर्ण पदों पर हुई थी। जबकि कुछ ऐसे पद पर भी युवाओं की नियुक्ति हुई जिसमें कंप्यूटर से संबंधित कार्य का दायित्व उनके पास था। हालांकि जानकारी और शिकायत मिली थी कि उन्हें कंप्यूटर संचालन की बेसिक जानकारी ही नहीं थी और अब डाकपाल के पद पर भी बाहर के लोगों ने डाका डाल दिया है। सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं है, बल्कि पहाड़ की पहचान, भाषा और स्थानीय समझ का भी है। जब पहाड़ के युवा रोजगार के अभाव में पलायन को मजबूर हों और उनकी ही धरती पर बाहरी लोगों को प्राथमिकता मिले, तो चिंता लाजमी है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और विभाग इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं और क्या भविष्य में पहाड़ के युवाओं को उनके हक का रोजगार मिल पाएगा। फिलहाल, यह मामला नीति और नीयत—दोनों पर सवाल खड़े करता है।