धूं-धूं कर जल उठी इतिहास की एक और निशानी जी हां दोस्तो उत्तराखंड की वादियों में सिर्फ धुआं नहीं, बल्कि सालों पुरानी विरासत की चित्कार उठी। लपटें इतनी भयावह थीं कि देखते ही देखते ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक कोठी आग के हवाले हो गई। सामने जलती रही धरोहर, और सहमे लोग बस बेबसी से उसे राख में तब्दील होते देखते रहे आग की तेज़ लपटों ने ना सिर्फ एक इमारत को निगला, बल्कि अपने साथ ले गई उस दौर की यादें, वो वास्तुकला, वो इतिहास जो पीढ़ियों से खड़ा था। आख़िर कैसे लगी ये आग?क्या ये हादसा था या लापरवाही?और अब इस अपूरणीय क्षति की भरपाई कैसे होगी?देखिए मेरी ये खास रिपोर्ट जहां विरासत जल गई, और सवाल धधक रहे हैं। जी हां दोस्तो नैनीताल से एक तस्वीर सामने आई। दोस्तो नैनीताल के ग्लेनमोर इलाके में अचानक लगी भीषण आग ने एक ब्रिटिशकालीन भवन को पूरी तरह जलाकर खाक कर दिया। आग इतनी भयावह थी कि देखते ही देखते पूरा भवन धू-धू कर जलने लगा और कुछ ही देर में ऐतिहासिक निर्माण पूरी तरह राख में तब्दील हो गया। गनीमत रही कि घटना के समय भवन के अंदर कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। दोस्तो प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक भवन से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। आसपास के लोगों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर बाल्टियों और पाइप के जरिए आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। साथ ही दमकल विभाग को भी आनन-फानन में आग लगने की सूचना दी।
वहीं, दोस्तो सूचना मिलते ही दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू किए। आग की ऊंची लपटों के कारण पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और एहतियातन लोग अपने घरों से बाहर निकल आए. आग की लपटों को देख लोग सहम गए। जिससे आग परव काबू पाने में पसीने छूट गए। दोस्तो जिस भवन में आग लगी, उसके एक हिस्से में साल 1969 से अनिल तिवारी और दूसरे हिस्से में साल 1982 से चंद्रशेखर जोशी का परिवार रह रहा था। अनिल तिवारी ने बताया कि उनका परिवार लंबे समय से यहां निवास कर रहा था, लेकिन हाल ही में वो अपने बेटे के पास गुरुग्राम गए हुए थे। दोस्तो जैसे ही वो नैनीताल पहुंचे तो घर से धुआं निकलता दिखा। जब तक वो भवन के पास पहुंचे, तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। उन्होंने बताया कि भवन के मुख्य मालिक देवी दत्त जोशी और उनका परिवार हैं, जो वर्तमान में बाहर रहते हैं। घटना की सूचना दूसरे हिस्से में रहने वाले परिवार को भी स्थानीय लोगों ने दी। इधर दोस्तो प्रशासन की मानें तो आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल, दमकल विभाग और प्रशासन की टीम मामले की जांच में जुटी हुई है।दोस्तो घटना के बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों और महिलाओं के मुताबिक भवन काफी समय से आंशिक रूप से बंद पड़ा था। इसका फायदा उठाकर कुछ नशेड़ी घर के पिछले हिस्से में बैठकर नशा किया करते थे। इसके अलावा दोस्तो स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि आग किसी असामाजिक तत्व ने लगाई हो हालांकि, पुलिस और प्रशासन ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच के बाद ही आग लगने के असली कारणों का पता चल पाएगा। वहीं, दमकल विभाग ने पहले ही नोटिस दिया था वहीं दूसरी ओर अगर दमकल विभाग के अधिकारियों की माने तो उनका कहना है कि हाल ही में विभाग ने शहर के पुराने भवनों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पाया गया था कि संबंधित भवन पूरी तरह लकड़ी से निर्मित है, जिससे आग लगने की स्थिति में बड़ा खतरा हो सकता है। अग्नि सुरक्षा उपकरण लगाने के निर्देश देते हुए दोनों परिवारों को नोटिस भी जारी किया गया था। दोस्तो ग्लेनमोर क्षेत्र का ये भवन ब्रिटिशकालीन निर्माण शैली का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता था. आग लगने से न केवल संपत्ति का भारी नुकसान हुआ, बल्कि शहर की एक ऐतिहासिक संरचना भी नष्ट हो गई। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई है। यहां गौर करने वाली बात ये भी है कि नैनीताल में जिस स्थान पर घर पर आग लगी, वहां की सड़क बेहद संकरी थी। साथ ही सड़कों के किनारे वाहन खड़े थे। जिसके चलते दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा घटना के दौरान राहत बचावकर्मी आग बुझाने से ज्यादा फोटोग्राफी करते नजर आए। एक दमकल कर्मी फायर होज से आग बुझाता रहा तो दो कर्मी पीछे से वीडियो और फोटोग्राफी करते नजर आए। यही हाल रेस्क्यू करने पहुंचे अन्य राहत बचाव दल का भी रहा। सभी लोग आग बुझाने के दौरान फोटोग्राफी करते नजर आए।
दोस्तो देखिए ना कैसे चंद लपटों ने नैनीताल के ग्लेनमोर इलाके में खड़ी ब्रिटिशकालीन विरासत को हमेशा के लिए खामोश कर दिया। जिस इमारत ने दशकों तक इतिहास को अपने भीतर संजोकर रखा, आज वही राख के ढेर में तब्दील हो चुकी है। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई लेकिन सवाल अब भी धधक रहे हैं। क्या समय रहते अग्नि सुरक्षा के इंतज़ाम किए जाते तो ये विरासत बच सकती थी? क्या संकरी सड़कों और अव्यवस्थित पार्किंग ने राहत कार्य में बाधा नहीं डाली?और क्या जांच के बाद असल वजह सामने आ पाएगी — हादसा, लापरवाही या फिर किसी असामाजिक तत्व की करतूत? दोस्तो इतिहास को सहेजना सिर्फ प्रशासन की नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है क्योंकि विरासत जब जलती है, तो सिर्फ इमारत नहीं, हमारी पहचान भी राख होती है फिलहाल जांच जारी है और उम्मीद है कि इस घटना के बाद शहर के पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाएंगे