HC ‘योग्यता के बिना MD पद पर नियुक्ति अवैध’ | MD PTCUL l CM Dhami l Uttarakhand News

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योग्यता के बिना एमडी पर नियुक्ति अवैध जी हां ये कमेंट उत्तराखंड हाई कोर्ट है और उस मामले में जिस मामले इससे पहले नियुक्त को लेकर खूब शोर मयाया था। सियासी सवालों के बीच उत्तराखंड हाई कोर्ट ना सिर्फ नियुक्ती को अवैध बता दिया बल्की सरकार से जवाब देने के लिए कह दिया है। क्या है ये पूरा मामला पूरी खबर मेरी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो वैसे पद कोई भी उसके लिए योग्यता तो होनी चहिए ना दोस्तो खबर ये कि नैनीताल की दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने पिटकुल यानी पॉवर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पद पर पीसी ध्यानी की नियुक्ति रद्द कर दी है. न्यायालय ने कहा कि ध्यानी को नियुक्त करते वक्त, ऊर्जा के तीन निगमों- पिटकुल, यूपीसीएल और यूजेवीएनएल में प्रबंध निदेशक व निदेशक नियुक्ति करने की जो 2021 की नियमावली है, उसकी अवहेलना की गयी है। साथ ही दोस्तो ये नियमावली का हवाला देकर कह दिया गया कि प्रावधान है कि मैनेजिंग डायरेक्टर केवल तकनीकी व्यक्ति ही हो सकता है। यानी उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि इंजीनियरिंग की होनी चाहिए। ध्यानी इस अर्हता को पूरी नहीं करते थे हालांकि ध्यानी के बचाव में सरकार के वकीलों ने अदालत में तर्क दिया कि कुछ मामलों में प्रैक्टिकल अनुभव को औपचारिक तकनीकी योग्यता के बराबर माना जा सकता है लेकिन इस सरकारी कुतर्क को अदालत ने मानने से इनकार कर दिया। जज इसके अलावा दोस्तो इससे पहले अदालत से निर्देश मिलने के बाद सरकार ने अपनी कार्यपालिका शक्तियों का उपयोग करते हुए मंत्रिमंडल की बैठक में एक फैसला लिया था। जिसमें कहा गया था कि ऊर्जा के तीनों निगमों में गैर तकनीकी व्यक्ति भी प्रबंध निदेशक बन सकेंगे।

अब दोस्तो मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई क्योंकि उसने एक सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर रैंक के अधिकारी को हटाने के आदेश की अनदेखी की, जो लगभग तीन साल से इस पद पर थे। साथ ही वे इस पद के काबिल भी नहीं थे। कोर्ट ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी पावर आर मीनाक्षी सुंदरम को अगली सुनवाई में पेश होने और यह बताने का आदेश दिया है कि उन पर कोर्ट की अवमानना का मुकदमा क्यों न चलाया जाए। आब आपको बताता हूं कि हाईकोर्ट ने क्यों जारी किया अवमानना नोटिस थोड़ा गौर कीजिएगा। दोस्तो हाई कोर्ट ने मीनाक्षी सुंदरम के खिलाफ अवमानना का केस शुरू करने का आदेश इसलिए दिया क्योंकि राज्य का पावर डिपार्टमेंट 18 फरवरी को दिए गए अपने फैसले का पालन करने में नाकाम रहा। इस आदेश में पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL) के मैनेजिंग डायरेक्टर को पिछले तीन साल से ज़्यादा समय से एक याचिका पर सुनवाई के बाद निकालने का आदेश दिया गया था। अब थोड़ा कोर्ट के रुख को भी देकिए। दोस्तो अपने फैसले में कोर्ट ने कहा था कि पीटीसीयूएल के MD पीसी ध्यानी नियुक्त होने के काबिल नहीं थे. क्योंकि उनके पास नियमों के मुताबिक ज़रूरी इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं थी। गौर करने वाली बात तो ये भी कि नैनीताल हाईकोर्ट के 18 फरवरी के ऑर्डर के बाद मीनाक्षी सुंदरम ने कहा था कि सरकार ऑर्डर की स्टडी कर रही है और राज्य के लॉ डिपार्टमेंट की सलाह पर सही एक्शन लिया जाएगा लेकिन, सरकार हाई कोर्ट के ऑर्डर का पालन करने में फेल रही। इसके उलट कैबिनेट ने एमडी पीटीसीयूएल की नियुक्ति के नियम में बदलाव किया।

दोस्तो बुधवार को कैबिनेट के एक फैसले में पीटीसीयूएल के MD की नियुक्ति के लिए ज़रूरी इंजीनियरिंग क्वालिफिकेशन हटा दी गई और नॉन इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स को भी इस पद के लिए क्वालिफाई करने की इजाज़त दे दी गई। राज्य कैबिनेट के इस फैसले के आधार पर धामी सरकार HC के 18 फरवरी के फैसले के खिलाफ रिवीजन पिटीशन फाइल करने पर विचार कर रही थी तो दोस्तों, साफ है कि मामला सिर्फ एक नियुक्ति का नहीं, बल्कि नियमों, योग्यता और सरकार बनाम न्यायपालिका के टकराव का बन गया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि बिना निर्धारित तकनीकी योग्यता के एमडी पद पर नियुक्ति नियमों के खिलाफ है।अब सवाल ये है कि क्या सरकार कोर्ट के निर्देशों का पालन करेगी या इस फैसले को चुनौती देने की राह पर आगे बढ़ेगी? क्या नियम बदले जाएंगे या नियुक्ति प्रक्रिया पर और सख्ती आएगी?फिलहाल निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार को जवाब देना है।