जी हां दोस्तो उत्तराखंड में एक ही मांग चौतरफा सुनाई दे रही है कि अंकिता केस की सीबीआई जांच हो और वीआईपी वाले प्रकरण से पर्दा जल्द उठे, ऐसे में अब ऐसा लगता है कि सीबीआई जांच का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है क्योंकि एक तरफ पहाड़ से लेकर मैदान तक सडक पर लोग उतर आए हैं, Ankita Bhandari Case तो उधर पूरा उत्तराखंड होगा बंद इसका हो गया ऐलान अब किसने किया ये ऐलान क्या होगी अंकिता मामले की सीबीआई जांच कैसे सरकार पर बढ़ रहा है दबाव बताउंगा आपको अपनी इस रिपोर्ट के जिरिए। दोस्तो उत्तराखंड की सड़कों पर आज सिर्फ भीड़ नहीं, बल्कि इंसाफ की गूंज दिखाई दे रही है। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। जहां देहरादून में CBI जांच की मांग को लेकर जनसैलाब उमड़ पड़ा, लोगों के हाथों में तख्तियां थीं, आंखों में सवाल थे और जुबां पर सिर्फ एक मांग— अंकिता को पूरा न्याय, इस बीच आंदोलनकारियों ने 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान कर सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया है। सवाल ये है कि क्या जनता की इस एकजुट आवाज़ के बाद सरकार CBI जांच पर फैसला लेगी, या फिर अंकिता के परिजन और प्रदेश की जनता को यूं ही न्याय के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा? या रहना पड़ेगा।
दोस्तो ये तस्वीर प्रदेश की राजधानी की है, लेकिन इस शोर से पहाड़ भी अछूता नहीं रहा है। गढ़वाल से लेकर कुमाउँ की पहाड़ियों में अंकिता को न्याय की मांग का शोर खूब सुनाई दे रहा है। उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ में आज जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप रावत के नेतृत्व में अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की मांग को लेकर शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला गया। अब जरा इस जनसैलाब और नारों को देखिए सुनिए। आपको अंदाजा लग जाएगा की जिस दबाव की बात मैने की थी वो है क्या आज की कई प्रदर्शन श्रृंखलाओं में, अल्मोड़ा के सॉल्ट विधानसभा क्षेत्र में एक और प्रदर्शन आयोजित किया गया, जहाँ लोग अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग के लिए एकत्रित हुए। इतना ही नहीं उत्तराखंड भर में हुए प्रदर्शनों के बाद, आज अल्मोड़ा में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक और प्रदर्शन आयोजित किया गया, कांग्रेस विधायक मनोज तिवारी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और सीबीआई जांच की मांग की, कहते हुए कि स्वतंत्र जांच के बिना न्याय अधूरा रहेगा। दोस्तो उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सीबीआई जांच और मामले से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल की मांग को लेकर देहरादून में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे. विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र-युवा संगठनों और विपक्षी राजनीतिक दलों की ओर से विशाल रैली निकाली गई, जिसमें जनसैलाब उमड़ पड़ा, लेकिन जनसैलाब और शोर की बीच जब कुछ फर्क पड़ता नहीं दिखा तो तब ऐलान हो गया पूरे उत्तराखंड बंद का। जी हां दोस्तो 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया है। उन्होंने बताया कि इसको लेकर विभिन्न व्यापारिक और सामाजिक संगठनों से संवाद किया जाएगा।
वहीं उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने भी सीबीआई जांच की मांग को दोहराया और कहा कि मामले की पारदर्शी जांच से ही पीड़ित परिवार को न्याय मिल सकता है। दोस्तों, उत्तराखंड की सड़कों पर न्याय की आवाज़ गूँज रही है। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जनता का गुस्सा और मांगें पूरे राज्य में एकसाथ उठ रही हैं—देहरादून हो, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा या गढ़वाल और कुमाउँ की पहाड़ियां, हर जगह सीबीआई जांच की पुकार सुनाई दे रही है। सड़कों पर उमड़े जनसैलाब और शांतिपूर्ण कैंडल मार्च ने साफ कर दिया है कि जनता अब न्याय के लिए पीछे नहीं हटेगी। इसी दबाव और एकजुटता के बीच आंदोलनकारियों ने 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान कर सरकार पर साफ संदेश भेजा है। अब देखना ये है कि क्या सरकार इस जनआंदोलन और जनता की मांग को गंभीरता से लेते हुए स्वतंत्र CBI जांच का निर्णय करेगी, ताकि अंकिता के परिजनों को न्याय मिल सके।