मंत्रिमंडल विस्तार पर BJP MLA ने ही उठाए सवाल?| Dilip Rawat | CM Dhami | Congress | Uttarakhand News

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तो क्या दोस्तो उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सियासी सवाल उठने लगे हैं। सवाल नहीं तो तंज तो होने ही लगा है बल, बीपेजी के ही एक विधायक ने ये कह कर सवाल को जन्म दे दिया कि अरे नहीं भाई, मैं स्वयं ही इच्छुक नहीं था, छह-सात महीने के लिए कौन मंत्री बने? तो क्या यह नाराजगी सरकार के भीतर नई हलचल पैदा करेगी? बीजेपी केलिए को परेशानी वाली बात है और कांग्रेस किस तरह से तंज कस रही है। दोस्तो उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से ही यूं तो नए चेहरों को लेकर तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन इस सबके बीच भाजपा विधायक के ही बयान ने फिर इस मुद्दे को गर्म कर दिया है। दरअसल, इस बार लैंसडाउन से बीजेपी विधायक दिलीप रावत ने यह कहकर विवाद पैदा कर दिया है कि वो खुद कुछ महीनों का मंत्री नहीं बनना चाहते। उधर, कांग्रेस ने भी इस बयान को हाथों हाथ लिया है, पहले आप इस बयान को देखिए। जी हो दोस्तो इस हल्के में दिए गय बयान के मायने बडे हैं और भारी हैं।

उत्तराखंड में धामी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से सियासी हलचल लगातार तेज बनी हुई है। नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किए जाने को लेकर पहले ही कई तरह के सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब बीजेपी के ही एक विधायक के बयान ने इस बहस को और हवा दे दी है। दोस्तो लैंसडाउन से बीजेपी विधायक दिलीप रावत के एक बयान ने न केवल पार्टी के भीतर चर्चा छेड़ दी है, बल्कि विपक्ष को भी सरकार पर निशाना साधने का मौका दे दिया है। बता दें कि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में मंत्रिमंडल का विस्तार किया। सीएम धामी के इस फैसले के पीछे की रणनीति और समय को लेकर राजनीतिक गलियारों में पहले से ही सवाल उठ रहे थे। दोस्तो आम लोगों के मन में यह जिज्ञासा थी कि आखिर चुनाव से ठीक पहले नए मंत्रियों को शामिल करने का क्या औचित्य है और क्या इतने कम समय में वे अपने विभागों में प्रभावी काम कर पाएंगे? इसी बीच बीजेपी विधायक दिलीप रावत का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि वे खुद कुछ महीनों के लिए मंत्री नहीं बनना चाहते थे उनके इस बयान ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया।

दोस्तो दिलीप रावत ने साफ तौर पर कहा कि सरकार का कार्यकाल अब कुछ ही महीनों का बचा है और इतने कम समय के लिए मंत्री बनना उनके लिए व्यावहारिक नहीं होता। उनका यह बयान एक तरफ जहां व्यक्तिगत निर्णय के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे मंत्रिमंडल विस्तार के औचित्य पर सवाल के तौर पर भी लिया जा रहा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए भाजपा और सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत ने दिलीप रावत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बयान आधा सही और आधा गलत है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दिलीप रावत भले ही यह कह रहे हों कि वे मंत्री नहीं बनना चाहते थे, लेकिन हकीकत यह है कि उन्हें मौका ही नहीं मिला। दोस्तो हरक सिंह रावत ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी में मंत्री बनने के लिए केवल योग्यता ही नहीं, बल्कि बड़े नेताओं की कृपा भी जरूरी होती है. हरक सिंह रावत ने आगे कहा कि दिलीप रावत की यह बात सही है कि अब सरकार के पास बहुत कम समय बचा है। ऐसे में जो नए मंत्री बनाए गए हैं, उनके लिए काम करना एक बड़ी चुनौती होगी।

दोस्तो इसके अलावा यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि उत्तराखंड में अब चुनावी माहौल पूरी तरह से बन चुका है। बीजेपी जहां चुनावी मोड में आ चुकी है, वहीं पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेता भी राज्य में सक्रिय हो गए हैं। लगातार जनसभाएं और कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे यह साफ है कि पार्टी आगामी चुनावों को लेकर पूरी तरह गंभीर है। ऐसे में जो विधायक पहली बार मंत्री बने हैं, उनके सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उन्हें अपने विभागों की जिम्मेदारी संभालनी है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में चुनावी तैयारी भी करनी है। सीमित समय में बेहतर प्रदर्शन करना उनके लिए आसान नहीं होगा। दिलीप रावत के एक बयान ने उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है, यह मामला केवल एक व्यक्ति के बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे सरकार की नीतियों, पार्टी के भीतर की स्थिति और चुनावी रणनीति तक पर सवाल उठने लगे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस स्थिति को कैसे संभालती है और क्या विपक्ष इस मुद्दे को चुनावी मुद्दा बनाने में सफल हो पाता है।