जी हां दोस्तो आज एक खबर ऐसी जो बताती है कि संघर्ष तमाम था और आज अब बारी सम्मान की है, जो सिर्फ नेता नहीं है। जेल से लेकर सत्ता के शिकर तक का रास्ता इनता भी तो आसान नहीं हुआ होगा और फिर देश के उस सर्वोच्च पद पर आसीन होना वो ही कहलाएँगे पद्मश्री। Padma Bhushan Bhagat Singh Koshyari बताउंगा आपको पूरी खबर एक संघर्ष की ऐसी कहनी, जो आपने पहले कभी नहीं सुनी होगी और ना देखी होगी। दोस्तो केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले साल 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस बार 131 नामी हस्तियों को यह सम्मान मिलेगा, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं और इस सूची में एक नाम विशेष रूप से सबका ध्यान खींच रहा है—उत्तराखंड के वरिष्ठ नेता भगत सिंह कोश्यारी। सामाजिक सेवा और संगठनात्मक योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से नवाज़ा गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगत सिंह कोश्यारी की कहानी सिर्फ सम्मान तक सीमित नहीं है आपातकाल में जेल की कोठरी, मुख्यमंत्री का पद, महाराष्ट्र के राज्यपाल का सफर और अब पद्म भूषण—उनका राजनीतिक और सामाजिक जीवन संघर्ष, सेवा और राजनीति का अनोखा संगम है।
दोस्तो केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले साल 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति अनुसार, इस साल कुल 131 पद्म पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। पद्म भूषण की लिस्ट में सामाजिक क्षेत्र के योगदान के लिए प्रसिद्ध भगत सिंह कोश्यारी का भी नाम शामिल किया गया है। आइए जानते हैं कि आखिर कौन हैं भगत सिंह कोश्यारी और उन्हें पद्म भूषण के लिए क्यों चयनित किया गया है। दोस्तो आपको बता दूं कि भगत सिंह कोश्यारी सामाजिक क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उन्होंने उत्तराखण्ड के सीएम के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं और महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रह चुके हैं। भगत सिंह कोश्यारी जन्म साल 1942 में उत्तराखंड के बागेश्वर स्थित नामती चेताबागड़ गांव में हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी को समर्पित किया है। क्यों दोस्तो आज जब भगत सिंह कोश्यारी को सम्मान की बात हो रही है तो उनके जेल जाने की बात भी हो रही है। दोस्तो भगत सिंह कोश्यारी भी उस व्यवस्था के विरोधी जिसका विरोद तब के कई बड़े नेतओँ ने किया था। जी हां दोस्तो वो विरोध था आपातकाल का आपात काल का विरोध के कारण गए जेल गए भगत सिंह कोश्यारी।
दोस्तो, भगत सिंह कोश्यारी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अल्मोड़ा में पूरी की और उसके बाद आगरा यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में पढ़ाई की है। वह राष्ट्रीय महासचिव रहने के साथ-साथ उत्तराखंड भाजपा के पहले अध्यक्ष भी रहे हैं। इंदिरा गांधी ने जब साल 1975 में आपातकाल लगाया था, तो उन्होंने इसका विरोध किया था और पौने दो साल तक जेल में बंद रहे और साल 1977 में रिहा हुए। लेकिन भगत सिंह कोश्यारी के सम्मान पर चर्चा से पहले उनके सियासी सफर पर नजर डालना जरूरी है, क्योंकि सफल व्यक्ति को तो सब देख पाते हैं, लेकिन उनके संघर्ष को क्या कोई देखना चाहता है वो इस लिए क्योंकि उत्तराखंड के सीएम बनने से पहले साल 1997 में वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य चुने गए और फिर उसके बाद उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री बने। इसके बाद साल 2001 में उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से 6 महीने पहले कोश्यारी को अक्टूबर 2001 से मार्च 2002 तक मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। उसके बाद साल 2002 से 2007 तक उन्होंने उत्तराखंड में नेता विपक्ष की भूमिका निभाई। दोस्तो भगत सिंह कोश्यारी का सियासी सफर बड़ा ही दिलचस्प रहा है, लेकिन सियासत से इतर वो महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रहे। दोस्तो साल 2019 में आरएसएस से नजदीकी अधिक होने के कारण भाजपा ने इन्हें महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया, लेकिन राजनीतिक विवादों के कारण साल 2023 में उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। भगत सिंह कोश्यारी को एक अनुभवी नेता माना जाता है, जिनका राजनीतिक जीवन शिक्षा, संगठन और शासन, तीनों क्षेत्रों से जुड़ा रहा है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं हमारे अभिभावक तुल्य भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा समस्त उत्तराखंडवासियों के लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है। निश्चित रूप से उनका संपूर्ण सार्वजनिक जीवन सादगी, सिद्धांतों, राष्ट्रसेवा और समाजहित को समर्पित रहा है। उन्होंने अपने दीर्घ राजनीतिक जीवन में सदैव जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी तथा उत्तराखंड सहित देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन संघर्ष, अनुशासन और मूल्यों की राजनीति का प्रेरणादायी उदाहरण है। पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना के संवर्धन के लिए उनके प्रयास हम सभी के लिए प्रेरणास्तंभ हैं। समस्त प्रदेशवासियों की ओर से भगत सिंह कोश्यारी को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चयनित होने पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं। भगत सिंह कोश्यारी की कहानी सिर्फ एक राजनीतिक सफर नहीं, बल्कि संघर्ष, सेवा और समर्पण का प्रतीक है। आपातकाल में जेल की सजा, उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनना, महाराष्ट्र में राज्यपाल का पद और अब पद्म भूषण—यह सफर उनकी निष्ठा और देशभक्ति को दर्शाता है। यह सम्मान न सिर्फ उनके व्यक्तिगत योगदान का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखंड और पूरे देश के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में उनकी छाप को भी उजागर करता है।