जी हां दोस्तो पांडे जी के यार, एक नहीं दो या चार, क्या धाकड़ से पाएंगे पार, ये सवाल अपने उत्तराखंड में सब की जुबां पर इस वक्त दिखाई दे रहा है क्यंकि बीजेपी के कुछ नेताओं के कर्मों ने बीजेपी को अंतर्कलह के दलदल खिले कमल की बात को सबके सामने ला दिया। बीते एक हफ्ते भर से तो माहौल ऐसा है कि माना गुटबंदी ने पार्टी का ख्याल किया और ना मुख्यमंत्री और सरकार का लेकिन दोस्तो एक तरफ जहां एक बीजेपी विधायक के समर्थन में जहां कई नेताओं का हेल्कॉपटर तैयार था, तो वो हैलिकॉप्टर क्यों नहीं उठा ये सवाल एक है। दूसरा ये कि अगर बीजेपी वाले सब ठीक होने का दावा कर रहे हैं तो फिर वो शक्तिप्रदर्शन में जिसकी भीड़ ने विपक्षीयों को नहीं बीजेपी वालों को ही असहज कर दिया। जी हां दोस्तो जो हैलिकॉप्टर तैयार था पांडे जी के यहां जाने के लिए वो क्यों नहीं उड़ा वो कौन है दिल्ली वाले नेताजी जिनकी एंट्री इस फटनाक्रम में हो चुकी। वो एक कॉल किसने किया जिसके बाद बीजेपी की किरकीरी का गदर होने बच गया। दोस्तो भाजपा विधायक अरविंद पांडे के मामले ने पार्टी की कलह को सामने ला दिया है। दरअसल, बीते दिनों सुखवंत आत्महत्या प्रकरण और खुद पर लगे आरोपों की सीबीआई जांच समेत कई मामलों को लेकर विधायक पांडे के बयानों ने खासी सुर्खियां बटोरीं थी। उधर, राजस्व विभाग ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामले में विधायक को नोटिस जारी कर कब्जा हटाने को कहा।
इस बीच, गुरुवार को गूलरभोज स्थित उनके आवास पर हरिद्वार सांसद, गढ़वाल सांसद और हरिद्वार विधायक समेत भाजपा के कई बड़े नेताओं के जुटने की चर्चाओं ने सियासी पारा चढ़ा दिया। कयास लगने लगे कि पांडे के पक्ष में भाजपा नेताओं के सभा करने से प्रदेश की सियासत में बड़ा संदेश जाएगा। बताया जा रहा है कि हाईकमान के हस्तक्षेप पर हरिद्वार सांसद व पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत ने गुरुवार को पांडे के घर जाने का कार्यक्रम तो टाल दिया था, लेकिन इसकी वजह से हुए सियासी ड्रामे ने देहरादून से दिल्ली तक भाजपा नेताओं की सांसें अटका दीं। त्रिवेंद्र के दफ्तर से जारी भ्रमण कार्यक्रम में गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी और विधायक मदन कौशिक का भी नाम होने से सियासी पारा ज्यादा चढ़ा रहा दोस्तो विधायक अरविंद पांडे प्रकरण से भाजपा भीतरखाने बेहद असहज है। इससे भाजपा में गुटबाजी खुलकर सामने आई है। ये गुटबाजी भी प्रदेश स्तर पर है। इस मामले को हाईकमान ने बेहद गंभीरता से लिया। न केवल त्रिवेंद्र बल्कि विधायक पांडे से भी बात गई। हाईकमान के हस्तक्षेप से मामला सुलटा जरूर दिख रहा है,पर अंदरखाने भाजपा काफी असहज है। चुनावी वर्ष में जिस प्रकार लगातार पार्टी के भीतर से गाहे-बेगाह असहमति के स्वर सुनाई दे रहे हैं, वो गहरी चिंता का विषय बन रहा है। इसके बाद पांडे ने गूलरभोज आने वाले नेताओं को एक-एक कर फोन किया। विधायक ने उन सभी का आभार जताया। साथ ही अनुरोध किया कि वह गूलरभोज नहीं आएं। बाद में पांडे ने पार्टी में किसी तरह की गुटबाजी की चर्चा को नकारते हुए सबके एक साथ होने की बात भी कही। भाजपा विधायक अरविंद पांडे बीते कुछ दिन से अपनी ही सरकार के खिलाफ तीखे तेवर दिखा रहे हैं। गुरुवार को एक फोन कॉल के बाद वह बैकफुट पर आ गए।
