उत्तराखंड में पुलिस पर उठे सवाल और कानून व्यवस्था को लेकर बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुलाई बड़ी बैठक। क्या अधिकारी समय रहते संवेदनशील और जिम्मेदार policing करेंगे? क्या आम जनता को अब राहत मिलेगी या फिर कानून व्यवस्था पर समझौता जारी रहेगा? सीएम धामी ने साफ कहा—अब कोई कोताही बर्दाश्त नहीं पूरी खबर रिपोर्ट के जिरए। दोस्तो ऐसी क्या वजह रही ही कि पुलिसिया इंकबाल खतरे में दिखा तो प्रदेश के मुख्या ने खुद लिया संज्ञान और एक बड़ी बैठक कर लगा दी बड़े अधिकारियों की क्लास। दोस्तो बीते कुछ समय से ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं जहां खुद को मित्र पुलिस का तमगा देने वाली उत्तराखंड पुलिस का स्याह चेहरा पुलिसिंग को शर्मसार करने वाला रहा है। पीड़ितों को कहने को मजबूर होना पड़ा कि इस पुलिस ने तो गुलामी के दिनों की अंग्रेज पुलिस को भी पीछे छोड़ दिया। दोस्तो अभी उत्तराखंड के जिस भी गांव शहर से आप इस खबर को पढ़ रहे हैं, वहां भी जरूर कोई न कोई ऐसा वाकया सामने आया होगा जहां न्याय की आस में थाना चौकी फरियाद लेकर गये पीड़ित को पुलिस ने सताया होगा। लेकिन कोई सुनने वाला नहीं, कोई देखने वाला नहीं। सोशल मीडिया में जरूर पुलिस की ज्यादती के चर्चे हुए। ऐसे में शासन तक पुलिस के गुंडाराज वाली कार्यशैली की खबरें न पहुचें, यह भी संभव नहीं।
यही वजह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, उत्तराखंड में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और जनसेवा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस और प्रशासन का प्रत्येक विभाग आम जनमानस के प्रति संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ कार्य करे। दोस्तो सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए राज्य की कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटन प्रबंधन, राजस्व, नशा मुक्ति, अभियोजन, कारागार सुधार एवं जनशिकायत निवारण से जुड़े विषयों पर गहन समीक्षा की..बैठक में मुख्य सचिव सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे..मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस थानों और चौकियों के स्तर पर वर्क कल्चर में तत्काल सुधार किया जाए। आम नागरिकों के साथ मानवीय, संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित हो। निर्दोष लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान करने की किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा दोस्तो यहां मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। सुरक्षा से संबंधित शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लिया जाए।
कानून व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आपराधिक मामलों की विवेचना अनावश्यक रूप से लंबित न रखी जाए। रात्रि गश्त को और अधिक सघन किया जाए तथा निरंतर पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाए। 1905 हेल्पलाइन की नियमित समीक्षा कर जीरो पेंडेंसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा दोस्तो लैंड फ्रॉड पर सख्त कानून, मुख्यमंत्री ने भूमि घोटालों पर कठोर कानून बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि लैंड फ्रॉड में संलिप्त दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। नशा मुक्ति को बने जन आंदोलन। मुख्यमंत्री ने नशा मुक्ति अभियान को जन आंदोलन के रूप में संचालित करने के निर्देश दिए। प्रत्येक जनपद से मासिक नशा मुक्ति रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसकी नियमित समीक्षा गृह सचिव एवं पुलिस महानिदेशक करेंगे। इसके अलावा दोस्तो मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियोजन व्यवस्था कमजोर नहीं होनी चाहिए। अभियोजन अधिकारियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया जाएगा। दोस्तो, ये वही पल है जब उत्तराखंड की जनता पुलिस और प्रशासन से उम्मीदें रखती है, और वही उम्मीदें अब सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों में देखी जा सकती हैं देखा जाए तो ये केवल बैठक नहीं थी, बल्कि एक चेतावनी थी—सभी पुलिस थानों, चौकियों और प्रशासनिक विभागों को स्पष्ट किया गया कि अब कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आम नागरिकों के साथ मानवीय और संवेदनशील व्यवहार, अपराधों पर सख्त कार्रवाई, रात्रि गश्त, पेट्रोलिंग और हेल्पलाइन की समीक्षा—ये सभी निर्देश राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और जनता के भरोसे को बहाल करने के लिए दिए गए हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ने भूमि घोटालों में संलिप्त दोषियों पर कठोर कार्रवाई, नशा मुक्ति को जन आंदोलन के रूप में चलाने और अभियोजन व्यवस्था में पारदर्शिता लाने तक के आदेश भी दिए। इसका मतलब साफ है—अब शासन के हर स्तर पर जवाबदेही तय होगी, चाहे वह पुलिस हो, राजस्व विभाग हो या प्रशासन का कोई अन्य अंग।लेकिन सवाल ये है कि क्या ये निर्देश धरातल पर लागू होंगे? क्या आम जनता को अब राहत मिलेगी या फिर यह सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा? क्या पुलिस और प्रशासन जनता की आवाज़ सुनेंगे और दोषियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई करेंगे? या फिर पुराने ढर्रे पर काम चलता रहेगा?दोस्तो, उत्तराखंड की जनता अब चौकस है, सवाल पूछ रही है और जवाब की उम्मीद रख रही है। और यही वजह है कि मुख्यमंत्री की यह बैठक केवल प्रशासनिक समीक्षा नहीं, बल्कि जनता की निगरानी का भी संदेश है।तो अब देखना ये होगा कि अगले महीनों में ये निर्देश कैसे धरातल पर लागू होते हैं। क्या उत्तराखंड में कानून और व्यवस्था में सुधार दिखाई देगा? क्या जनता अब खुद को सुरक्षित महसूस करेगी? और क्या पुलिसिंग का चेहरा अब स्याह से बदलकर भरोसेमंद बन पाएगा?यही सवाल हैं, यही चुनौती है, और यही भविष्य के उत्तराखंड की तस्वीर तय करेगा।