उत्तराखंड में कानून व्यवस्था को लेकर सियासत तेज हो गई है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य सुरक्षित हाथों में नहीं है। उनका आरोप है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और हर दिन आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं। अब कहा जाने लगा है कि जनता की सुरक्षा पर ध्यान देने के बजाय हिंदू-मुस्लिम की राजनीति में उलझी हुई है। ऐसे में बड़ा सवाल है—क्या वाकई उत्तराखंड में कानून का राज कमजोर पड़ रहा है? दोस्तो प्रदेश के मैदानी इलाकों हालात ऐसे बिगड़े कि लोगों के सिर पर ऐसा लग रहा है कि हमेशा कोई ना कोई खतरा बना ही रहता है, लेकिन उससे इतर देरहादून और हल्द्वानी में या तराई वाले इलाकों में अपराध का ग्राफ हमेशा चिंता का विषय रहा है। अब लोग कहां रहेंगे पहाड़़ी क्षेत्रों में गांव में जंगली शिकारी घात लगाए बैठा है और मैदानी इलाकों में अपराधी सवाल तो कई हैं लेकिन उससे पहले मै आपको अपनी सियासत की एक तस्वीर दिखाना चाहता हूं। देहरहादून में 16 दिन में 5 ह’त्याएं। 29 जनवरी: विकासनगर, मनीषा हत्याकांड, 31 जनवरी: ऋषिकेश, शिवाजी नगर, 2 फरवरी: देहरादून, गुंजन हत्याकांड, 11 फरवरी: देहरादून, तिब्बती मार्केट,13 फरवरी: देहरादून, सिल्वर सिटी मॉल
दोस्तो उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे अपराधों पर राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। कांग्रेस ने वहीं शुक्रवार को राजपुर रोड स्थित व्यस्ततम सिल्वर सिटी मॉल में हुई गोली कांड की घटना पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी. और कह दिया कि बीते 16 दिनों से यही खबर सामने आ रही है कि सुबह सुबह के वक्त में अमुक जगह पर किसी की हत्या कर दी गई। इसलिए कांग्रेसी पहुंच गए सीधे डीजीपी साहब से जवाब लेने। दोस्तो कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति को संभालने की जिम्मेदारी पुलिस की होती है। राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रण में रखना पुलिस का काम होता है, लेकिन सरकार के इशारे पर सत्ता में बैठे हुए मंत्रीगणों के इशारे पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इन मंत्रियों के निजी अपेक्षाओं की पूर्ति कर रहे हैं। इन्ही मंत्रियों की अपेक्षा के अनुरूप पुलिस अपना आचरण कर रही है। इसलिए आम जनता की सुरक्षा के दायित्व को दरकिनार कर दिया गया है। यह उसी का परिणाम है कि आम लोगों की जान आफत में बनी हुई है।
समूचा पुलिस महकमा मुख्यमंत्री और मंत्रियों की अपेक्षाओं को पूरा करने में लगा हुआ है। दोस्तो गणेश गोदियाल ने कहा प्रदेश के हाल बुरे हैं। बाहर के अपराधियों को लाकर यहां व्यापार करवाया जा रहा है। राज्य की कानून व्यवस्था चौपट हो गई है लोग मर रहे हैं और मरने से पहले सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर कह रहे हैं कि इनको पैसों की जरूरत है। गणेश गोदियाल ने कहा अंकिता हत्याकांड की जांच को अब भी भटकाया जा रहा है। उसके बावजूद सरकार बेशर्मी की हद करते हुए हिंदू मुस्लिम का नरेटिव सेट कर रही है। उन्होंने इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धर्मपत्नी की ओर से एक दिन की छुट्टी नहीं लिए जाने पर भी जमकर हमला किया है। उनका कहना है कि आने वाले 2027 के चुनाव में प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री धामी को हमेशा के लिए छुट्टी देने जा रही है।दोस्तो, प्रदेश में बढ़ते अपराध और बिगड़ती कानून व्यवस्था ने सियासत का तापमान बढ़ा दिया है। कांग्रेस नेताओं ने सीधे डीजीपी से जवाब मांगा और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। अब जनता की निगाहें इस पर टिकी हैं कि उत्तराखंड में कानून का राज कब तक बहाल होगा और आम नागरिक सुरक्षित महसूस कर पाएंगे। आगामी चुनाव से पहले यह मुद्दा निश्चित ही राजनीतिक बहस का केंद्र बन जाएगा।