जी हां दोस्तो अप्रैल में शुरू हो रही चारधाम यात्रा से पहले बदल दिए गए कई नियम, जो सीधे आपसे जुड़े हुए हैं। अगर कहीं आपने नियम नियम फॉलो नहीं करेंगे तो क्या कार्रवाई होगी। दोस्तों, चारधाम यात्रा से पहले बदरी-केदार दर्शन के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यूट्यूबर और ब्लॉगर्स सहित सभी यात्रियों के लिए दर्शन से पहले एफिडेविट देना अनिवार्य होगा। कौन-कौन से नियम बदले हैं और यात्रा पर इसका क्या असर पड़ेगा। दोस्तो एक तरफ अप्रैल में शुरू होने जा रही चारधाम यात्रा को लेकर व्यवस्थाएं अंतिम चरण में पहुंच गई हैं. बीकेटीसी ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए बड़ा बजट पास करते हुए कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी है। उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने यात्रा वर्ष 2026-27 को ध्यान में रखते हुए 121 करोड़ रुपये से अधिक का अनुमानित बजट पारित किया है। इस बार यात्रा 19 अप्रैल से अक्षय तृतीया के अवसर पर गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ शुरू होगी। इसके बाद केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल और बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। दोस्तो चारधाम यात्रा को लेकर इस बार कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया गैर सनातनी के प्रवेश में परिबंध के अलावा इस बार मंदिर परिसर के एक सीमित दायरे में यूट्यूबर, ब्लॉगर को प्रतिबंधित किया जाएगा। मोबाइल और कैमरे इत्यादि के लिए मंदिर परिसर BKTC द्वारा क्लॉकरूम बनाए जाएंगे। सभी के मोबाइल मंदिर परिसर में रखवाये जाएंगे।
इसके अलावा दोस्तो ये भी कि इस बार इस बात पर विशेष जोर दिया कि कुछ लोग तीर्थाटन और पर्यटन एक साथ जोड़ कर देख रहे हैं, जबकि दोनों में अंतर है। मंदिर के गर्भ गृह में किसी को भी मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं है। यहां तक की ख़ुद BKTC के अध्यक्ष भी मोबाइल अंदर ले कर नहीं जाएंगे। दोसतो इसके अलावा तीर्थ पुरोहितों के हितों को ध्यान में रखते हुए ‘तीर्थ पुरोहित कल्याण कोष’ की स्थापना का भी प्रस्ताव पारित किया गया है। साथ ही मंदिर परिसर के रखरखाव, रेलिंग मरम्मत, रंग-रोगन, ऑनलाइन पूजा व्यवस्था और वेबसाइट को और अधिक व्यवस्थित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। बीकेटीसी का कहना है कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी कर ली जाएंगी। दोस्तो श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बार यात्रा के प्रति उत्साह भी साफ नजर आ रहा है। 6 मार्च से 16 मार्च के बीच महज दो सप्ताह में 6 लाख 17 हजार 853 से अधिक तीर्थयात्रियों ने पंजीकरण कराया है। इनमें केदारनाथ के लिए 2 लाख 6 हजार से अधिक, बदरीनाथ के लिए 1 लाख 82 हजार से अधिक, गंगोत्री के लिए 1 लाख 15 हजार से अधिक और यमुनोत्री के लिए 1 लाख 13 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। वहीं, दोस्तो शीतकालीन यात्रा के दौरान भी श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या देखने को मिली। 16 मार्च 2026 तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शीतकालीन पूजा स्थलों पर दर्शन किए। बदरीनाथ के शीतकालीन स्थल योग बदरी पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर जोशीमठ में 20 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, जबकि केदारनाथ की शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में 31 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। दोस्तो बदरी केदार मंदिर समिति ने बड़ा फैसला लेते हुए दो धामों और अन्य 45 मंदिरों में गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला लिया था।
मंगलवार को बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने अभिनेत्री सारा अली खान का उदाहरण देते हुए बताया कि अब केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को आस्था का शपथ पत्र देना होगा। दोस्तो उत्तराखंड के प्रसिद्ध चारधामों में शामिल केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। बदरी-केदार मंदिर समिति ने अब इन मंदिरों में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नई व्यवस्था लागू करने की बात कही है, जिसके तहत श्रद्धालुओं को सनातन धर्म में आस्था का शपथ पत्र देना होगा। दरअसल, दोस्तो बदरी केदार मंदिर समिति (BKTC) की हाल ही में हुई बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में गैर सनातनियों के प्रवेश को वर्जित किया जाए। इस फैसले के बाद आज समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट की है तो दोस्तों, चारधाम यात्रा 2026 से पहले लिए गए ये फैसले साफ तौर पर संकेत दे रहे हैं कि इस बार यात्रा सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि नियम और अनुशासन के दायरे में भी होगी। चाहे मोबाइल पर रोक हो, यूट्यूबर-ब्लॉगर्स पर नियंत्रण या फिर आस्था से जुड़ा शपथ पत्र—हर बदलाव का मकसद यात्रा को व्यवस्थित और पवित्र बनाए रखना बताया जा रहा है। अब देखना ये होगा कि श्रद्धालु इन नए नियमों को किस तरह अपनाते हैं और क्या ये फैसले विवादों को जन्म देंगे या व्यवस्था को और बेहतर बनाएंगे। फिलहाल, अगर आप भी इस बार बदरी-केदार दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो इन नियमों को जानना और मानना बेहद जरूरी है।