Haridwar: खानपुर विधायक की पत्नी सोनिया शर्मा BSP से निष्कासित, अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप

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हरिद्वार जनपद में बसपा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार की पत्नी बसपा प्रदेश महासचिव और लोकसभा सीट से संभावित प्रत्याशी सोनिया शर्मा को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। दरअसल सोनिया शर्मा बीती 29 मार्च को बसपा में शामिल हुई थीं। हालांकि सोनिया शर्मा द्वारा पार्टी में गुटबाजी के चलते इस्तीफा देने की बात कही गई है। बता दें कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे बीएसपी के हरिद्वार जिला अध्यक्ष अनिल चौधरी द्वारा निष्कासन पत्र में लिखा गया है कि सोनिया शर्मा को पार्टी में अनुशासनहीनता एवं पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण पार्टी से निष्कासित किया जाता है। वहीं पत्र में लिखा गया है कि हरिद्वार बहुजन समाज पार्टी उत्तराखंड जिला यूनिट द्वारा सोनिया शर्मा पत्नी उमेश कुमार (विधायक खानपुर) को पार्टी में अनुशासनहीनता अपनाने व पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की दी गई रिपोर्ट की विभिन्न सूत्रों से छानबीन करने के बाद, बीएसपी से निष्कासित कर दिया गया है। इनको पार्टी में अनुशासनहीनता व पार्टी विरोधी गतिविधियों के बारे में कई बार चेतावनी भी दी जा चुकी थी। लेकिन इसके बावजूद भी इनकी कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया है। इसकी वजह से पार्टी हित में इनको पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।

बताते चलें कि सोनिया शर्मा को बसपा में शामिल होने के बाद प्रदेश महासचिव व हरिद्वार लोकसभा प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बसपा से निष्काषित होने के बाद विधायक उमेश कुमार की पत्नी सोनिया शर्मा ने निष्कासन पर अपना बयान जारी किया है। उन्होंने एक पत्र जारी करते हुए बताया कि एक दिन पहले ही वह बसपा सुप्रीमो को अपना इस्तीफा भेज चुकी हैं। उन्होंने पत्र में लिखा कि 2024 लोकसभा चुनाव में एक मज़बूत दावेदारी प्रदेश के कई बसपा नेताओं को सहन नहीं हो रही है। हरिद्वार जनपद की जनता की सच्ची सेवा करने का मेरा मक़सद कई नेता अपनी भीतरघाती राजनीति के चलते पूरा नहीं होने देंगे। इसलिए जनता और अपने समर्थकों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए मेरा इस्तीफ़ा देना ही सही है। सोनिया शर्मा ने बताया कि पार्टी की आपसी गुटबाजी के कारण उन्होंने इस्तीफा दिया है, जबकि आज उन्हें निष्कासन के पत्र की जानकारी मिल रही है। उन्होंने बताया कि प्रोटोकॉल के तहत उनको हटाने के लिए प्रदेश स्तर से निष्कासन पत्र जारी होना चाहिए था। लेकिन जल्दबाजी के चलते जिलाध्यक्ष ने प्रदेश महामंत्री को निष्कासन पत्र मीडिया में दिया है, जो साफ दर्शाता है कि पार्टी में अंदरूनी कलह चरम पर है।