उजड़े आशियाने विधायक के छलके आंसू | Rudraprayag | Uttarakhand News | Cloudburst | Breaking News

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जी हां दोस्तो उत्तराखंड में त्रासदी पीड़ितों का दर्द देख, विधायक भी नहीं रोक पाईं आंसू, सड़क पर भीगी रातें और बेबस आंखें। Uttarakhand Disaster Live Update दोस्तो आपदा तबाही वो जलजला वो मौत आकर चली जाती है, लेकिन जो पीछे छूट जाता है। वो मंजर जिसे देख कलेजा मुह को आता है। उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग जिले के बसुकेदार क्षेत्र में शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे बादल फटने से इलाके में भारी तबाही हुई है। पहाड़ों से आए सैलाब के रास्ते में जो भी आया, वो बह गया। छेनागाड़ का सैलाब भी अपने पीछे धराली और थराली की तरह बर्बादी के निशान छोड़ गया। लोग कहते हैं कि इस आपदा में अपना सब कुछ गंवा दिया। इस दौरान पीड़ितों का दर्द सुनकर केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल की आंखें भी भर आईं। दगड़ियों ऐसा लगता है इस इलाके की तस्वीर को देख कर और यहां के लोगों के दर्द को देख कर कि अभी अंधेरा बाकी था। घड़ी में तीन बजे थे, मगर छेनागाड़ के लोगों के लिए मानो समय थम गया हो एक गर्जना हुई और फिर सब कुछ डूबने लगा और तस्वीर तबाही कुछ यूं थी।

दोस्तो पहाड़ों से आई वो चीखती हुई धारा, किसी क्रूर राक्षस की तरह आई और देखते ही देखते घर, मंदिर, दुकानें, जीवन—सब लील गई। कोई बस मंजर को देख रहा था। इधर उधर भाग रहा था और कोई तो उसी सैलाब में समा गया। बड़ेथ, डुंगर, ताल जामण हर जगह बस चीखें थीं, सन्नाटा था और मलबा था। अब तो ऐसा लगता है यहां के हालात औरलोगों के चेहरों को देख कर कि तब घर छिन गया और अब नींद भी कई ग्रामीणों के लिए वो रात सिर्फ एक हादसा नहीं थी। दगड़ियों वो जीवन की धुरी तोड़ने वाली रात थी हादसा था तबाही थी और आज बस ये निशान बचे हैं बाकि कुछ भी नहीं। लोग कहते हैं कि बच्चों को उठाया, कंधे पर रखा। कुछ समझ नहीं आया तो बस सड़क की ओर भागे, उनकी आंखों में वो डर अब भी ताजा है। कई लोगों ने बारिश में भीगते हुए, मलबे में अपनों को ढूंढते हुए पूरी रात सड़क पर काट दी दगड़ियो ना छत, ना चूल्हा, ना सहार सब अकेला अकेला सा।

दगड़ियो जो बचा, वो बस सांसें थीं और एक-दूसरे का काँपता हुआ साथ था और हाथ था। एक महिला का घर का आधा हिस्सा बह गया है, कहती हैं ऊपर से पानी सीधा आया और हमारा घर जैसे कागज की तरह बह गया। अब भाई के घर हूं, लेकिन वो भी गिरने वाला है। दोस्तो मैरा आपको ये बताना इस दर्द को दिखाना यूं ही नहीं है। क्या इस से बड़ी बेबसी भी कोई होगी? जब एक जनप्रतिनिधि की आंखें नम हो गई। दगड़ियो आपदा पीड़ितों की हालत देखने पहुंचीं केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल जब ग्रामीणों से मिलीं तो उनकी आंखों से आंसू थम नहीं सके उन्होंने पीड़ितों को गले लगाया, हाथ थामे और कहा – मैं आपके साथ हूं। वैसे ठीक है कुछ लोग आलोचना और स्टंट और तमाम तरह की बातें कर रहे हैं लेकिन मै आज केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल की ना आलोचना करना चाहता हू और उन पर कोई कटाक्ष और ना ही कोई तंज।

मै ये जानता हूं की जनप्रतिनिधी का मतलब क्या है जिम्मेदारी क्या है, लेकिन क्या इतना कह देना कफी है कि मै आपके साथ हूं जो विधायक आशा नोटियाल ने यहां प्रभावितों से कहा इस पर फिर कभी बात होगी यहां वो आंखें जिन्हें ताकतवर बनकर सबको हिम्मत देनी थी,आज गांववालों के टूटे चेहरे और कांपती आवाजों ने उन्हें भी तोड़ दिया। पीड़ितों का हाल जानने केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल भी आपदाग्रस्त इलाके में पहुंचीं। आपदा प्रभावितों से बात कर, और उनका दर्द और हालात देखकर आशा नौटियाल भावुक हो गईं। आपदा पीड़ितों से बात करते हुए विधायक आशा नौटियाल की आंखें भर आईंडीएम और एसएसपी बड़ी मुश्किल से पहुंचे: वहीं इस सैलाब में गांव तक पहुंचने वाली सड़क भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई है इसलिए रेस्क्यू टीम पैदल ही आपदाग्रस्त इलाके में पहुंची।

शाम तक ही रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी प्रतीक जैन व पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग अक्षय प्रह्लाद कोंडे तहसील बसुकेदार के दूरस्थ क्षेत्र ग्राम ताल जामण पहुंच सके। इतना भर नहीं है। दग़ड़ियो, एक बुजुर्ग की आंखों में सवाल था जिसका जवाब शायद किसी के पास नहीं लेकिन सवाल भी करूंगा कि आखिर कब तक? दगड़डियों 2013 की यादें अब बीती बात नहीं रहीं, वो फिर से जिंदा हो गईं हैं। हर बारिश, हर बादल की गड़गड़ाहट अब डर लेकर आती है। सड़कों का टूटना, घरों का गिरना और लोगों का लापता हो जाना ये अब “खबर” नहीं, रोज़ की सच्चाई बन गई है एक गुहार इन आंसुओं में सिर्फ दुख नहीं है, एक सवाल भी है। भगवान ना करे ऐसी आपदा आए लेकिन क्या इन आंखों में फिर कभी सुकून लौटेगा? क्या बच्चों को अब हमेशा बिना छत के ही सोना होगा? उनके लिए कौइ व्यवस्था होगी लेकिन सवाल ये है कब होगी। जलाका तबाह हो गया उसका क्या ये सिर्फ छेनागाड़ की त्रासदी नहीं है। मै हर वीडियो हर तबाही के बाद ये कहता हूं कि ये हर उस गांव की कहानी है, जहां बारिश अब सौगात नहीं, सज़ा बन चुकी है।