जी हां दोस्तो उत्तराखंड के गदरपुर में मचा है सियासी गदर और गदर ने चुनाव से ठीक पहले बीजेपी की पूरी पोल खोलने का काम किया है और गोलबंदी हो रही है वो साफ संकेत दे रही है कि उत्तराखंड बीजेपी में बड़ी फूट पड़ चुकी है। भारी गुटबाजी से इनकार यहां अब नहीं किया जा सकता, क्योंकि अब यहां सब खुलेआम दिखाई देना शुरू गया है। बीजेपी में क्या चल रह है किसको घेरने के लिए बीजेपी अलग-अलग धड़े अब जुट चुके हैं। पूरी खबर बताता हूं आपको अपनी इस रिपोर्ट के जिरिए। गदरपुर नाम छोटा, लेकिन सियासी गूंज बड़ी! उत्तराखंड बीजेपी के भीतर उठी ऐसी हलचल, जिसने संगठन की जड़ों तक सवाल खड़े कर दिए हैं। कभी एकजुट दिखने वाली पार्टी में अब गदरपुर के गदर ने वो लकीर खींच दी है, जिसके इस पार भी बीजेपी और उस पार भी बीजेपी! आख़िर क्या है वो वजह, जिससे सत्ता में बैठी पार्टी दो बड़े धड़ों में बंटती नजर आ रही है? क्या यह सिर्फ अंदरूनी मतभेद हैं, या फिर आने वाले चुनाव से पहले भारी गुटबाजी का साफ संकेत? गदरपुर से उठा ये सियासी तूफान, पहले देहरादून तक और फिर दिल्ली तक क्यों पहुंच गया सब ये जानना चाह रहे हैं दोस्तो शुरुआत बीजेपी में उठते इस बड़े बंबडर की जड़ से करता हूं। उत्तराखंड बीजेपी के कद्दावर नेता वर्तमान विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे इन दिनों भूमि अतिक्रमण विवाद में फंसे हुए हैं।
बाजपुर के विचपुरी गांव की एक 68 वर्षीय महिला ने बीजेपी विधायक अरविंद पांडे पर भूमि लीज से जुड़े विवाद में गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला ने उपजिलाधिकारी को शिकायत सौंपकर लीज से अधिक भूमि पर अवैध कब्जे और धमकी देने का आरोप लगाया वैसे ये मामला तो अभी का है जिससे बीजेपी के विधायक अरविंद पांडे की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दी। वैसे इससे पहले तमाम मामलों पर अरविंद पांडे तमाम छोटे बड़े मामलों पर बयानबाजी कर प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाने के साथ सरकार को भी इशारों-इशारों में कटघरे में खड़ा करते दिखाई दिए। इससे इतर मामले में ट्विस्ट तब आया जब एक अरविंद पांडे सरकार प्रशासन को घेरते दिखाई दे रहे थे। उसी बीच अरविंद पांडे के घर पर अतिक्रमण हटाने का नोटिस चस्पा होने से राजनीति गर्माती दिखाई। बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण से अरविंद पांडे नाराज हैं, तो उनके समर्थकों में भी गुस्सा है. आज बीजेपी के दो सांसद और दो विधायकों के अरविंद पांडे से मिलने के कार्यक्रम के बाद उत्तराखंड के सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई। अगे देखिए कैसे बीजेपी वाले ही बीजेपी वालों को ठिकाने लगाने का काम कर रहे हैं वो पता चलता है अरविंद पांडे को मिलते समर्थन से एक तरफ बात ये हो रही थी कि केंद्रीय में उत्तराखंड पहुंच रहे हैं यानि हरिद्वार।
वहीं दूसरी तरफ एक ये खबर निकल कर आई बीजेपी के चार बड़े नेताओं की सरकार से नाराज चल रहे विधायक अरविंद पांडे से मुलाकात करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार लोकसभा सीट से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत,गढ़वाल लोकसभा सीट के सांसद अनिल बलूनी, हरिद्वार विधायक मदन कौशिक और डीडीहाट विधायक बिशन सिंह चुफाल के साथ अरविंद पांडे से मिलने जाएंगे। ये मै नहीं कह रहा हूं ये वो पत्र कह रहा है जो पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेद्र