Kashipur रेबीज इंजेक्शन संकट अस्पताल खाली हाथ! | Udham Singh Nagar | Uttarakhand News

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दोस्तो जानवर के काटने पर एक इंजेक्शन लगता है जिसे कहते एंटी रेबीज। दोस्तो उत्तराखंड के काशीपुर अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन की भारी कमी ने मरीजों की परेशानियाँ बढ़ा दी हैं। हजार की मांग पर सिर्फ 10 इंजेक्शन उपलब्ध हैं। ऐसे में जरूरतमंद मरीजों को मजबूरन बाजार से इंजेक्शन खरीदकर लगवाना पड़ रहा है। क्या सरकार इस संकट से प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएगी, लेकिन आज अस्पतालों की हालत क्या है। वो बताउंगा मै आपको अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो उधम सिंह नगर के काशीपुर में आवारा कुत्तों के आतंक से छुटकारा दिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां बेहद कमजोर नजर आ रही हैं। काशीपुर के एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय में एंटी रेबीज इंजेक्शन की भारी कमी ने मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. हालात ऐसे हैं कि कुत्ते के काटने के बाद लोग अपनी जान बचाने के लिए बाजार से महंगे इंजेक्शन खरीदने को मजबूर हैं। जहां देशभर में कुत्तों का आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की सेवाएं लचर हो गई है। जहां कुत्तों के काटने के मरीजों की संख्या बड़ी है तो वही अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शनों की भारी कमी है। यह हाल कहीं और का नहीं जनपद उधम सिंह नगर के काशीपुर एलडी भट्ट चिकित्सालय का है जहां पर लोग अपनी जान को बचाने को लेकर चिंता में है तो वही रेबीज के इंजेक्शन ना मिलने से मरीजों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मरीज को मजबूर होकर अस्पताल के बाहर से रेबीज के इंजेक्शन खरीद कर अस्पताल में लगवाने को मजबूर हैं।

आपको बता दे की प्रदेश सरकार लोगों के स्वास्थ्य को दुरुस्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा लाख दावे कर रही है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के कारण मरीजो की जान जोखिम में पड़ी है। कारण है कि जनपद उधम सिंह नगर के काशीपुर में एलडी भट्ट चिकित्सालय मैं एंटी रेबीज इंजेक्शन की भारी कमी दिख रही है यही वजह है की मरीज अस्पताल के बाहर से एंटी रेबीज के इंजेक्शन खरीद कर सरकारी अस्पताल में ला रहे हैं और इंजेक्शन लगवा रहे हैं जिससे लोगों को खासी परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है.. मरीज के द्वारा बताया यह भी जा रहा है कि काशीपुर के सरकारी अस्पताल में कुत्तों के काटने के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। नगर के एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय मैं काफी लंबे समय से चिकित्सकों का भी अभाव चल रहा था, लेकिन कुछ समय से यहां पर महिला डॉक्टर फिजिशियन कीर्ति मेहता ने काशीपुर राजकीय चिकित्सालय में अपना पदभार ग्रहण कर लिया है, उनके पदभार ग्रहण करने के उपरांत ओपीडी में काफी इजाफा हुआ है। चिकित्सकों के अभाव के कारण राजकीय चिकित्सालय मे काशीपुर में 200 से 250 ओपीडी ही हो पाती थी, लेकिन कुछ चिकित्सकों बढ़ोतरी होने के बाद ओपीडी में इजाफा हुआ है और यहां 500 से 700 तक ओपीडी प्रतिदिन हो रही है। राजकीय चिकित्सालय काशीपुर का रुख किया तो पता चला कि यहां पर एंटी रैबीज इंजेक्शन का अभाव है और लोग बाजार से एंटी रेबीज इंजेक्शन खरीद कर ला रहे हैं, इसके साथ ही दवाइयां का भी अस्पताल में काफी अभाव देखा गया।

मरीज अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने के लिए आते हैं लेकिन अधिकारी और चिकित्सक मरीज को रेबीज के इंजेक्शन ना होने का हवाला देकर वहां से भगा देते हैं जिससे मरीजों में भारी आक्रोश है क्योंकि मरीज एंटी रेबीज इंजेक्शन मार्केट से ₹400 में खरीद कर लाकर सरकारी अस्पताल में लगवा रहे हैं मरीज का यह भी कहना है कि सरकारी अस्पताल सिर्फ नाम के ही रह गए क्योंकि यहां मरीजों को ना हीं दबाइयाँ मिल पा रही है और ना ही रेबीज के इंजेक्शन मिल रहे हैं ऐसे में गरीब परिवार के मरीज जाए तो जाए कहां, जब हमने डॉक्टर अमरजीत सिंह साहनी नगर स्वास्थ्य अधिकारी से वार्ता की तो उन्होंने बताया की एंटी रैबीज इंजेक्शन देहरादून से आते हैं, लेकिन वहां पर भी इंजेक्शनों का अभाव है ,फार्मासिस्ट द्वारा इंजेक्शनों की डिमांड की गई थी लेकिन हजार इंजेक्शन में से मात्र 10 इंजेक्शन ही उपलब्ध हो पाए हैं, एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि 2 मार्च से इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है अब देखना यह है कि कब तक एंटी रेबीज इंजेक्शन और दवाइयां उपलब्ध हो पाती है। सीएमएस प्रभारी व नगर स्वास्थ्य अधिकारी। दोस्तो, काशीपुर के एलडी भट्ट उप जिला चिकित्सालय में एंटी रेबीज इंजेक्शन की कमी ने मरीजों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। हजार की डिमांड पर सिर्फ 10 इंजेक्शन उपलब्ध हैं और मरीज मजबूर होकर बाजार से महंगे इंजेक्शन खरीद कर अस्पताल में लगवा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति सुधारने के लिए कार्रवाई की बात कही है, लेकिन अब सवाल यही है कि कितनी जल्दी यह संकट खत्म होगा और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी