Banbhoolpura कांड के आरोपी को जमानत नहीं! | Nainital | Nainital High Court | Uttarakhand News

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दोस्तो उत्तराखंड के बनभूलपुरा कांड में जुड़ा नया मोड़! मुख्य आरोपी को अब जेल से बाहर आने की उम्मीद नहीं दिख रही। हाईकोर्ट की बेंच ने जमानत पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया है आखिर क्यों बनभूलपुरा कांड के मुख्य आरोपी को कोर्ट से जमानत नहीं रही है या कोर्ट नहीं दे रहा है। दोस्तो देश को हिला देने वाला कांड था हल्द्वानी के बनभूलपूरा का जहां बनभूलपूरा में लोग बसे रहेंगे या उनको वहां से हटाया जाएगा इस पर फैसला सुप्रीम कोर्ट ने करना है, लेकिन उससे पहले के तरफ जहां पुलिस की नजरे बन भूनभूलपुरा पर हैं। वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इस मुख्य शहर हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा कांड के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की। इस मामले में कई समय से सुनवाई चल रही थी। पूर्व में कोर्ट ने नामजद कई आरोपियों को जमानत पर रिहा करने के आदेश जारी किए थे, लेकिन पुलिस द्वारा मुख्य साजिशकर्ता बताए गए अब्दुल मलिक को कोई राहत नहीं दी। अब आपको बताता हूं कि कैसे अब्दुल मलिक नाम के मुख्य आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं करेगा कोर्ट।

दोस्तो, मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए गठित उत्तराखंड हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया है। अब ये प्रकरण नई डिवीजन बेंच के सामने रखा जाएगा, जिसका गठन नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे। पूर्व में इसी खंडपीठ ने मामले में शामिल सह अभियुक्त मोकिन सैफी, जियाउर रहमान और रईस अहमद की जमानत मंजूर कर दी थी। वहीं दोस्तो बनभूलपुरा उपद्रव मामले कैसे इससे पहले 86 आरोपियों को मिली जमानत इस सवाल का जवाब ये है कि कोर्ट ने मुख्य आरोपी को कोई जमानत न देते हुए अगली सुनवाई 18 फरवरी की तिथि नियत की थी। 18 फरवरी को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास गुगलानी और सीके शर्मा की तरफ से कहा गया कि जिस दिन आगजनी हुई थी, उस वक्त उनका मुवक्किल घटना के समय मौजूद नहीं था। जब वे घटना में शामिल नहीं थे तो पुलिस ने किस आधार पर मुकदमा दर्ज किया। उच्च न्यायालय ने सबको जमानत पर रिहा कर दिया है, उसी के आधार पर अब्दुल मलिक को भी रिहा किया जाए। दोस्तो अब्दुल मलिक के वकीलों ने कहा कि कुछ कारणों की वजह से उनके मुकदमे की सुनवाई कर रही कोर्ट ने उनके मुकदमे को सुनने से इन्कार करते हुए अन्य पीठ को इसकी सुनवाई हेतु रेफर कर दिया है। पिछली तिथि को इसी कोर्ट ने मोकिन सैफी और अन्य को इस संदेह के आधार पर रिहा करने को कहा था। कोर्ट के इस मामले में नरमी नहीं दिखाने का मतलब ये भी है कि अब्दुल मलिक पर बनभूलपुरा उपद्रव मामले में चार मुकदमे दर्ज हैं। दोस्तो मामले के अनुसार

अब्दुल मलिक सहित अन्य के खिलाफ बनभूलपुरा दंगे के समय चार मुकदमे दर्ज हुए थे। इसमें से एक मामला ये भी था कि मलिक ने धोखाधड़ी से तैयार किया गया दस्तावेज़, झूठे शपथ पत्र के आधार पर राजकीय भूमि को हड़पने का कार्य किया। यही नहीं उसके द्वारा नजूल भूमि पर कब्जा करके प्लॉटिंग, अवैध निर्माण करके उसे बेचा गया। जब जिला प्रशासन इस अतिक्रमण को हटाने पहुंचा तो उन पर पथराव किया गया बाद में इसने दंगे का रूप ले लिया। इसी दंगे में सरकारी कर्मचारी, पुलिसकर्मी और अन्य लोग घायल हो गए। कई लोगों की जान तक चली गयी। आरोपियों का कहना है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एफआईआर में उनका नाम नहीं है। पुलिस ने उन्हें जबरन इस मामले में फंसाया है। इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए। दंगे में शामिल कई लोगों को पूर्व में कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। बनभूलपुरा में 8 फरवरी 2024 को हिंसा हुई थी। “दोस्तो, हल्द्वानी के बनभूलपुरा मामले में स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है। मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करने से इंकार कर दिया है और अब अगली सुनवाई नई बेंच के सामने होगी। पिछले कुछ समय में सह-अभियुक्तों को जमानत मिल चुकी है, लेकिन मुख्य आरोपी पर अब भी कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। बनभूलपुरा की हिंसा ने प्रशासन, पुलिस और आम जनता के लिए भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले हफ्तों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि यह मामला कानून और व्यवस्था के साथ-साथ न्याय प्रणाली की संवेदनशीलता का भी असली परीक्षण है।