सिंह रावत के यहां जारी हुआ और पत्र में नीचे और लोगों के नाम भी लिखे जो गदरपुर विधायक के यहां पहुंचेगे। इससे ये माना गया की बीजेपी में जबरदस्त तरीके से लांबंदी घेराबंदी शुरू हो चुकी है। एक तरफ सरकर और मुख्यमंत्री धामी दिखाई देते हैं तो दूसरी तरफ बीजेपी के तमाम दिग्गज, वैसे दोस्तो पिछले दो-तीन महीनों से उत्तराखंड में सियासी घमासान छिड़ा हुआ है। कभी अंकिता भंडारी हत्याकांड के मामले में बीजेपी की परेशानी बढ़ी, तो फिर उसके बाद कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति द्वारा एक राज्य की युवतियों-महिलाओं पर दिए गए विवादित बयान ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ाईं। अंकिता भंडारी हत्याकांड पर सरकार द्वारा सीबीआई जांच के आदेश ही दिए गए थे कि तब तक उधम सिंह नगर में एक किसान ने आत्महत्या कर ली। मामला जमीनों पर कब्जे को लेकर लगे आरोपों का था। इतने में भूमि पर अतिक्रमण के आरोप लगाते हुए बीजेपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वर्तमान में विधायक अरविंद पांडे के घर अतिक्रमण हटाने का नोटिस लग गया, तब से ये मामला सुर्खियों में है। उधर दोस्तो पिछले कुछ दिनों से ही नहीं बल्कि पिछले कई महीनों से बीजेपी के वरिष्ठ विधायक और पूर्व की त्रिवेंद्र सरकार में शिक्षा मंत्री रहे अरविंद पांडे की सरकार से नाराजगी की खबरें अब आम हो चुकी हैं। वह पहले भी धामी सरकार के खिलाफ दिए गए बयानों से चर्चाओं में रहे, तो वहीं इस बार अंकिता भंडारी हत्याकांड का विषय हो या फिर उधम सिंह नगर में किसान की आत्महत्या, खुलकर सरकार से सीबीआई जांच की मांग की। इसी बीच जब अरविंद पांडे पर ही जमीन कब्जाने के आरोप लगे, तो अरविंद पांडे ने सरकार से निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की। मामला थोड़ा शांत होता कि उससे पहले जिला प्रशासन द्वारा कुछ ऐसी कार्रवाई की गई कि इसे अरविंद पांडे के खिलाफ सरकार की घेराबंदी के रूप में देखा गया। एक बार फिर अरविंद पांडे को उनके साथ हो रही कथित नाइंसाफी को लेकर बोलने का मौका मिल गया। त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में दो सांसदों और दो विधायकों के अरविंद पांडे से आज मिलने का कार्यक्रम ऐसे समय में है, जब उन पर 7 दिन के अंदर जमीन कब्जाने, धमकी देने, राजनीतिक दबाव में एक्शन नहीं होने देने जैसे आरोप लगाए गए हैं. इससे उत्तराखंड में खासकर बीजेपी में काफी हलचल है, तो कुल मिलाकर तस्वीर अब साफ़ होती नजर आ रही है। गदरपुर से उठा सियासी बवंडर सिर्फ़ एक विधायक तक सीमित नहीं है, बल्कि उसने उत्तराखंड बीजेपी की अंदरूनी दरारों को सबके सामने ला खड़ा किया है।एक तरफ सरकार और मुख्यमंत्री धामी,तो दूसरी तरफ पार्टी के वो दिग्गज चेहरे,जो खुलकर या इशारों-इशारों में असहमति जता रहे हैं।अरविंद पांडे के बहाने सवाल अब सिर्फ़ जमीन विवाद का नहीं रहा,बल्कि ये सवाल बन गया है—क्या बीजेपी में अब फैसले संगठन से नहीं, गुटों से तय हो रहे हैं?और क्या आने वाले चुनाव से पहले पार्टी के भीतर यह खींचतान और गहरी होगी?आज समर्थन में जुटते सांसद और विधायक ये इशारा जरूर कर रहे हैं कि बीजेपी के भीतर “सब कुछ ठीक है” वाला दावाअब ज़मीन पर कमजोर पड़ता दिख रहा है।अब देखना ये होगा किये सियासी गदर यहीं थमता है,या फिर देहरादून से दिल्ली तक बीजेपी की रणनीति और नेतृत्व दोनों को नई चुनौती देने वाला है।