Uttarakhand ‘वर्दी’ घोटाला कैसे हुआ? Uttarakhand Uniform Scam | Uttarakhand News | CM Dhami

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जी हां दोस्तो आज में आपको एक बड़े घोटाले के बारे में बताउंगा लेकिन उससे पहले में मै ये सवाल करना चाहूंगा, कि कैसे हो गया वर्दी घोटाला तो घोटाला कहीं भी किसी भी चीज में किया जा सकता है। Home Guard Uniform Procurement Scam कहने को तो वर्दी मामूली से लगती है ना कि एक कपड़ा ही तो है लेकिन इस कपड़े में भी एक बड़े अधिकारी ने कैसे कर दिया करोड़ों का खेल, किस सीधे सीएम धामी को लेना पड़ा एक्शन तो उसके बाद क्या हूआ। जी हां दोस्तो उत्तराखंड में एक बड़ा घोटाला सामने आया है जिसने सभी की नींद उड़ा दी है। राज्य के बड़े अधिकारियों के खेल के बाद यह मामला अब सीधे सीएम पुष्कर सिंह धामी तक पहुंच गया, और उन्होंने सख्त एक्शन लेने का आदेश दिया, लेकिन सवाल ये है—’वर्दी’ घोटाला आखिर हुआ कैसे? कौन हैं वो अधिकारी जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर खेल खेला, और क्या प्रशासन इस मामले में पूरी तरह जवाबदेह साबित होगा? बताउंगा आपको इस घोटाले के हर पहलू की पूरी कहानी, और साथ ही समझेंगे कि जनता और सिस्टम पर इसका क्या असर पड़ सकता है। दोस्तो मामला होमगार्ड विभाग से जुड़ा है होमगार्ड की वर्दी से जुडडा है अब जुड़ा क्या घोटाला हुआ है। वैसे इस मामले ने जब तूल पकड़ा तो की गृह विभाग ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जांच शुरू की, तो पता चला की घोटाले का आरोप डिप्टी कमांडेंट जनरल अमिताभ श्रीवास्तव पर लगा है। आरोप है कि उन्होंने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए एक करोड़ रुपये का वर्दी व अन्य सामान तीन करोड़ रुपये में खरीदा है।

दोस्तो इस पूरे मामले में कमांडेंट जनरल पीवीके प्रसाद ने विभागीय जांच कराने के बाद श्रीवास्तव की बर्खास्तगी और उनसे दो करोड़ रुपये की रिकवरी करने की संस्तुति करते हुए शासन को लिखा चुके हैं गृह सचिव शैलेश बगौली ने कहते हैं कि, इस मामले में 15 दिन पहले कमांडेंट जनरल होमगार्ड का पत्र मिला था। इसमें बताया गया था कि अमिताभ श्रीवास्तव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वित्तीय अनियमितताएं की हैं। इस मामले की जांच के लिए शासन स्तर के अधिकारियों की टीम बनाई गई है। आरोप है कि जवानों के लिए एक करोड़ रुपये की वर्दी तीन करोड़ रुपये में खरीदी गई। दोस्तो इस मामले में जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही जांच पूरी करने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी। लेकिन यहां मै आपको रोचक बात बताता हूं कि ये घोटाला कैसे हुआ है। दोस्तो कहा जा रहा है कि, अनियमितताएं वित्तीय वर्ष 2024-25 में हुई है। वर्ष 2025-26 में फिर इन दरों पर टेंडर निकाला गया तो तब कमांडेंट जनरल पीवीके प्रसाद ने यह बात पकड़ ली। उन्होंने टेंडर निरस्त कराते हुए घपले के आरोपी डिप्टी कमांडेंट जनरल (डीसीजी) अमिताभ श्रीवास्तव के खिलाफ केस दर्ज कराने, दो करोड़ रुपये की रिकवरी करने और सेवा से बर्खास्त करने की रिपोर्ट शासन को भेजी है।

दोस्तो सब इस वर्दी घोटाले की विभागिय जांच शुरू हुई तो फिर वो बात निकल कर सामने आ गई की कैसे एक होमगार्ड की वर्दी उसके तीन गुने दाम पर खरीदा गया यानि एक बड़े अधिकारी खूब चांदी काटी। दोस्तो विभागीय जांच में सामने आया है कि, डीसीजी अमिताभ श्रीवास्तव ने ठेकेदार के साथ मिलीभगत कर बाजार भाव से तीन गुना दामों पर सामान की खरीद की। दोस्तो इस घोटाले के सामने आने के बाद कमांडेंट जनरल ने विभाग में वर्दी की खरीद पर रोक लगा दी है। अधिकारियों और ठेकेदार के गठजोड़ ने एक करोड़ के सामान का बिल तीन करोड़ रुपये बनाया, लेकिन देखिए ना पैसे खाने कैसे कैसे जुगाड़ कर दिये जाते हैं आगे में आपको रेट दिखाने जा रहा हूं कैसे सौ दौ सौ की डंडे को कितने में खरीदा जूता, कपड़ा टोपी जैकेट सब कुछ जमा हुआ घोटला। दोस्तो इसमें 2024-25 के रेट पर ही टेंडर जारी किया गया था। 130 रुपये का डंडे की कीमत 375, 500 रुपये जूते की कीमत 1500 रुपये, 1200 रुपये की पैंट-शर्ट 3000 रुपये और 500 रुपये की जैकेट 1580 रुपये में खरीदी गई। डीजी ने जब बाजार भाव और टेंडर के रेट में जमीन-आसमान का अंतर देखा तो उनका माथा ठनका। उन्होंने तुरंत जांच टीम गठित की। टीम ने जब बाजार से कोटेशन लिए तो पता चला कि विभाग में हर सामान करीब तीन गुना दाम पर खरीदा जा रहा था। तो दोस्तों, ये वर्दी घोटाला आखिर हुआ कैसे? कौन हैं वो अधिकारी जिन्होंने बाजार भाव से तीन गुना दाम पर सामान खरीदा? क्या ये सिर्फ़ एक विभागीय अनियमितता है या सिस्टम में बड़ी कमज़ोरी भी है? कमांडेंट जनरल पीवीके प्रसाद ने जांच करके आरोपी को बर्खास्त कर दिया और दो करोड़ रुपये की रिकवरी की सिफारिश की, लेकिन सवाल ये भी है—क्या बाकी जुड़े लोग भी सजा पाएंगे? गजब है ना 130 रुपये का डंडा 375 में, जूते 1500 में, और जैकेट 1580 में—कैसे बन गया इतना बड़ा घोटाला? आरे भ्रष्ट अधिकारी कुछ तो छोड़ दो।