देहरादून: सेना भर्ती से जुड़ी ‘अग्निपथ’ योजना के खिलाफ देशभर में हिंसक प्रदर्शन चल रहे हैं। हिंसा की आंच यूपी, बिहार, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान समेत 13 राज्यों में पहुंच चुकी है। सबसे ज्यादा बवाल बिहार और उसके बाद उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार की नई भर्ती नीति अग्निपथ के खिलाफ शुक्रवार को हिंसक उपद्रव करने वालों पर गंभीर धाराओं में आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए। वही अब उत्तराखंड पुलिस ने भी कमर कस ली है। जहा डी जी पी अशोक कुमार ने पुलिस अधिकारियों को महत्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए है वही हरिद्वार एस एस पी योगेंद्र सिंह रावत ने भी हरिद्वार में आर्मी कोचिंग देने वाले इंस्टीट्यूट से बातचीत की।
अग्निपथ योजना का देशभर में विरोध हो रहा है। कई जंगहों पर तो ट्रेनों को भी आग के हवाले कर दिया गया है। उत्तराखंड में भी अग्निपथ योजना की आग पहुंची है। चंपावत और हल्द्वानी में युवाओं ने अग्निपथ योजना का विरोध किया है। चंपावत में जहां बीजेपी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया तो वहीं, हल्द्वानी में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री के घर के बाहर विरोध कर रहे युवाओं पर लाठी चार्ज भी किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी अशोक कुमार ने पुलिस अधिकारियों को कुछ जरूर दिशा-निर्देश जारी किए है।अग्निपथ योजना के खिलाफ देशभर में हो रहे हिसक प्रदर्शन को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस भी अलर्ट हो गई है। डी जी पी अशोक कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के पुलिस प्रभारियों के साथ बैठक की।
बैठक में डीजीपी अशोक कुमार ने आदेश दिए कि अराजकता और तनावपूर्ण माहौल बनाकर उपद्रव करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाय। डी जीपी अशोक कुमार ने राज्य के सभी जनपद प्रभारियों को अलर्ट रहने के साथ ही आर्मी कोचिंग सेन्टर संचालकों और प्रदर्शनकारी युवाओं से वार्ता कर शान्ति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के सख्त दिशानिर्देश दिए हैं। उन्होंने ने कहा कि प्रदेश में किसी भी कीमत पर माहौल नहीं बिगड़ने दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति असंवैधानिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करके शान्ति या कानून व्यवस्था प्रभावित करता है, तो उसके विरूद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। रेलवे स्टेशन और बस अड्डे के अलावा अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में पर्याप्त मात्रा में पुलिस फोर्स तैनात करने को कहा गया है।
वहीं पिछले 4 सालों से सेना में भर्ती की तैयारी में जुटे उत्तराखंड के युवाओं का यह भी कहना है कि राज्य सरकार अग्निपथ स्कीम के तहत सेना में सेवा देने वाले युवाओं को अलग-अलग सरकारी सेवाओं में प्राथमिकता देने की बात कर रही है। उसको पहले शासनादेश के रूप में इसे धरातल पर लाना होगा। तभी राज्य के युवाओं में विश्वास जगाया जा सकता है। उत्तराखंड राज्य एक अरसे से ही सैनिक बाहुल्य प्रदेश रहा है। यहां का अधिकांश युवा सेना में ही अपने पूर्वजों की तर्ज पर अपना भविष्य तलाशता है। युवाओं का सवाल है कि जिस तरह से 4 साल का सेवाकाल योजना सरकार लेकर आ रही है, उसे समझना और उस पर भरोसा करना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।