जी हां दोस्तो गैरसैंण में बजट सत्र का दूसरा दिन वन मंत्री सुबोध उनियाल के पसीने छूट गए! सत्ता पक्ष के चार विधायक ने अपने ही मंत्री से ऐसे-ऐसे सवाल कर डाले कि मंत्रीजी बूरा फंस गए। वैसे सवाल तो कई थे विधायक भी कई थे। Uttarakhand Budget Session 2026 जहां पहाड़ों में जंगली जानवरों से होने वाले कृषि नुकसान पर ऐसे सवाल उठाए कि मंत्री फंसे नजर आए। क्या हुआ ऐसा की सदन में अपने ही मंत्री से सवाल करने लगे बीजेपी के विधायक और क्या मिला जवाब। बताउंगा आपको उन विधायकों के बारे में बी जिंहोने सदन में मंत्री जी को घेर लिया। दोस्तो भराड़ीसैंण बजट सत्र के दूसरे दिन वन मंत्री सुबोध उनियाल अपने ही विधायकों के सवालों पर फंस गये.पहाड़ों में जंगली जानवरों से कृषि को होने वाले नुकसान के सवाल पर सत्ता पक्ष के चार विधायक लामबंद दिखाई दिए। जिसमें नाम है मुन्ना सिंह चौहान, खजान दास, महेश जीना और विनोद कंडारी इन बीजेपी के विधायकों ने मंत्री सुबोध उनियाल से ऐसे सावल किए कि लोग ये सोचने पर मजबूर हो गए कि क्या ये बीजेपी के ही विधायक है या विपक्ष के क्योंकि मौका प्रश्न काल का था। ऐसे में गजब तरीके से अपने ही मंत्री से भिड़ते दिखाई दिए बीजेपी के विधायक।
दोस्तो उत्तराखंड की गीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान वन विभाग से जुड़े मुद्दों पर जमकर चर्चा हुई। मानव-वन्य जीव संघर्ष, मुआवजा, रोपवे परियोजना और वन कानूनों को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों के विधायकों ने वन मंत्री सुबोध से तीखे सवाल किए। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन भराड़ीसैंण में प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही वन विभाग से जुड़े मुद्दों पर सदन में गरमागरम बहस देखने को मिली. अधिकांश सवाल वन मंत्री सुबोध उनियाल से पूछे गए, जिनमें मानव-वन्य जीव संघर्ष, फॉरेस्ट क्लीयरेंस, जंगली जानवरों से फसल नुकसान और रोपवे परियोजनाओं जैसे विषय शामिल रहे। जी हां दोस्तो एक तरफ बीजेपी के ही विधायक हैं मुन्ना सिंह चौहान जो सवाल कर रहे हैं। नियम कायदों की बात कर रहे हैं। वैसे दोस्तो संसदीय कार्यों के मंत्री भी हैं सुबोध उनियाल और मुन्ना सिंह चौहान बीजेपी के वरिष्ठ विधायकों में शामिल हैं और वो संसदीय कार्य के मामले में अच्छी खासी जानकारी भी रखते हैं तो ऐसे में उनियाल साहब से तीखे सवाल हो गए। मंत्रीजी के पास जवाब कोई ठोस दिखाई दिया नहीं फिर वो तस्वीर देखने को मिली जब मुन्ना सिंह के सावाल पर विधायन सभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी का साथ मिला और अध्यक्ष ने भी सख्त लहजे में मंत्री को जानकारी दुरुस्त करने की नसीहत दे डाली।
दोस्तो ऐसे में वहीं दूसरी तरफ भाजपा विधायक खजान दास ने वन कानूनों को लेकर सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा कि क्या देश के अलग-अलग राज्यों में वन कानून अलग-अलग तरह से लागू होते हैं और उदाहरण के तौर पर हिमाचल प्रदेश का जिक्र किया. इस पर सदन में कांग्रेस विधायकों ने भी चुटकी ली। BJP के विधायक खजान दास ने यह भी पूछा कि उत्तराखंड में सड़कों से जुड़े कई प्रोजेक्ट वर्षों तक फॉरेस्ट क्लीयरेंस के कारण क्यों अटके रहते हैं? इसके जवाब में वन मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ समय में फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया में तेजी आई है. सरकार की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले साल PWD, पेयजल और विद्युत सहित छह विभागों से जुड़े 713 प्रकरणों में स्वीकृति दी गई है। सदन में पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों से कृषि को हो रहे नुकसान का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। विधायक खजान दास, महेश जीना और विनोद कंडारी ने इस विषय पर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की और कहा कि जंगली जानवरों से फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित हो रही है। वहीं वन (संरक्षण) अधिनियम और वनों से जुड़े स्थानीय लोगों के हक-हकूक को लेकर भी सदन में बहस हुई। इस दौरान भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने सरकार से पॉइंटेड सवाल पूछे। मंत्री की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विधानसभा अध्यक्ष को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।
स्पीकर ऋतु खंडूड़ी ने वन मंत्री से कहा कि यह प्रदेश के ज्वलंत मुद्दे हैं। इसलिए इन पर गंभीरता के साथ स्पष्ट जवाब दिया जाए। खास बात यह रही कि आज केवल विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक खजान दास, विनोद चमोली और मुन्ना सिंह चौहान भी कई मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते नजर आए। सवालों की बौछार के बीच वन मंत्री सुबोध उनियाल को कई बार स्पष्टीकरण देना पड़ा, जिससे प्रश्नकाल के दौरान सदन का माहौल काफी गर्म रहा। कैसे गैरसैंण में बजट सत्र के दूसरे दिन वन मंत्री सुबोध उनियाल अपने ही विधायकों के सवालों के बीच फंसे नजर आए। सत्ता और विपक्ष, दोनों तरफ से उठे सवालों ने सदन का माहौल गर्म कर दिया। जंगली जानवरों से फसल नुकसान, वन कानून, रोपवे परियोजनाएं और स्थानीय हक-हकूक जैसे ज्वलंत मुद्दों पर मंत्री को कई बार स्पष्टीकरण देना पड़ा। सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक मुन्ना सिंह चौहान, खजान दास, महेश जीना और विनोद कंडारी ने भी सवालों की बौछार कर दी, जिससे यह साफ हो गया कि पहाड़ी क्षेत्रों के ये मुद्दे अब विधानसभा में अनदेखा नहीं किए जा सकते। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी का हस्तक्षेप और फटकार भी इस बात का सबूत थी कि ऐसे ज्वलंत मुद्दों पर जवाबदेही बेहद जरूरी है। यानी, सिर्फ प्रश्नकाल ही नहीं बल्कि ये संदेश भी साफ है कि पहाड़ की समस्याएं अब सदन तक पहुंच चुकी हैं और सरकार को इन पर गंभीरता से काम करना होगा। मैं हूँ पंकज रौतेला, उत्तराखंड न्यूज के साथ। बने रहिए हमारे साथ, क्योंकि हर सवाल और हर जवाब सीधे आपके जीवन से जुड़ा है।