जोशीमठ में भू-धंसाव का खतरा अभी टला नहीं है। धीरे-धीरे अन्य होटल भी इसकी जद में आ रहे हैं। होटल मलारी इन और माउंट व्यू की तरह ही रोपवे तक जाने वाले रास्ते में स्थित स्नो क्रेस्ट और कॉमेट होटल भी भू-धंसाव से तिरछे होने लगे हैं। दोनों मालिकों ने अपने होटलों को खाली करना शुरू कर दिया है। नगर क्षेत्र में 22 और भवनों में दरारें आ गईं। ऐसे भवनों की संख्या बढ़कर अब 782 हो गई है। भवनों में भी नई दरारें आने और पुरानी दरारों की चौड़ाई में बढ़ोतरी का क्रम जारी है। इस सबसे आमजन के साथ शासन, प्रशासन और सरकार के माथे पर चिंता के बल भी बढ़ गए हैं। इस बीच राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं।
जोशीमठ में बदरीनाथ हाईवे से सटे क्षेत्रों में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं। हाईवे पर स्थित दो और होटल स्नोकृष्ट व कामेट भूधंसाव के कारण झुक गए हैं। अगल-बगल बने चार-चार मंजिल के ये होटल विघटित किए जा रहे होटल माउंट व्यू व मलारी इन से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित हैं, जिनमें क्रमश: 17 और 30 कमरे हैं। जब ये होटल बनकर खड़े हुए, तब इनकी छत में करीब दो फीट का फासला था। अब भूधंसाव के कारण दोनों होटल तेजी से एक-दूसरे की तरफ झुक रहे हैं। यह सिलसिला नौ जनवरी को शुरू हुआ था। पिछले 24 घंटे में झुकाव ज्यादा बढ़ा है, इससे इनकी छत एक-दूसरे को छूने लगी है। संचालकों ने होटलों को खाली कर दिया है।