जी हां दोस्तो अपने उत्तराखंड में फर्जी पहचान की फैक्टी का खुलासा, जब स्थायी निवास प्रमाणपत्र हो रहा था बड़ा घोटाला। जब कारेवाई हुई तो कैसे मच गया हड़कंप, उत्तराखंड में हो गया बड़ा भंडाफोड़, एक छापा पड़ा और खुल गई पोल। Fake Documents Used Domicile जी हां दोस्तो स्थायी निवास, यानी पहचान, अधिकार और सरकारी योजनाओं की चाबी! इसी में हो रहा था बल बड़ा खेल लेकिन सोचिए, अगर यही पहचान फर्जी कागज़ों पर बनने लगे, तो सिस्टम कितना खोखला हो जाएगा? उत्तराखंड में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पूरे प्रशासन को हिला दिया है। जब दोस्तो कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने तहसील में छापा मारा और सामने आई एक चौंकाने वाली सच्चाई—एक तहसील कर्मचारी फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे लोगों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र बांट रहा था। जी हां दोस्तो ये कोई छोटी मोटी गड़बड़ी नही, ये उस बड़े नेटवर्क की झलक है, जो पहचान की फाइलों में खेल रहा था धांधली का काला खेल। दोसतो मै अपने इस वीडियो में बताउंगा कैसे चल रहा था ये फर्जीवाड़ा?कौन लोग शामिल थे? और कमिश्नर रावत ने किस तरह रंगे हाथ भंडाफोड़ किया? क्योंकि दोस्तो ये खुलासा सिर्फ़ धोखाधड़ी नहीं बल्कि सिस्टम में छिपी साजिश की कहानी है, जिसे समझना जरूरी है। दगड़ियो अपने उत्तराखंड में किस तरह के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर स्थायी निवासी बना जा रहा है, इसका भंडाफोड़ हुआ।
कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में स्थित सीएससी सेंटर पर छापा मारा, तभी उन्होंने दस्तावेज़ लेखक फैजान मिकरानी को फर्जी दस्तावेज़ बनाते हुए रंगे हाथ पकड़ा। दरअसल, दोस्तो कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को जनता दरबार में शिकायत मिली थी कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर उत्तराखंड के प्रमाण पत्र बनाए जा रहे है। शिकायतकर्ता ने कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को बताया था कि उसके नाम पर बरेली निवासी एक व्यक्ति का स्थायी निवास प्रमाण पत्र बना दिया गया है। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने सच्चाई का पता लगाने के लिए मामले की गोपनीय जांच कराई, तब गोपनीय जांच में कुमाऊं कमिश्नर रावत को पता चला कि फैजान मिकरानी नाम का व्यक्ति फर्जी दस्तावेज बनाने का काम करता है। इसके बाद कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत वनभूलपुरा क्षेत्र में स्थित सीएससी सेंटर में पहुंचे। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के सीएससी सेंटर में पहुंचते ही हड़कंप मच गया। दोस्तो कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की जांच में सामने आया कि फैजान मिकरानी ही फर्जी दस्तावेज़ बनाता है, जो हल्द्वानी तहसील में अर्ज़ीनवीस का काम करता है। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को सीएससी सेंटर से कई लोगों के पर्सनल दस्तावेज भी मिले है। दोस्तो यहां जब छापा पड़ा तो कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने बताया कि SCROLL IN जनता दरबार में उनके सामने एक शिकायत आई थी। जिसमें बताया गया था कि रईस अहमद नाम का व्यक्ति जो यूपी के बरेली का रहने वाला है, वो कुछ समय से हल्द्वानी में रह रहा है, लेकिन उसका स्थायी निवास प्रमाण पत्र बन गया है।
बरेली वाले रईस अहमद का स्थायी निवास बनाने के लिए हल्द्वानी के ही एक रईस अहमद नाम के व्यक्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, जिसके पास पहले से ही स्थायी निवास का प्रमाण पत्र है। SCROLL OUT दोस्तो कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के अनुसार मामले की जांच की गई तो फैजान मिकरानी का नाम सामने आया है, जो हल्द्वानी तहसील में अर्ज़ीनवीस का काम करता है। फैजान मिकरानी के पास कोई व्यक्ति आय प्रमाण पत्र बनवाने गए थे, उसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर फैजान मिकरानी ने इस्तेमाल किया। यानी फैजान मिकरानी ने आय प्रमाण पत्र बनवाने वाले व्यक्ति के मोबाइल नंबर से आवेदन कर दो नकली स्थायी निवास प्रमाण पत्र बना दिए. वहीं जब सीएससी सेंटर में छापा मारा गया तो वहां पर कई व्यक्तियों के पर्सनल दस्तावेज भी पाए गए, जो नहीं होने चाहिए थे। दोस्तो इतना ही नहीं कुमाऊं कमिश्नर बताया कि इस मामले में अभी तहसील की तरफ से मुकदमा दर्ज जाएगा। इस तरह के और कितने मामले है, उनका पता लगाने के लिए विस्तृत जांच भी करायी जाएगी। उत्तराखंड में इस तरह का अपराध किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तरफ से इसको लेकर साफ निर्देश दिए गए है। दोस्तो, पहचान से बड़ा कोई दस्तावेज नही और उत्तराखंड में इसी पहचान के साथ अगर धोखा हो, तो समझ लीजिए ये सिर्फ कागज़ों का घोटाला नहीं, बल्कि सिस्टम की जड़ें हिलाने वाली साजिश है। कुमाऊंकमिश्नर दीपक रावत की तत्परता से ये बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ऐसे और भी मामले दबे पड़े हैं? कितने लोग फर्जी पहचान पर सरकारी सुविधाएं हड़प रहे हैं? और किस-किस की मिलीभगत से ये खेल चल रहा था? कमिश्नर रावत ने साफ कर दिया है कि इस काले खेल में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। कार्रवाई होगी और सख्त होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी स्पष्ट आदेश है—उत्तराखंड की पहचान के साथ खिलवाड़ करने वाले चाहे कोई भी हों। कानून का डंडा जरूर चलेगा तो दोस्तो, ये सिर्फ एक छापा नहीं, ये चेतावनी है उन सभी के लिए जो फर्जी दस्तावेज़ बनाकर सिस्टम को चूना लगाना चाहते हैं। उत्तराखंड बदल रहा है और अब गड़बड़ियों पर परदा नहीं, सीधे पर्दाफाश होगा।