BJP में हड़कंप, महामंडलेश्वर ने नड्डा को लिखा- गैर जिम्मेदार दिखे पार्टी के ‘जिम्मेदार’

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उत्तराखंड में भाजपा के भीतर कलह सामने आने के बाद जीवनदीप आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि के एक पत्र के कारण प्रांत की राजनीति में हड़कंप मचा हुआ है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को एक पत्र लिखकर गिरि ने कहा है कि इस बार चुनावों में कुप्रबंधन के कारण हो सकता है कि चुनाव के नतीजे पार्टी की उम्मीदों के खिलाफ जाएं. आगामी 10 मार्च को मतगणना के बाद चुनाव के नतीजे साफ होंगे, इससे पहले ही गिरि ने इस चिट्ठी की एक कॉपी केंद्रीय गृहमंत्री ​अमित शाह और राष्ट्रीय संगठन मंत्री को भी भेज दी है.

पिछले​ दिनों कुछ विधायकों के भितरघात संबंधी आरोपों के बाद महामंडलेश्वर के इस पत्र से भाजपा के भीतर एक बार फिर हड़कम्प मच गया है. 2009 में हरिद्वार सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके गिरि ने कहा कि 2009 चुनाव में इसी तरह का कुप्रबंधन देखने को मिला था, जैसा इस बार विधानसभा चुनाव में देखने को मिला है. कार्यकर्ताओं की भावनाओं का हवाला देते हुए​ गिरि ने इस मामले में उचित कार्रवाई किए जाने की मांग भी केंद्रीय नेतृत्व से की है. हालांकि इस पत्र में किसी नाम का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि यह पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ ही है.

यतींद्रानंद ने कैसे लगाए आरोप?
गिरि ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि उत्तराखंड में कोई ज़िम्मेदार व्यक्ति चुनाव की रूपरेखा सही ढंग से बना ही नहीं पाया. चुनाव को लेकर कार्यकर्ताओं और प्रचार आदि का मैनेजमेंट ठीक तरह से होना चाहिए था, जो नहीं हुआ इसलिए कई सीटों पर परिणाम विपरीत रहने की आशंका है. गौरतलब है बीजेपी के लक्सर विधायक ने प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक पर सीधे आरोप लगाए थे और उसके त्रिलोकचंद चीमा और अन्य विधायकों ने भी पार्टी में भितरघात के मुद्दे खुलकर उठाए थे.

चुनाव मैनेजमेंट की समीक्षा करेगी भाजपा
विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद पार्टी अपने चुनाव मैनेजमेंट को लेकर यह मंथन करेगी कि क्या कोर कसर रह गई. पार्टी से जुड़े सूत्रों के हवाले से एक खबर में कहा गया है कि उत्तराखंड में बीजेपी को और मज़बूत बनाए जाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व और संगठन अभी और योजनाएं बनाने के मूड में है. हालांकि भाजपा लगातार उत्तराखंड चुनाव जीतने के दावे कर रही है लेकिन जो घटनाक्रम चल रहे हैं, उनसे साफ है कि पार्टी भी अनिश्चितता की शिकार है.