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उत्तराखंड की एक शिक्षिका ने कैसे बच्चों को दी नई उड़ान, जिससे अब मिलेगा राष्ट्रपति से सम्मान, जिसने बना दिया पहाड़ के बच्चों को अंग्रेसी में मास्टर। उसके बारे में बताने आया हूं। Manjubala Inspiring Teacher दगड़ियों अपने उत्तराखंड में ऐसे कई सारे पहाड़ी गांव मौजूद है जहां पर विद्यालय दूरस्थ इलाकों में स्थित है हालांकि इसके बावजूद भी कई सारे शिक्षक व शिक्षिकाएं बच्चों के भविष्य को संवारने में लगे हैं, जिसके चलते उन्हें कई बार उनके द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों के लिए पुरस्कृत तक किया जा चुका है। ऐसी ही कुछ कहानी है चंपावत जिले के सड़क से दूरस्थ पहाड़ी गांव में मौजूद सरकारी स्कूल की जहां की शिक्षिका मंजूबाला ने बच्चों को नई राह दिखाई है जिसकी बदौलत बच्चे अंग्रेजी विषय में दक्ष बने है। इतना ही नहीं बल्कि इस स्कूल को जिले का पहला अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बनाने के साथ ही इवनिंग क्लासेस की पहल भी मंजूबाला ने कराई जिनके योगदान के चलते उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। जो जानकारी मिल पाइ दगड़ियों उसके अनुसार चंपावत जिले के बाराकोट ब्लॉक के च्यूरानी प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मंजूबाला का नाम राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की सूची में आया है।
इतना ही नहीं बल्कि मंजूबाला वर्ष 2005 से च्यूरानी विद्यालय में कार्यरत है जिन्होंने वर्ष 2011 में विद्यालय को जिले का पहला अंग्रेजी माध्यम स्कूल बनाया और वह इवनिंग में भी विद्यार्थियों को अंग्रेजी और हिंदी पढाती हैं, इसके साथ ही वह बच्चों को कुमाऊनी भी सिखाती हैं। मंजूबाला पूर्व मे स्काउट एंड गाइड की ब्लॉक सचिव भी रह चुकी है जो वर्तमान में गाइड कैप्टन है। शिक्षिका मंजूबाला बताती है कि उनका मूल विषय अंग्रेजी है जिनके द्वारा पढ़ाए गए कई सारे बच्चों का चयन सेना और SSB में हो चुका है। इतना ही नहीं बल्कि राजीव गांधी जवाहर नवोदय विद्यालय और कस्तूरबा गांधी विद्यालय में भी विद्यार्थी निकले है। मंजूबाला बताती है कि मेरा प्रयास रहता है कि बच्चे किताबी ज्ञान को अपने जीवन में भी उतारे, दोस्तो आपको बता दूं कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं की सूची जारी की है जिसमें प्रधान अध्यापिका मंजूबाला समेत देश के 45 शिक्षकों को सूची में शामिल किया गया है।
मंजूबाला उत्तराखंड की इकलौती ऐसी शिक्षिका हैं जिन्हें इस वर्ष पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। शिक्षकों को 5 सितंबर को दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। दगड़ियों ऐसा नहीं है कि शिक्षिका मंजूबाला को पहली बार सम्मान मिल रहा है। मंजूबाला को वर्ष 2021 में शैलेश मटियानी पुरस्कार, वर्ष 2022 में तीलू रौतेली, वर्ष 2023 में आयरन लेडी, वर्ष 2020 में एमएचआरडी से टीचर ऑफ द ईयर, दो बार एनएचआरओ से सोशल वर्कर, शिक्षक सारथी, अनमोल रतन आदि पुरस्कार मिल चुके हैं, और अब उत्तराखंड के पहाड़ी जिले चंपावत के एक छोटे से गांव च्यूरानी में बच्चों के भविष्य को संवारने वाली शिक्षिका मंजूबाला को इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह सम्मान उन्हें 5 सितंबर को दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति के हाथों मिलेगा, ये गर्व की बात है दगड़ियों।