जी हां दोस्तो नकली, दूध पनीर, दवा दारूं तेल मख्खन, यहां तक की चावल की बात तो सुनी थी। अब तो आम आदमी के नौनिहालों के साथ जो धोखेबाजी हो रही है। उसने सबको हैरान कर दिया। सब सुना था कि क्या नकली बनता है और बेचा जाता है, लेकिन दोस्तो क्या नकली किताबों के जरिए देवभूमि के बच्चों की नींव ही तबाह करने की कोई साजिश हो रही है। ये सवाल इस लिए कर रहा हूं क्योंकि किताबों को लेकर हुए इस नए खुलासे बड़ा हड़कंप मचा दिया है। नकली किताबें वो भी करोड़ों की, कैसे खुली पोल। दोस्तो आज हम आपको दिखाने वाले हैं एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा जो हर माता-पिता और छात्र के लिए बड़ी चिंता का विषय है। रुद्रपुर में पुलिस और प्रशासन ने 11 लाख 30 हजार नकली NCERT किताबों का भंडाफोड़ किया है, जिनकी कीमत करीब 11 करोड़ रुपये बताई जा रही है। सवाल उठता है—क्या हमारे नौनिहाल इन नकली किताबों से पढ़ाई कर रहे हैं? दोस्तो बीते 15 मार्च को उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिला मुख्यालय रुद्रपुर में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया था। यहां एक गोदाम से एनसीईआरटी (की करीब 11 लाख 30 हजार नकली किताबें बरामद की गईं। इस मामले में और बड़ा खुलासा हुआ है। एनसीईआरटी द्वारा बताया गया है कि किताबों की कीमत लगभग 11 करोड़ रुपये आंकी गई है। सूचना मिलने के बाद दिल्ली से एनसीईआरटी की टीम मौके पर पहुंची और जांच के दौरान इन किताबों को पहली नजर में नकली बताया है। फिलहाल पुलिस, प्रशासन और शिक्षा विभाग पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं. गोदाम के अंदर बरामद नकली किताबों की कीमत 9 से 10 करोड़ आंकी गई है। ट्रक में लदी किताबें भी करीब 1 करोड़ की होने का अनुमान है।
अब दोस्तो रुद्रपुर में फर्जी एनसीईआरटी (NCERT) किताबों का एक बड़ा जखीरा बरामद होने से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नकली किताबों का मिलना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी लापरवाही या संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। यह मामला सीधे तौर पर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है। दोस्तो मामले की जानकारी मिलते ही दिल्ली से एनसीईआरटी की एक विशेष टीम रुद्रपुर पहुंची। बताया जा रहा है कि 14 तारीख की शाम को किरतपुर क्षेत्र में स्थित एक गोदाम में भारी मात्रा में किताबें होने की सूचना मिली थी। इसके बाद प्रशासन ने 15 मार्च की सुबह गोदाम का ताला तोड़कर जांच शुरू की। पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर मौजूद किताबों की गिनती कराई, जिसमें लगभग 11 लाख 30 हजार किताबें बरामद हुईं। इन किताबों की अनुमानित कीमत करीब 11 करोड़ रुपये बताई जा रही है। दोस्तो मौके पर पहुंचे एनसीईआरटी के अधिकारी क्या कहा वो भी देख लीजिए। दोस्तो पहली नजर में यह सभी किताबें नकली प्रतीत हो रही हैं। असली एनसीईआरटी किताबों की प्रिंटिंग तय गुणवत्ता मानकों के आधार पर केवल आईएसओ प्रमाणित प्रिंटिंग प्रेस में कराई जाती है। बरामद किताबों में इस्तेमाल की गयी इंक और प्रिंटिंग क्वालिटी स्थानीय स्तर की लग रही है। कुछ लोग मुनाफाखोरी के लालच में नकली किताबें छापकर बाजार में सप्लाई करने की कोशिश करते हैं। दोस्तो एनसीईआरटी (टीम ने बरामद किताबों के नमूने लेकर उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। साथ ही कुछ सैंपल दिल्ली स्थित एनसीईआरटी मुख्यालय भी जांच के लिए भेजे जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा विभाग और केंद्र सरकार इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दोस्तो दरअसल पुलस को मुखबिर की सूचना पर यह कार्रवाई की गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत अपने उच्च अधिकारियों को अवगत कराया और गोदाम की निगरानी शुरू कर दी। यह क्षेत्र उपनिरीक्षक चंदन सिंह बिष्ट के अंतर्गत आता है, जिन्हें सूचना मिली थी कि गोदाम में भारी मात्रा में किताबें रखी गई हैं. कुछ किताबें सैंपल के आधार पर बाहर भेजने की तैयारी भी की जा रही है। दोस्तो पुलिस ने मौके से एक ट्रक में लोड किताबों को भी बरामद किया है और उसकी भी गिनती की जा रही है। फिलहाल पुलिस गोदाम मालिक से पूछताछ कर रही है और जिन लोगों ने गोदाम किराए पर लिया था, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में नकली किताबें कहां से छपकर आ रही थीं। क्या इसमें किसी की मिलीभगत भी शामिल है। शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ के समान हैं। ऐसे में प्रशासन और शिक्षा विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस तरह के फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से रोक कैसे लगाई जाए।