उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों की गरिमा खतरे में! गढ़वाल से लेकर कुमाउं तक देवालय, श्रद्धा और परंपरा को चुनौती दी जा रही है। अब कैंची धाम के पास ही खुल रही है बल शराब की दुकान, और मामला इतना बढ़ा कि स्थानीय BJP विधायक ने खुद मोर्चा खोल दिया। क्या उत्तराखंड में अब तीर्थस्थलों और मंदिरों के पास मदिरालयों का खुलना सामान्य हो जाएगा? कैसे धार्मिक स्थलों की पवित्रता पर सवाल उठ रहे हैं और इस पर क्या कार्रवाई हो रही है। दोस्तो वैसे बड़ी हैरानी होती है जब हमारी पहचान हामरे देवस्थल हैं, लेकिन उन देवस्थलों के आस-पास या फिर उसके रास्ते में शराब के ठेके क्यों खोले जा रहे हैं। राजस्व ठीक है लेकिन क्या ऐसी नीति से हमारी देवभूमि को नुकसान नहीं हो रहा है। ठेके हटाओ vs ठेके बढ़ाओ! उत्तराखंड में 65 करोड़ के लिए 55 शराब दुकानें! क्या सरकार सुन रही है जनता की आवाज? ऐसे में अब बीजेपी के विधायक ही सवाल पूछ रहे हैं या कहूं विरोध कर रहे हैं। दोस्तो खबर ये है कि विश्व प्रसिद्ध केंची धाम से कुछ ही दूरी पर स्थित बेतालघाट ब्लॉक के रातीघाट में अंग्रेजी शराब की दुकान खोलने की तैयारी है और तैयारी के साथ ही विरोध शुरू हो गया दोसतो विरोध मै कौन है ये बी कबिले गौर है। नैनीताल विधायक सरिता आर्या की मौजूदगी में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने नैनीताल में डीएम को ज्ञापन सौंपा। जिसमें कहा गया कि रातीघाट एक शांत, शिक्षण और सांस्कृतिक क्षेत्र है। ऐसे संवेदनशील इलाके में शराब की दुकान खोलना आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ और सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने जैसा कदम है। बेतालघाट ब्लॉक प्रमुख ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए ये तक कह दिया कि एक ओर क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी हो रही है, वहीं दूसरी ओर शराब की दुकान खोलने का निर्णय थोपना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
दोस्तो रातीघाट से कुछ ही दूरी पर स्थित आस्था के केंद्र केंची धाम मंदिर की गरिमा को भी इस फैसले से ठेस पहुंचेगी। वहीं महिलाओं का कहना है कि अगर शराब की दुकान खोली गई, तो क्षेत्र में छेड़छाड़, अपराध और सामाजिक अव्यवस्था बढ़ेगी। जिसका खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ेगा। इसके साथ ये भी चेतावनी दी जा रही है कि अगर शराब की दुकान खोलने का प्रयास किया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। दोस्तो ऐसी तस्वीर कोई पहली बार देखने को नहीं मिल रही है चारधाम यात्रा मार्गों (ऋषिकेश, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, सोनप्रयाग, हरसिल-झाला) पर शराब के ठेके और उनके पास मांस की दुकानें होने से स्थानीय जनता और तीर्थयात्रियों में भारी नाराजगी जता चुके है। विरोध भी खूब हो चुका है। दोस्तो ऐसे में कहा ये जाता है कि जो देवभूमि की पवित्रता को प्रभावित कर रही है। स्थानीय लोग इन दुकानों को बंद करने के लिए लगातार विरोध-प्रदर्शन और धरने देते दिखाई देते हैं अभी हाल में आपने देवप्रयाग में बड़ा बवाल देखा होगा जहां पवित्रता पर एक नई बहस शुर हो चुकी है। दोस्तो अपने पवित्र धाम केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की पवित्रता को लेकर इन स्थानों पर शराब के ठेके होना आस्था के विपरीत माना जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के बिच बी आबकारी विभाग पर कोई असर होता नहीं दिखता, ऐसा क्यों खाराश्रोत (ऋषिकेश), देवप्रयाग, और तिलवाड़ा में शराब की दुकानों के खिलाफ स्थानीय ग्रामीण, महिलाएं और सामाजिक संगठन सड़क पर उतरे लेकिन हुआ कुछ नहीं। दोस्तो केदारनाथ मार्ग पर तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, काकड़ागाड़ और गंगोत्री के पास हरसिल-झाला में शराब के ठेकों को लेकर विशेष आपत्ति जताई गई। वहीं दोस्तो दूसरी ओर बात प्रशासनिक रुख की करूं तो जबकि स्थानीय लोग दुकानें हटाने की मांग कर रहे हैं, आबकारी विभाग द्वारा राजस्व के लिए नए ठेके खोलने या मौजूदा दुकानों को बनाए रखने की खबरें हैं। अब तो आबकारी विभाग ने विश्व प्रसिद्ध धाम नीम किरौली धाम को भी नहीं छोड़़ा तो दोस्तों, साफ दिख रहा है कि उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों की पवित्रता और गरिमा को गंभीर चुनौती मिल रही है। केंची धाम से लेकर चारधाम यात्रा मार्ग तक शराब की दुकानें खुल रही हैं, और स्थानीय लोग, महिलाएं और जनप्रतिनिधि इसके खिलाफ लगातार विरोध कर रहे है, लेकिन सवाल ये है कि क्या हमारी आस्था और संस्कृति की सुरक्षा के लिए प्रशासन गंभीरता से कदम उठा रहा है? या राजस्व और लाभ के लिए पवित्र धामों के पास शराब के ठेके सामान्य होते जा रहे हैं स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की आवाज़ अब जोर पकड़ रही है, और भाजपा विधायक भी मोर्चा खोल चुके हैं। देखना होगा कि अब सरकार और आबकारी विभाग धार्मिक स्थलों की पवित्रता को बचाने के लिए क्या निर्णय लेते हैं।