Vikasnagar की सड़क पर कानून को खुली चुनौती! | Chakrata | Viral Video | Uttarakhand

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जी हां दोस्तो उत्तराखंड में एक सवाल हमेशा ये रहा है कि यहां कि नदीयों का सीना चीरा जा रहा है अवैध खनन ने प्रदेश की कमर को तोड़ने का काम किया है, लेकिन दिन-रात नदियों का सीना छलनी कर रहे खनन माफिया, पुलिस-प्रशासन नाकाम -खाकी के दामन पर लगते रहे हैं खनन माफिया की ‘सरपरस्ती के दाग, अन्य विभाग भी सवालों में लेकिन आज एक और चौकाने वाली तस्वीर सामने आई जहां कहा ये गया कि खनन माफियाओं ने वन विभाग के SDO को हाईवे पर दौड़ा कर पीटा! क्या है ये पूरा मामला मेरी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो तो क्या अब वो विभाग जिसके कंधे पर खनन पर लगाम लगाना और कार्रवाई करना है वो माफिया के निशाने पर हैं। एक बार नहीं कई बार आपने ऐसी तस्वीरें और खबरें सुनी होंगी की खनन माफिया ने विभाग के अधिकारियोंको मार पीटा, भगाया, ट्रेक्टर चढाया या चढाने की कोशिश की लेकिन दोस्तो अब ये बीच सड़क होने लगा है। जी हां ये तस्वीर काफी चर्चा में है।

दोस्तो महज कुछ सैंकेंड का वीडीओ है लेकिन इसके पीछे की वजह जो बताई जा रही है वो बड़ी है और चेतावनी भी है। खबर ये आई कि विकासनगर के चकराता में वन विभाग के SDO और उनकी टीम अपना कर्तव्य निभा रहे थे। मतलब अवैध खनन की वीडियो रिकॉर्डिंग करना सबूत जुटाने की एक कानूनी प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा था और उसी से नाराज हुए अवैध खनन माफिया ने उस एसडीयो को दौड़ा-दौड़ाकर पीट डाला। अब यहां विभाग वाले इस सोच में कि एक तरफ कार्रवाई करने का दबाव और दूसरी तरफ जिस तरह से उन पर जानलेवा हमला किया गया, वह सरकारी तंत्र को खुली चुनौती है। अगर एक अधिकारी सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या? यहां दोस्तो आपको बता दूं कि विकासनगर और यमुना घाटी के क्षेत्रों में अवैध खनन एक गंभीर समस्या है। स्थानीय लोगों को ढाल बनाकर जिस तरह से अधिकारियों को निशाना बनाया गया, या ये कहूं कहूं इससे पहले भी बनाया जाता रहा है। वो ये बताने के लिए कापी है कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। वीडियो रिकॉर्डिंग रोकने का मतलब है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। जी हां दोस्तो इधर पुलिस कह रह है कि उप प्रभागीय वनाधिकारी कालसी चकराता वन प्रभाग ने कोतवाली विकासनगर पर एक लिखित शिकायत दर्ज करायी कि भी कालसी से वापस जाने के दौरान उन्हें बाडवाला क्षेत्र में हरिपुर से यमुनानदी की ओर एक डम्फर जाता हुआ दिखाई दिया, जिसकी वीडियो बनाने के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों द्वारा उसका विरोध करते हुए उनके साथ मारपीट करते हुए सरकारी कार्य में बाधा डाली गई।

प्राप्त तहरीर के आधार पर कोतवाली विकासनगर में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही पुलिस को दोनों तरफ से शिकाती पत्र मिला है जिसके हिसाब से पुलिस आगे की कार्वाई कर रही है। दोस्तो वैसे ये मामला इतने छोटे भी नहीं होते यहां एसडीओ की पीटाई हो गई। इससे पहले मेने एक खबर दिखाई थी दोस्तो प्रदेश में खनन माफियाओं के हौसले कितने बुलंद हैं, कि सितारगंज की रनसाली वन रेंज में अवैध खनन रोकने गए वन दारोगा और वनकर्मियों को खनन माफियाओं ने ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास किया. जब वो इस प्रयास में कामयाब नहीं हुए तो उन्होंने वन दारोगा और वनकर्मियों की मौके पर जमकर धुनाई कर दी। जहा उस तस्वीर को भी देख लीजिए। दोस्तो एसी तस्वीरें शासन प्रशान के लिए बड़ी परेशानी पेश करने वाली हैं और अकसर ऐसी घटनाओं में अक्सर देखा गया है कि वन विभाग की टीम के पास पर्याप्त सुरक्षा बल नहीं होता संवेदनशील इलाकों में छापेमारी या चेकिंग के दौरान पुलिस बैकअप की कमी अधिकारियों को भीड़ के सामने लाचार बना देती है और जब अपराधियों को पता होता है कि वे कानून के हाथ मरोड़ सकते हैं, तभी वे इस तरह की हिम्मत जुटाते हैं। अगर इस मामले में तत्काल और कठोर गिरफ्तारी नहीं हुई, तो भविष्य में कोई भी ईमानदार अधिकारी फील्ड में जाने से कतराएगा। दोस्तों, ये सिर्फ एक वीडियो या एक घटना नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की नदियों और संसाधनों की सुरक्षा के लिए खड़े होने वाले अधिकारियों के सामने बढ़ती चुनौती का आइना है वैसे तो कहने वाले कहते ही है कि ऐसे काम बिना बड़े अधिकारियों की सरपर्स्ती के हो ही नहीं सकते लेकिन जब कुछ एक घटनाओं पर कार्वाई करने की हिम्मत दिखाई भी जाती है तो फिर अधिकारियों की खुद की जान पर बन आती है।

कानून के रखवाले ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा और राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा किस हाल में होगी, ये सोचने की बात है। दोस्तो अवैध खनन माफिया की हिम्मत और संगठन को तोड़ने के लिए तत्काल और ठोस कार्रवाई बेहद जरूरी है। यही समय है कि प्रशासन और पुलिस एकजुट होकर यह संदेश दें कि कोई भी अधिकारी या सरकारी कर्मचारी अपने कर्तव्य का निर्वहन करने से डरने वाला नहीं है। खनन माफिया बेखौफ है व कहीं न कहीं उसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बड़े स्तर पर संरक्षण भी हासिल है। अवैध खनन को लेकर विकासनगर, वसंत विहार, कैंट, सहसपुर, डोईवाला, ऋषिकेश, राजपुर व रायपुर थाना क्षेत्र समेत प्रेमनगर हमेशा विवादों में रहते हैं। गुजरे कुछ वर्षों से इन सभी क्षेत्र में नदियों में अवैध खनन जोरों पर चल रहा है। पहले रात में चोरी-छिपे यह धंधा चल रहा था, लेकिन आजकल सुबह से रात तक नदियों का सीना चीरा जा रहा। खनन माफिया के सरपरस्तों में सफेदपोशों का भी बड़ा हाथ माना जाता है। जब पुलिस-प्रशासन इनके विरुद्ध डंडा उठाते हैं, हर बार सफेदपोश आड़े आ जाते हैं। पूर्व में खनन माफिया और पुलिस के गठजोड़ भी उजागर हो चुके हैं और आरोपित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध बड़े स्तर पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन अवैध खनन का धंधा बदस्तूर जारी है।