Chardham Yatra 2022: उत्तराखंड में तीन मई को शुरू हुई चारधाम यात्रा में तीर्थयात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस दौरान चारधाम यात्रा में अहम भूमिका निभाने वाले घोड़े-खच्चरों की ही कोई कद्र नहीं की जा रही है। इनके लिए ना ही रहने की कोई समुचित व्यवस्था है और ना ही इनके मरने के बाद विधिवत अंतिम संस्कार किया जा रहा है। केदारनाथ पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों के मरने के बाद मालिक और हॉकर उन्हें वहीं पर फेंक रहे हैं, जो सीधे मंदाकिनी नदी में गिरकर नदी को प्रदूषित कर रहे हैं। ऐसे में केदारनाथ क्षेत्र में महामारी फैलने से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
बता दे, अब तक 1 लाख 25 हजार तीर्थयात्री घोडे़-खच्चरों से बाबा के धाम की यात्रा कर चुके हैं। केदारनाथ तक पहुंचने के लिए बाबा केदार के भक्तों को 18 से 20 किमी की दूरी तय करनी होती है। इस दूरी में यात्री को धाम पहुंचाने में घोड़ा-खच्चर अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन इन जानवरों के लिए भरपेट चना, भूसा और गर्म पानी भी नहीं मिल पा रहा है। तमाम दावों के बावजूद पैदल मार्ग पर एक भी स्थान पर घोड़ा-खच्चर के लिए गर्म पानी नहीं है। पिछले कुछ दिनों करीब 60 खच्चरों की मौत हो चुकी है। जिसे लेकर अब प्रशासन सतर्क हो गया है।
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की मौत का सांसद मेनका गांधी ने संज्ञान लिया है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से दूरभाष पर वार्ता कर चिंता व्यक्त की है। इस पर संज्ञान लेते हुए पर्यटन मंत्री महाराज ने पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा से बात कर घोड़े-खच्चरों को रेगुलेट करने के साथ उनसे इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है। महाराज ने पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर को सख्त हिदायत दी कि घोड़े-खच्चरों को चारा देने के बाद तीन से चार घंटे का आराम मिलना चाहिए। केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रियों की भीड़ के कारण जानवरों पर दबाव न पड़े। उन्होंने कहा कि मूक जानवरों का ध्यान रखना हमारा दायित्व है, इस तरह की घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।