जी हां दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड में सारी समस्याओं का समाधान मिलता है वो भी देवि देवताओं की जुबानी, हाल मै दोस्तो नंदा राजजात यात्रा को लेकर खूब शोर हुआ। कई जगह महा बैठकें तक हुई, किसी ने कहा इसी साल यात्रा होगी किसी ने कहा नहीं इस साल नहीं हो सकती अगले साल 27 में होगी, लेकिन दोस्तो अब जो आदेश आया है Chamoli Nanda Devi Raj Jat Yatra उस आदेश में मां नंदा भगवती ने खुद अपनी मर्जी बता दी और अपने भक्तो कर दया वो बड़ा इशारा, जो तय करेगा नंदा राजजाता यात्रा का रास्ता। वो कि चमोली जिले के नंदाधाम कुरूड़ स्थित माँ नंदादेवी सिद्धपीठ मंदिर से बड़ी खबर सामने आई है। माँ नंदा भगवती के आदेशानुसार और गौड़ पुजारियों द्वारा तिथि निर्धारण के बाद वर्ष 2026 में “बड़ी नंदाजात” का आयोजन तय हुआ है। आयोजन समिति ने यात्रा का पड़ाववार दिन पट्टा भी श्रद्धालुओं की जानकारी के लिए साझा किया है जिसे आप देख सकते है। दोस्तो बताया गया है कि यात्रा का आरम्भ माँ नंदा भगवती के मायके नंदाधाम कुरूड़ से होगा और यह परंपरागत पड़ावों से होकर आगे बढ़ेगी, जिनमें लाटू धाम, ध्योसिंह धाम, बधाण, दशोली, बण्ड, लाता भगवती सहित अन्य प्रमुख पड़ाव शामिल हैं। यात्रा में देवराणा मंदिर समिति, दशम द्वार माता, 14 सयानों, जनप्रतिनिधि, कंसुआ के कुँवर, हक़ूक़धारी और क्षेत्र के श्रद्धालुओं की भागीदारी से इसे भव्य और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने का संकल्प दोहराया गया है, लेकिन दोस्तो इससे पहले क्या हुआ था कि नंदा राजजात यात्रा को लेकर सस्पेंस बना रहा और ऐसा पहली बार हुआ। जब विवादों में यात्रा आ गई यात्रा का वो रूट वो पड़ाव आ गए जहां से यात्रा हो कर गुजरती है।
दोस्तो ऐसा लगा कि आस्था और मान्यताओं पर राजनीति के हावी होने का अवसर मिल गया। पूरे 12 वर्षों तक 2026 का इंतजार कर रहे श्री नंदा देवी के भक्तों के लिए नंदा देवी राजजात समिति की हालिया घोषणा ने गहरी निराशा पैदा कर दी थी। समिति ने यह कहते हुए बहुप्रतीक्षित श्री नंदा देवी राजजात यात्रा को 2027 तक स्थगित करने का निर्णय लिया कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अभी आवश्यक कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं और अनुमान के अनुसार 20 सितंबर के बाद यात्रा होमकुंड पहुंचेगी, जब क्षेत्र में अत्यधिक ठंड बढ़ जाती है। दोसतो इस फैसले से न केवल उत्तराखंड, बल्कि देश-विदेश में फैले लाखों नंदा भक्तों की भावनाएं आहत हुई, साथ ही आयोजन समिति ने राज्य सरकार को भी कटघरे में खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी… बीते दो वर्षों से यात्रा को लेकर विभिन्न स्तरों पर की जा रही तैयारियों और कवायद पर भी इस फैसले ने पानी फेर दिया है, जिससे यात्रा को लेकर दिया जा रहा संदेश भी सकारात्मक नहीं रह गया हालाकि अब चीजे बदलती दिख रही हैं, लेकिन मां नंदा राजजात यात्रा है क्या इतिहास देखिए। दोस्तो इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 2000 में आयोजित श्री नंदा देवी राजजात यात्रा में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने सीधे अपनी भूमिका निभाते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं की थीं। जिसके चलते परिणामस्वरूप यात्रा न केवल भव्य रूप से संपन्न हुई, बल्कि देश-विदेश में इसकी व्यापक चर्चा भी हुई। उस दौरान भी कांस्वा के राजा आगे बढ़ें या मां नंदा भगवती की डोली को लेकर कुछ विवाद उठे, लेकिन छोटी-मोटी घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो 280 किलोमीटर से अधिक लंबी यह यात्रा निर्विघ्न रूप से पूरी हुई। दोस्तो 12 वर्षों की परंपरा के अनुसार यह यात्रा 2012 में प्रस्तावित थी, लेकिन ज्योतिषीय गणना में उस वर्ष को मलमास घोषित किए जाने के कारण यात्रा स्थगित करनी पड़ी। 2013 में यात्रा आयोजित करने की योजना बनी, किंतु उसी वर्ष उत्तराखंड में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने इसे रोक दिया। अंत में 2014 में मां नंदा देवी की कृपा से यात्रा का आयोजन हुआ और वह सफलतापूर्वक संपन्न भी हुई। उसी समय यह घोषणा की गई थी कि अगली राजजात यात्रा 12 वर्षों बाद 2026 में आयोजित की जाएगी।