सूत्रों के अनुसार, विधायक पांडे के मोबाइल फोन पर पार्टी हाईकमान की कॉल आई जिसके बाद उनके सुर बदल गए। पांडे ने हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी और हरिद्वार विधायक मदन कौशिक को फोन कर, उनके समर्थन के लिए आभार जताया और गूलरभोज नहीं आने के लिए कहा गया वो कॉल किसी और की नहीं बल्की बीजेपी के राष्ट्रीय महासिचव की बताई गई लगा की मामला शांत हो जाएगा लेकिन उसके बाद जो शक्ति प्रदर्शन की तस्वीर साने आई उसने और आग में घी डालने का काम किया, लेकिन इसी दौरान विधायक पांडे को हरिद्वार से भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के एक नेता की कॉल आई। उन्होंने विधायक पांडे को इस तरह के कार्यक्रम से पार्टी को नुकसान की बात कही। इस पर पांडे ने कहा कि वह नहीं चाहते हैं कि उनके किसी भी काम से पार्टी को कोई नुकसान पहुंचे। वह पार्टी के अनुशासित कार्यकर्ता हैं। हरिद्वार में एक कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के नेता की मौजूदगी थी। सांसद त्रिवेंद्र रावत और विधायक मदन कौशिक भी वहां थे। सूत्रों के मुताबिक, इसी दौरान दोनों से बात की गई और फिर पांडे को कॉल कर समझाया गया लेकिन ये सब तो एक तरफ चल ही रहा था दूसरा ट्विस्ट इस मामले में ये आया कि अरविंद पांडे के शक्ति प्रदर्शन भीड़ थी। इस पर नजर देहरादून से दिल्ली तक वालों की थी, यहां कुछ नामों का जिक्र तो खुल हो गया कि अरविंद पांडे के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री सांसद विधायक हैं लेकिन अरविंद पांडे ने मंच से कुछ और नाम लिए। जी हां दोस्तो एक तरफ त्रिवेंद्र सिंह रावत, अनिल बलूनी, मदन कौशिक, बिशन सिंह चुफाल तो उधर दो नाम और जोड़ दीजिए। ऋतु खंडूरी और पूर्व मुख्यमंत्री वियज बहुगुणा और विधायक तामाम थे तो ये क्या ये बताने की कोशिश है कि इतने लोग मौजूदा वक्त में बीजेपी की सरकार या पार्टी के रवैये से नाराज हैं या इनकी अलग से कोई खिचड़ी पक रही है। वैसे इस हैरानी वाली बात तो ये हैं कि बीजेपी विधायक पूर्व मंत्री अरविंद पांडे को जो समर्थन देने वाले हैं। उसमें दो नाम मदन कोशिक और चुफाल को हटा दे तो ये सभी पौड़ी से आते हैं और हां इसमें अभी एक नाम सामने नहीं आ रहा है वो भी पौड़ी से संबध रखते हैं। मौजूदा कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत, तो दोस्तो क्यों पौड़ी के इन बड़े दुरंधरों ने एक अलग खेमा बना लिया और वैसे दोस्तो बीते दिनों अंकिता केश ने खूब शोर मचाया था, तो वो अंकिता भी पौड़ी की ही रहने वाली थी इसका मतलब क्या निकाला जाय। आप बताना कुछ समझ आता है तो वैसे बीजेपी में उठ रही है ये हलचल नई नहीं और इस बड़े अंतर्कलह के बीच अचानक दिल्ली के इस बड़े नेता की एंट्री ने सबकी सांसें रोक दी है। एक ही कॉल से संभल गया मामला, लेकिन अब सवाल ये है—पांडे जी के यार बीजेपी कि नयाया आगामी चुनाव में लगाएंगे पार इसके दोनों मतलब हो सकते हैं। आप अपनी राय जरूर दीजिगा इस खबर पर आपको क्या लगता है।