उत्तराखंड में एलपीजी गैस को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, गैरसैंण में चल रहे बजट सत्र के दौरान गैस संकट का मुद्दा विधानसभा में जोरदार तरीके से गूंजा, जिसके बाद पूरे सिस्टम में हड़कंप मच गया। Uttarakhand Gas Cylinder Crisis आरोप लगे कि गैस सिलेंडरों की किल्लत के साथ-साथ कालाबाजारी भी हो रही है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो वहीं सदन में जब ये मामला उठा तो विधानसभा पीठ ने भी इसे गंभीरता से लिया। विधानसभा अध्यक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि गैस की कालाबाजारी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संबंधित अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दे डाले, लेकिन कांग्रेस ने इस बड़े मुद्दे को अपने ही अंदाज में उठाया। आखिर गैस की कमी क्यों पैदा हो रही है? क्या वाकई कालाबाजारी के चलते आम लोगों तक गैस नहीं पहुंच पा रही? और सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है? दोस्तो जैसा की सब जानते हैं गैस सिलेंडर को लेकर हाय तौबा मंची है कि गैस नहीं मिल रही है जब दोस्तो सड़क पर गैस को लेकर लाइन थी। विधायनसभा के गेट पर कांग्रेस का विरोध और प्रदर्शन था तो सदन के अंदर ये मुद्दा उठा। दोस्तो सदन में गैस सिलेंडर की किल्लत और कालाबाजारी का मुद्दा उठा। विपक्ष ने नियम 58 के तहत इस विषय पर चर्चा की मांग की। जिसे विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने स्वीकार किया. विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने सरकार और प्रशासन को जमाखोरी व ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
दोस्तो सदन में चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से कहा गया कि प्रदेश में एलपीजी गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर चिंता की स्थिति बन रही है। कई स्थानों पर जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा सरकार का दावा है कि घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई में कोई कमी नहीं है, लेकिन आने वाले दिनों में गैस की भारी किल्लत की आशंका है।दोस्तो जैसा की सदन में बताया गया कि प्रदेश में लगभग 29 लाख घरेलू गैस उपभोक्ता है। केवल देहरादून में ही करीब 70 गैस एजेंसियां संचालित हो रही हैं। इसके बावजूद पहाड़ी क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की स्थिति मैदानों से भी ज्यादा खराब बताई जा रही है। इधर इस बड़े मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री ने सदन में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और युद्ध जैसे हालात के बीच वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां सामने आ रही हैं, लेकिन राज्य सरकार इस बात को लेकर गंभीर है कि प्रदेश में एलपीजी गैस सिलेंडर की कोई किल्लत न हो। इधर दोस्तो सरकार का दावा है कि गैस सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग को रोकने के लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए हैं। वे समय समय पर स्थिति की समीक्षा करें और उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
चर्चा के दौरान जब विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने भी इस मामले पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने पीठ से निर्देश देते हुए कहा कि गैस एक अत्यंत आवश्यक वस्तु है, इसलिए सरकार और प्रशासन को इसकी जमाखोरी, डायवर्जन और ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए। उससे बिल्कुल अलग सदन के बाहर की वो तस्वीर थी। जहां कांग्रेस वाले इस अंदाज में दिखे। इस तरस्वीर के बाद आप वो भी देख लीजीए कि नेता प्रतिपक्ष ने कह दिया सरकार झूट बोल कर बचना चाहती। जनता त्राहीमाम- त्रहीमाम कर रही। इसके तुरंत बाद वो देखिए कि प्रदेश के मुख्यमंत्री धामी ने इस पूरे मामले पर क्या कहा। तो दोस्तों, गैरसैंण की विधानसभा में उठे इस मुद्दे ने साफ कर दिया है कि एलपीजी गैस की सप्लाई और उसकी उपलब्धता अब केवल प्रशासनिक विषय नहीं रह गई, बल्कि यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। एक तरफ विपक्ष सरकार पर गैस संकट, जमाखोरी और कालाबाजारी को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है, तो वहीं सरकार का कहना है कि प्रदेश में गैस की सप्लाई सामान्य है और किसी भी तरह की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार के इन दावों और निर्देशों के बाद जमीनी स्तर पर हालात कितने सुधरते हैं और क्या वाकई आम जनता को गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइनों और परेशानी से राहत मिल पाती है या नहीं।