गैरसैंण में बजट से पहले महिलाओं का हल्लाबोल ।Uttarakhand News | Gairsain | Uttarakhand Vidhan Sabha

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दोस्तो अपना गैरसैंण एक बार फिर चर्चा में है क्योंकि यहां कुछ दिन का मेला लगेगा बजट सत्र जो होना है। कुछ दिन ही सही उत्तराखंड की सियासत में गैरसैंण की बात तो होगी, लेकिन इधर बजट से पहले गैरसैंण में स्थानीय जनता का अलग तरह का शोर सुनाई दे रहा है और इस बार बजट से पहले सड़कों पर उतरी हैं महिलाएं। आखिर क्याकारण है कि गैरसैंण में महिलाओं को बोलना पड़ा हल्ला। दोस्तो जैसा की आप सब जानते हैं कि उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र आगामी 9 मार्च से 13 मार्च तक गैरसैंण के भराड़ीसैंण होगा लेकिन इससे पहले गैरसैंण में एक मांग उठ रही है वो क्या है वो बताता हूं। वो मांग है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गैरसैंण में अल्ट्रासाउंड, सर्जन, फिजिशियन सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए संसाधनों की व्यवस्था होनी चाहिे इन मांगों को लेकर दोस्तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं सहित महिला मंगल दलों की पदाधिकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। गैरसैंण के रामलीला मैदान में एकत्रित होकर सभी कांग्रेसी कार्यकर्ताओं व महिलाओं ने गैरसैंण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रेड्योलॉजिस्ट,ओटी सहित अन्य सुविधाएं व संसाधनों की व्यवस्था किये जाने की मांग की। इस दौरान रामलीला मैदान से मुख्य बाजार होते हुए तहसील कार्यालय तक महिलाओं व कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने सरकार व स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन व नारेबाजी की. तहसील कार्यालय पहुंचकर जल्द गैरसैंण अस्पताल में संसाधनों की व्यवस्था करने का मांग पत्र मुख्यमंत्री को प्रेषित किया।

दोस्तो इस दौरान लोगों का कहना था कि पिछले कई सालों से गैरसैंण स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली को लेकर आंदोलन व प्रदर्शन किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक ज्ञापन दिए गए, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है जिसके कारण आज फिर मजबूर होकर सड़कों पर उतरकर अपनी मांग रखनी पड़ रही है। दोस्तो इस प्रदर्शन के दौरान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 9 मार्च से पहले सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गई तो भराड़ीसैण में आयोजित बजट सत्र का पुरजोर विरोध किया जायेगा। वहीं, उन्होंने गैरसैंण परिक्षेत्र के विकास के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा 25 हजार करोड़ की घोषणा को लेकर भी सवाल उठाये। उन्होंने कहा आज तक उन 25 हजार करोड़ रुपयों से गैरसैंण विकासखण्ड क्षेत्र में क्या काम हुआ है, सरकार को ये भी बताना चाहिए। सरकार 4 दिन की पिकनिक मनाने गैरसैंण आ रही है। झूठे वादे और झूठी घोषणाएं करके के जनता को बेवकूफ बनाने व ठगने का काम कर रही है। दोस्तो जो प्रदेश की ग्रीष्णकालीन राजधानी है वहीं सुविधाओं के नाम पर आम तो आम खास भी सवाल करते हैं। इससे पहले आपने वो बयान देखा होगा बीजेपी के विधायक का जो कहते हैं कि गैरसैँण में ठंड बहुत लगती है ऑक्सीजन की कमी है। इन सब बातों से ऊपर बीजेपी के विधायक दिलील रावत ने ये भी कहा था कि गैरसैंण में भराड़ीसैंण में सुविधाओं की भारी कमी है तो इधर जनता भी ये तो बात कर रही है। दोस्तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली को लेकर कई सवाल खड़े किए। लोग कहते हैं कि एक और सरकार गैरसैंण के विकास को लेकर बड़े बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आरोप लगाते हुए कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति करके अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन संसाधनों के आभाव में विशेषज्ञ चिकित्सक हाथी के दांत साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा अल्ट्रासाउंड मशीन है लेकिन रेड्योलॉजिस्ट नही है। महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति तो सरकार ने कर दी है लेकिन ओटी नहीं है। एनेस्थीसिया की नियुक्ति कर दी गई है लेकिन ऑपरेशन करने वाला सर्जन ही नहीं है।

गैरसैंण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जल्द सरकार से संसाधन मुहैया कराने की मांग की है। वैसे दोस्तो ये सच भी है कि बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गैरसैंण में कई बार गर्भवती महिलायें इलाज के आभाव में दम तोड़ दे रही हैं। जिसको लेकर कई बार आंदोलन व प्रदर्शन किए गए। सरकार के कानों में आज तक जूं नही रेंगी है। जिस कारण आये दिन मरीजों को रानीखेत व श्रीनगर का रुख करना पड़ता है। उन्होंने महिलाओं को पार्टीवाद छोड़कर एकजुट होकर अपनी मांग को रखने का आह्वान किया। इसके अलावा दोस्तो बजट सत्र के दौरान इन सब मांगों को लेकर महिलाओं के साथ मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर इन सभी बातों को रखने की बात भी हो रही है दोस्तों, ये सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि गैरसैंण में लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य सुविधाओं की समस्याओं का सच है। अल्ट्रासाउंड, सर्जन, फिजिशियन और अन्य विशेषज्ञों की कमी ने आम जनता और गर्भवती महिलाओं के जीवन पर सीधे असर डाला है। क्या सरकार 9 मार्च से पहले इन मांगों को गंभीरता से सुनकर स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक संसाधनों और सुविधाओं का इंतजाम करेगी, या फिर जनता को फिर सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करनी पड़ेगी? गैरसैंण की जनता की उम्मीद और चेतावनी दोनों साफ हैं—भारी घोषणाओं और बड़े वादों के बजाय अब वास्तविक काम की जरूरत है। स्वास्थ्य सेवाओं की सुधार की घड़ी अब आने वाली है।