उत्तराखंड से एक ऐसी खबर जिसने सिस्टम की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। डंपर की टक्कर से घायल हुआ एक युवक ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था, लेकिन मौत हादसे से नहीं, बल्कि उस एंबुलेंस से मिली, जो उसे बचाने निकली थी। आधे रास्ते में एंबुलेंस खराब हो गई और युवक छटपटाता रहा, मदद के इंतज़ार में तड़पता रहा और आखिरकार दम तोड़ दिया। क्या ये सिर्फ एक हादसा था, या सिस्टम की बेरुखी ने एक और जान ले ली?” झकझोक कर रख देना वाली खबर। जी हां दोस्तो अपने उत्तराखंड का ये कड़वा सच अब खुलकर सामने आने लगा है कि यहां कोई हादसे में बच गया। उसकी जान नहीं गई तो उसकी जान हमारा सिस्टम ले लेगा उसको जिंदा नहीं छोड़ेगा हमारा खचाड़ा सिस्टम। सही मै क्योंकि चमोली में जिले में नशे में धुत एक डंपर चालक और खराब एंबुलेंस के कारण बाइक सवार एक युवक की दर्दनाक मौत होने का मामला सामने आया है। जहां डंपर की चपेट में आने से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और हैरानी की बात ये कि जब एंबुलेंस उसे लेकर अस्पताल की तरफ निकली तो रास्ते में एंबुलेंस भी दगा दे गई। ऐसे में तड़प-तड़प कर उसकी जान एंबुलेंस में चली गई। जी हां जान चली गई।
दोस्तो ये 1 फरवरी को ग्वालदम-सिमली राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्वालदम के पास हुआ है. जहां 18 वर्षीय बाइक सवार मनीष सिंह तलवाड़ी की तरफ तेज गति से आ रहे डंपर संख्या UK 14 CA 1921 की चपेट में आ गया। जिस कारण मनीष बुरी तरह से जख्मी हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो, डंपर के टायरों ने मनीष की जांघों को बुरी तरह से रौंद दिया था। इसके बाद स्थानीय लोग घायल मनीष को उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ग्वालदम ले गए। इस बीच हादसे की सूचना मिलते ही थराली थानाध्यक्ष विनोद चौरसिया भी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे, फिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ग्वालदम गए। अब दोस्तो इससे भी चिंता में डाल देने वाली बात ये कि 12 किमी दूर जाते ही खराब हो गई एंबुलेंस। सही सुन रहे हैं आप और हम करते हैं कि एंबुलनंस मिल गई अब जान बच जाएगी और यहां भी शायद मनीष नाम के उस युवक की जान बच पाती लेकिन एंबुलेंस दगा दे गई उसकी जान चली गई। दोस्तो डॉक्टरों की राय पर घायल मनीष को 108 एंबुलेंस के जरिए हायर सेंटर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ (बागेश्वर) भिजवाया, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। एंबुलेंस बमुश्किल 12 किमी दूर कंधार नामक कस्बे में ही पहुंच पाया था कि अचानक उसका इंजन बंद हो गया। दोस्तो खबर तो यहां ये कि चालक के तमाम प्रयासों के बावजूद एंबुलेंस ठीक नहीं हो पाई। आनन-फानन में बैजनाथ से दूसरी 108 एंबुलेंस मंगाई गई। इस दौरान करीब एक घंटा बीत गया। घायल मनीष एंबुलेंस में ही दर्द से छटपटाता रहा। जब तक बैजनाथ से एंबुलेंस कंधार पहुंची, तब तक दर्द से तड़पते हुए मनीष ने दम तोड़ दिया। वैसे दोस्तो यहां तक आपको क्या लग रहा है किसकी वजह से जान गई। उस हादसे की वजह से जहां मनीष को टक्कर मारी गई या एंबुलेंस की वजह से या फिर एंबुलेंस चालक की वजह से किसने मारा चमोली के मनीष को आगे देखिए चौके जाएंगे आप पुलिसिया कार्रवाई को देख कर जिस डंपर को कब्जे में लेकर चालक को हिरासत में लिया। आशंका होने पर चालक का मेडिकल परीक्षण करवाने के लिए ले जाया गया। आशंका जताई जा रही है कि डंपर चालक नशे की हालत में वाहन को दौड़ा रहा था, लेकिन क्या यहां पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की की पोल नहीं खुली उन दावों की पोल नहीं खुली जहां सुरक्षा त्वरित एंबुलेंस सुविधा अस्पताल में तामाम व्यवस्था है।
दोस्तो महज 18 साल के युवक की दर्दनाक मौत के बाद जहां नशे का सेवन कर वाहन चलाने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की पोल खोल दी है तो वहीं स्वास्थ्य विभाग भी इस क्षेत्र के वाशिंदों के प्रति कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा मात्र 12 किमी की दूरी पर ही 108 एंबुलेंस के खड़े हो जाने से लगाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि थराली तहसील क्षेत्र के ज्यादातर 108 एंबुलेंस की मेंटेनेंस अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पा रही हैं। जिससे मरीजों या घायलों को ले जाते हुए इनके सड़क किनारे खड़ा हो जाना आम बात हो गई है। माना जा रहा है कि समय पर एंबुलेंस घायल को बैजनाथ अस्पताल पहुंचा देती तो शायद मनीष की जान बच सकती थी। तो सवाल सिर्फ एक युवक की मौत का नहीं है सवाल उस सिस्टम का है, जो हादसे के बाद भी ज़िंदगी नहीं बचा पाया। नशे में डंपर चलाने वाला चालक पुलिस की गिरफ्त में है, लेकिन उस एंबुलेंस का क्या—जो बीच रास्ते में जवाब दे गई? क्या 18 साल के मनीष की मौत सड़क हादसे से हुई या फिर सिस्टम की लापरवाही से? अगर एंबुलेंस समय पर पहुंच जाती, तो क्या आज एक घर का चिराग बुझने से बच सकता था? अब बड़ा सवाल ये है—क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, या ये मामला भी फाइलों में दब जाएगा? और क्या अगला शिकार बनने से पहले सिस्टम जागेगा… या फिर किसी और मनीष की जान जाएगी?”