खाड़ी देशों की जंग में फंस गए भारतीय! | Middleeast Tensions | Israel | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो मध्य-पूर्व की धरती पर युद्ध की आग भड़क उठी है एक तरफ़ ईरान, दूसरी तरफ़ इज़रायल अमेरिका और बीच में फंसी हैं हज़ारों ज़िंदगियां। दोस्तो मिसाइलों की गूंज, सायरनों की आवाज़ और आसमान से बरसती आग के बीच भारतीय भी मदद की गुहार लगा रहे हैं। घरों से हजारों किलोमीटर दूर, अनजान सरज़मीं पर हर पल दहशत के साये में गुजर रहा होगा। अंदाजा लगाया जा सकता है और चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि देवभूमि के सैकड़ों लाल भी इस जंग के बीच फंसे होने की खबर है। कोई छात्र है, कोई नौकरी के सिलसिले में गया था तो कोई अपने बेहतर भविष्य के सपनों के साथ वहां पहुंचा था लेकिन अब उनकी कोई जानकारी नहीं है। उत्तराखंड के सैकड़ों लोगों की कोई जानकारी नहीं है। पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो सीधे सवाल की बात करता हूं फिर पूरी खबर विस्तार से बताउंगा। क्या सभी भारतीय सुरक्षित हैं?सरकार की तरफ़ से क्या कदम उठाए जा रहे हैं? और आखिर कब तक अपनों की घर वापसी संभव हो पाएगी? जी हां दोस्तो ये तो सच है कि जहां जंग की लपटों के बीच, उम्मीद की राह तलाश रहे हैं हिंदुस्तानी अपने उत्तराखंडियों की संख्या भी कम नहीं है। ऐसे में दोस्तो सैकड़ों परिवारो की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। दोस्तो इस वक्त मिडिल ईस्ट में युद्ध की स्थिति है दोस्तो ईरान पर अमेरिका और इजरायल का संयुक्त हमला और ऐसे इजरायल-ईरान तनाव के बीच बढ़ते हमलों ने हालात को गंभीर बना दिया जिससे वहां रह रहे भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है।

उत्तराखंड के सैकड़ों प्रवासी भी ओमान, यूएई समेत अन्य देशों में काम कर रहे हैं। जो हालिया ड्रोन और मिसाइल हमलों की गूंज से सहमे हुए हैं। दोस्तो मिडिल ईस्ट के देशों खासकर संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, सऊदी अरब, ओमान और ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हैं। इनमें उत्तराखंड के सैकड़ों लोग भी शामिल हैं लगातार हो रहे हमलों की खबरों के बाद उत्तराखंड में रह रहे उनके परिजन फोन और सोशल मीडिया के जरिए हाल चाल ले रहे हैं। दोस्तो देहरादून के मोहकमपुर माजरी के रहने वाले कैलाश बिष्ट इस समय ओमान के दुकुम शहर में एक शिपिंग कंपनी में कार्यरत है। उन्के मुताबिक उनके आवास से करीब एक किलोमीटर दूरी पर दो ड्रोन धमाके हुए। बताया जा रहा है कि हमला ओमान ड्राइडॉक कंपनी परिसर के पास हुआ। कैलाश बिष्ट ने बताया कि ओमान सरकार ने नागरिकों और प्रवासियों से अपील की है कि वे पूरी जिम्मेदारी व सतर्कता बरतें। सैन्य और सुरक्षा गतिविधियों से जुड़ी किसी भी तस्वीर, वीडियो या जानकारी को साझा करने से बचने को कहा गया है। अफवाहें फैलाने या अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करने की सलाह दी गई है। इधर दोस्तो दिल्ली में उत्तराखंड सरकार के स्थानीय आयुक्त अजय मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताते हैं कि भारत सरकार ने मिडिल ईस्ट में स्थित भारतीय दूतावासों के संपर्क में रहने की एडवाइजरी जारी की है।

भारतीय नागरिकों के लिए एक लिंक भी साझा किया गया है, जिसमें वे अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं ताकि, आपात स्थिति में दूतावास सीधे संपर्क कर सकें। दोस्तो बताया जा रहा है कि उत्तराखंड सरकार ने भी सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मिडिल ईस्ट में रह रहे प्रदेश के नागरिकों का डेटा तैयार किया जाए। स्थानीय पुलिस और इंटेलिजेंस को भी इस संबंध में जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि, जरूरत पड़ने पर समन्वित कार्रवाई की जा सके दुबई में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडी गिरीश पंत इन दिनों उत्तराखंड आए हुए हैं। जबकि, उनका परिवार दुबई में है उन्होंने बताया कि हालिया हमलों की खबरों के बाद परिवार की चिंता बढ़ी हुई है. जबकि, संयुक्त अरब अमीरात सरकार ने नागरिकों के लिए खास एडवाइजरी जारी की है। इसी तरह से सऊदी अरब में भी तकरीबन 27 लाख भारतीय हैं, जिसमें से बड़ी संख्या में उत्तराखंड के लोग भी मौजूद हैं और वहां पर भी इसी तरह से सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है। ईरान ने दुबई, ओमान, कतर, सऊदी समेत 6 से 7 देशों में अमेरिकन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है और उन्हीं जगहों पर हमले हुए हैं। फिलहाल, अभी किसी प्रवासी उत्तराखंडी के घायल होने की सूचना नहीं है। इधर मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन ने एक पत्र उत्तराखंड सरकार और मुख्य सचिव को भेजा है। जिसमें उन्होंने बताया है कि ईरान में मंगलौर के लोग भी फंसे हुए हैं। ऐसे में उन्होंने मंगलौर के लोगों के साथ ही उत्तराखंड के अन्य नागरिकों की सुरक्षित भारत वापसी की मांग की है। बई में हवाई सेवा प्रभावित होने से नहीं लौट पा रहा रामनगर का परिवार: ईरान के जवाबी हमले के बाद दुबई में हवाई सेवा प्रभावित हुई है जिसके चलते रामनगर के रहने वाले नितिन अग्रवाल अपने परिवार के साथ दुबई में ही रूके हुए हैं. वो वापस नहीं आ पा रहे हैं। नितिन अग्रवाल ने अपने भाई नमित अग्रवाल को वाट्सएप कॉल पर बताया कि हम सुरक्षित हैं, लेकिन एयरसेवा बंद होने के कारण वे अभी वापस नहीं आ पा रहे हैं। मिडिल ईस्ट में गूंज रहे धमाकों की आवाज भले हजारों किलोमीटर दूर हो, लेकिन उसकी चिंता उत्तराखंड के घर-घर में महसूस की जा रही है. प्रदेश के सैकड़ों परिवार इस समय अपने परिजनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। फिलहाल, हालात पर भारत सरकार और संबंधित देशों की सरकारें नजर बनाए हुए हैं। प्रवासी भारतीयों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें।