उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने जिस अधिकारी को पेपर की पूरी जिम्मेदारी दी थी, उसी ने सेंधमारी कर दी। अनुभाग अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने मोबाइल से पेपर के फोटो खींचकर इसे लीक कर दिया। इसके लिए उसने 25 लाख रुपये एडवांस लिए थे। पूरा सौदा कितने में हुआ था, एसटीएफ इसकी जांच कर रही है। एसटीएफ के मुताबिक, प्रश्नपत्रों के सभी सेट उसी की अभिरक्षा में रख गए थे। आठ जनवरी को परीक्षा थी। इससे पहले पांच जनवरी को ही उसने पेपर की फोटो खींचकर अपनी पत्नी रितु को उपलब्ध करा दिया था। रितु ने राजपाल और राजकुमार से एडवांस में 25 लाख रुपये लेकर उन्हें पेपर दे दिया।
एसटीएफ के मुताबिक अभी तक की जांच में सामने आया है कि संजीव और रितु ने 35 लाख में पेपर का सौदा किया था। इसके बाद अन्य आरोपियों राजपाल, संजीव कुमार और रामकुमार ने चार लाख से 12 लाख कर में अभ्यर्थियों को पेपर बांटे। एसटीएफ के एसएसपी ने बताया कि आरोपियों ने अभ्यर्थियों से कुल कितनी धनराशि प्राप्त की है, इसकी अभी जांच की जा रही है। वही, लेखपाल बनने के लिए हजारों अभ्यर्थियों ने दिन रात पढ़ाई की। परीक्षा में शामिल कितने अभ्यर्थी लेखपाल बनने में कामयाब होते, यह अलग बात है। लेकिन गिरफ्तार हुए रामकुमार के बेटे का लेखपाल बनना तय था।
दरअसल, रामकुमार ने अपने बेटे आदित्य से भी परीक्षा दिलाई थी। यह साफ है कि पैसे लेकर दूसरों को पेपर पढ़वाने वाले रामकुमार ने अपने बेटे को सबसे पहले पेपर सौंपा होगा। इसलिए पोल न खुलती तो रामकुमार का बेटा लेखपाल जरूर बनता। अब असलियत सामने आने पर पूरे क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोक सेवा आयोग में तैनात संजीव चतुर्वेदी से संपर्क होने के बाद रामकुमार ने बेटे को लेखपाल बनाने के लिए पूरी तैयारी कर ली थी। परीक्षा से पहले पेपर हाथ में आने के बाद तो वह बेटे को लेखपाल मान चुका था।