कांग्रेस में बदलाव की आहट | Karan Mahara | Uttarakhand News | Congress | Harak Singh Rawat

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उत्तराखंड कांग्रेस में बड़ा धमाका तय, चुनाव से पहले ही बदलेगा कप्तान, पर्यवेक्षकों की तैनाती ने बढ़ाई सियासी हलचल, लेकिन काग्रेस में के कप्तान करन महारा नहीं तो फिर कौन? There is a sound of change in Congress बताने जा रहा हूं पूरी खबर और पूरा गणित दगड़ियो उत्तराखंड कांग्रेस फिर से राजनीतिक मोड़ पर खड़ी है, ऐसे वक्त में जब पार्टी लगातार चुनावी हार के बाद संगठन को नया जीवन देने की जद्दोजहद में जुटी है, नेतृत्व को लेकर उबाल चरम पर है, सवाल बड़ा है। क्या करन माहरा की कुर्सी बचेगी? या फिर हाईकमान एक बार फिर चौंकाने वाला दांव खेलेगा। इस पर बात करने आया हूं दगड़ियो। दहअसल राज्य में विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस हाईकमान की एक चुप्पी पूरे संगठन में हलचल पैदा कर चुकी है। जिलाध्यक्षों को बदलने के लिए पर्यवेक्षकों की सीधी तैनाती ने संदेश दे दिया है—अब फैसले देहरादून नहीं, दिल्ली से होंगे ऐसा लगता है और ये सीधे प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंच सकते हैं दग़डियो। तीन साल और कोई नई टीम नहीं – क्या करन माहरा का समय पूरा हुआ? ये वो सवाल है जिसका जवाब हर कोई जानना चाहता है। दगड़ियो करन माहरा को प्रदेश अध्यक्ष बने तीन साल हो चुके हैं। मई में उनका कार्यकाल पूरा हुआ लेकिन उन्हें नई कार्यकारिणी नहीं दी गई। इसके बजाय समन्वय समिति बनाकर हाईकमान ने ये साफ कर दिया कि भरोसे की डोर ढीली पड़ चुकी है।

माहरा को उसी पुरानी टीम के सहारे संगठन चलाना पड़ा—जिसमें न उत्साह था, न अनुभव। हाईकमान का ये कदम सामान्य नहीं था… यह संगठन में बदलाव का साफ़ संकेत था—सिर्फ नीचे से नहीं, ऊपर से भी ये कहा जा सकता है। दगड़ियों यहां तक कि जिला अध्यक्षों पर दिल्ली की सीधी पकड़ – संदेश साफ लगता है होगा क्या वो तो वक्त बता ही देगा, लेकिन पहली बार कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश संगठन के जमीनी ढांचे को लेकर इतनी आक्रामकता दिखाई है। जिलाध्यक्षों के चयन की जिम्मेदारी अब प्रदेश अध्यक्ष से लेकर एआईसीसी पर्यवेक्षकों को दे दी गई है, ये कदम अपने आप में बता रहा है कि प्रदेश नेतृत्व को लेकर पार्टी में भरोसा डगमगा गया है। हाईकमान अब खुद मैदान में उतर चुका है और जब मामला दिल्ली मैदान में हो, तो चेहरों की अदला-बदली तय मानी जाती है। वैसे भी दोस्तो  कांग्रेस का डूबता जहाज और उम्मीदों की नई पतवार ये इसलिए क्योंकि 2022 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में भी राज्य की पांचों सीटें गंवा दीं। यहां तक कि निकाय और पंचायत चुनावों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन उबाऊ और निराशाजनक रहा। पार्टी के पास अब खोने को कुछ नहीं और साबित करने को सब कुछ है।

दगडड़ियो ऐसे में नए चेहरे की तलाश सिर्फ रणनीति नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व की मजबूरी बन चुकी है। नेताओं की कतार लंबी, लेकिन निर्णय चौंकाने वाला हो सकता है उसके बारे में आगे बताउंगा आपको कौन होगा कांग्रेस अगला अध्यक्ष। दगड़ियों 2027 विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति है, इसलिए पार्टी अब एक ऐसा चेहरा चाहती है: जो संगठन को फिर से खड़ा कर सके,मोर्चा संभाल सके, और चुनावी टिकटों का वितरण निष्पक्ष तरीके से कर सके। इस रेस में नाम कई हैं जैसे (ये नाम फोटे के साथ सिंगल में आएंगे.. हेडर- कांग्रेस का नया अध्यक्ष !)प्रीतम सिंह (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष) गणेश गोदियाल (पूर्व अध्यक्ष),यशपाल आर्य (वर्तमान नेता प्रतिपक्ष),डॉ. हरक सिंह रावत (वरिष्ठ नेता),हरीश रावत (पूर्व मुख्यमंत्री) लेकिन दगड़ियों ये सारे नाम “पुराने घोड़े” हैं, हाईकमान का रुख देखकर ऐसा नहीं लगता कि वह पुराने चेहरों पर फिर से दांव लगाएगा। राहुल गांधी की OBC नेतृत्व पर फोकस को देखते हुए हरिद्वार या उधम सिंह नगर से किसी नई पीढ़ी के नेता को आगे लाने की चर्चा जोरों पर है। ऐसा लगता है दोस्तो कि माहरा के पास अब बहुत सीमित समय है या तो वह एक बार फिर हाईकमान का भरोसा जीतें, या अगला आदेश उनकी विदाई का दस्तावेज़ बने। पार्टी ने न तो उन्हें हटाने की घोषणा की, न ही अगले चुनाव तक बने रहने की यही सस्पेंस पार्टी में सियासी पारा चढ़ा रहा है। उधर माहरा खेमा जानता है—अगर अब हटे, तो वापसी मुश्किल है।

दगड़ियों 2024 लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए एक और झटका साबित हुआ। ये साफ कर गया कि केवल बीजेपी विरोध से चुनाव नहीं जीते जाते जमीन पर संगठन, रणनीति, और विश्वसनीय चेहरा होना जरूरी है। यही वजह है कि 2027 की लड़ाई से पहले पार्टी संगठन की री-बूटिंग कर रही है और इस ‘रीबूट’ में सबसे पहला सॉफ्टवेयर अपग्रेड प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी ही है। अगर हाईकमान नया अध्यक्ष लाता है, तो यह सिर्फ चेहरा बदलने का फैसला नहीं होगा—यह पार्टी में एक नया संदेश, नया मिज़ाज और नया मॉडल होगा। वह नेता जो (कांग्रेस का निशान हाथ और सिंगल लाइन में एक ही चीज बंबर वाले अंदाज में) जमीनी कार्यकर्ताओं से जुड़ा हो,समाज के पिछड़े या युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व करता हो, और जो 2027 की चुनौती को लड़ने की ताकत रखता हो दगड़ियो करन माहरा की विदाई की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है या नहीं, यह तो वक्त बताएगा। हाईकमान मैदान में उतर चुका है, संगठन की सर्जरी शुरू हो चुकी है। अब सवाल यह नहीं कि बदलाव होगा या नहीं, सवाल है कब और कौन? राजनीतिक हलचलों की घड़ी शुरू हो चुकी है। नए अध्यक्ष के नाम पर बनी चुप्पी जितनी लंबी होगी, भीतर का उबाल उतना ही तेज़ फूटेगा, वैसे हरक सिंह रावत तो फुल मूड में लिखाई दे रही रहे हैं क्या पता हरक सिंह रावत ही वो चेहरा हो। देखना होगा दगड़ियो लेकिन कांग्रेस के लिए परीक्षा घड़ी अब चलने लगी है, टीक-टीक टीक-टीक टीक-टीक