देहरादून: अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे गेस्ट टीचरों ने आंदोलन के साथ-साथ बच्चों के भविष्य को देखते हुए ऑनलाइन पढ़ाने का निर्णय लिया है। जिससे उनका आंदोलन भी चलता रहे और वे शिक्षण कार्य प्रभावित न हो। हालांकि दूर दराज पहाड़ों में ऑनलाइन शिक्षण की व्यवस्था न होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। गेस्ट टीचर सबसे ज्यादा दूर दराज के क्षेत्रों में ही पढ़ाते हैं। गेस्ट टीचर उनके पदों को खाली नहीं मानने और उनकी गृह जिले में तैनाती का प्रस्ताव कैबिनेट में आने के बाद भी शासनादेश न होने से नाराज हैं। उन्होंने तदर्थ नियुक्ति दिए जाने की मांग की।
गेस्ट टीचरों का कहना है कि वह विभाग में आठ साल से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनका भविष्य सुरक्षित नहीं है। इन सभी मांगों को लेकर गेस्ट टीचर बीते मंगलवार से शिक्षा निदेशालय पर धरना दे रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक भट्ट ने गेस्ट टीचरों से आह्वान किया कि वह धरनास्थल से ऑनलाइन माध्यम से बच्चों की पढ़ाई जारी रखें। जिससे बच्चों का नुकसान न हो। माध्यमिक अतिथि शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षा निदेशालय पर गेस्ट टीचरों का धरना चल रहा है। इस बीच गेस्ट टीचर आए दिन नए-नए तरीकों से आंदोलन कर रहे हैं। प्रदेश में चार हजार से अधिक गेस्ट टीचर कार्यरत हैं। आरोप है कि पिछले कई वर्षों से दूरदराज के क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देने के बावजूद भी प्रदेश सरकार उनके हितों की अनदेखी कर रही है। उनके सुरक्षित भविष्य को लेकर अब तक कोई नीति नहीं बनी।