दोस्तो पिछले दो वर्षों से राज्य सरकार और नंदा भक्त 2026 में प्रस्तावित राजजात यात्रा की तैयारियों में जुटे हुए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी यात्रा को लेकर कई उच्च स्तरीय बैठकें कर अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट की थी। शासन स्तर पर लगातार हो रही तैयारियों को देखते हुए यह माना जा रहा था कि यात्रा अपने निर्धारित समय पर ही होगी। इतना ही नहीं, राजजात समिति ने 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर यात्रा का कैलेंडर जारी करने की भी घोषणा की थी, जिससे देवी भक्तों में उत्साह चरम पर दिखाई दिया। अब ठीक उसी दिन ये शुभ समाचार आया कि यात्रा इसी साल होगी, लेकिन दोस्तो इससे पहले कर्णप्रयाग में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजजात समिति ने अचानक यात्रा को 2026 के बजाय 2027 में आयोजित करने की घोषणा कर दी तर्क दिया गया कि 2026 में नंदा नवमी 20 सितंबर को पड़ रही है और जिला प्रशासन के अनुसार उस समय उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अत्यधिक ठंड बढ़ जाती है। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा को स्थगित किया जा रहा है। इस घोषणा के बाद 2026 की यात्रा को लेकर उत्साहित नंदा भक्तों में घोर निराशा फैल गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जिस तरह से भक्त अपनी नाराजगी और पीड़ा व्यक्त कर रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि यात्रा के स्थगन ने उनकी आस्थाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। भक्तों का कहना है कि नंदा देवी की लोकजात (छोटी जात) और नंदा राजजात (बड़ी यात्रा) सदियों से अगस्त-सितंबर में ही आयोजित होती रही हैं।
ऐसे में यदि इस बार यात्रा 20 सितंबर को भी होमकुंड पहुंचती है, तो इसे असामान्य नहीं कहा जा सकता। नंदा भक्तों का आरोप है कि धार्मिक यात्रा में कहीं न कहीं राजनीति अपनी जमीन तलाश रही है, जो बिना ठोस कारण 2026 की प्रस्तावित राजजात यात्रा को स्थगित किए जाने से स्पष्ट दिखाई देती है। आखिर इस स्थगन से किसे लाभ होगा और किसे हानियह तो समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस निर्णय से आम नंदा भगवती भक्तों की भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं। नंदादेवी की राजजात यात्रा को लेकर कितनी भावनात्मक स्थिति बन गई है। 12 वर्षों की परंपरा और श्रद्धालुओं की तीव्र उत्सुकता के बावजूद 2026 की यात्रा को स्थगित करना निश्चित रूप से लाखों भक्तों के लिए निराशाजनक है। हालांकि प्रशासन और आयोजन समिति ने सुरक्षा और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती ठंड को वजह बताते हुए यह निर्णय लिया है, लेकिन यह भी साफ है कि आस्था और मान्यताओं से जुड़ी ऐसी यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के दिलों की जुड़ाव और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है।अब वक्त यही है कि नंदा भक्त अपनी आस्था में दृढ़ बने रहें और अगले वर्ष 2027 में भव्य और सुरक्षित यात्रा का बेसब्री से इंतजार करें। याद रखिए, चाहे समय बदल जाए, आस्था की ताकत कभी कम नहीं होती और मां नंदा भगवती की कृपा हमेशा अपने भक्तों पर बनी रहती है।