दोस्तों, उत्तराखंड विधानसभा में उस वक्त हंगामा देखने को मिला जब मंत्री और कांग्रेस विधायक के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। मंत्री ने सदन में सीधे-सादे शब्दों में कहा – “तेरी शक्ल कुपोषित, तेरी पार्टी भी कुपोषित”! यह बयान सिर्फ सदन की गर्मजोशी का हिस्सा नहीं, बल्कि इसके पीछे की राजनीतिक सच्चाई और दोनों दलों के बीच बढ़ते तनाव को भी दर्शाता है। Uttarakhand Budget Session 2026 तो आइए, जानते हैं कि आखिर क्यों सामने आया यह विवादित “कुपोषित वाला बयान” और क्या है इसके पीछे की पूरी कहानी। दोस्तो उत्तराखंड के गैरसैंण में विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था। सदन पर कई मुद्दों पर बहस गरमा रही थी लेकिन इस बीच हुआ कुछ ऐसा कि बात तू. तड़ाक तक जा पहुंची। मंत्री और कांग्रेस के विधायक के बीच हुई इस अमार्दित बसह पर अब सियासी शोर तमाम हो रहा है और ये कुपिषित वाली सियासत के पीछ क्या है सच्चाई ये भी सामने आ चुकी है। वैसे तो विधानसभा सदन में जनता से जुड़े मुद्दों पर पक्ष विपक्ष के बहस होती है। कभी नोक झोक होती है तो कभी बहस बाजी भी होती है, लेकिन अगर भाषा और शब्दों का चयन ऐसा हो कि सदन की मर्यादा ही भंग हो तो क्या कहेंगे। सबसे बड़ी हैरानी मुझे तब हुई की माननीय विधानसभा अध्यक्षा ऋतु खंडुरी जी मुसकुरा रही हैं।
कोई एक्शन नहीं सिर्फ मुस्कराहट वाल रिएक्शन। क्या इतना भर काफी था इस तु तड़ाक को लेकर या फिर कुछ और हो सकता था। अरे कुछ नहीं तो हिदायद तो दी जासकती थी लेकिन आप सुनिए देखिए की सदन में आखिर कौन सा बयान है जिसे लेकर इतनी चर्चा हो रही है। दोस्तो ये तस्वीर उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन की है। सदन में जब कांग्रेस विधायक हरीश धामी के नियम 58 के तहत धारचूला ब्लॉक प्रमुख की फर्जी प्रमाण पत्र से नियुक्ति के मामले में संसदीय कार्य मंत्री जवाब दे रहे थे तो इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक काजी निजामुद्दीन ने एक ऐसी टिप्पणी करी जिससे संसदीय कार्य मंत्री ने भी उन्हें शब्दों में विधायक काजी निजामुद्दीन को जवाब दिया। कांग्रेस विधायक हो या संसदीय कार्य मंत्री दोनों में से किसी के भी बयान को सही नहीं कहा जा सकता है, लेकिन जब पत्रकार बंधुओं ने काजी निजामुद्दीन से सवाल किया कि क्यों उत्तराखंड वालों को आपने कुपोषित कह दिया। दोस्तो प्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार Mपिछले चार वर्षों में अति कुपोषित बच्चों की संख्या ढाई गुना तक बढ़ गई है। इस स्थिति ने नीति-निर्माताओं और प्रशासन की चिंता बढ़ा काम किया है थोड़े आकड़े आपको दिखाता हूं समझिएगा।
दोस्तो सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2020-21 में उत्तराखंड में कुल 8856 कुपोषित बच्चे और 1129 अति कुपोषित बच्चे थे. लेकिन साल 2024-25 तक कुपोषित बच्चों की संख्या 8374 और अति कुपोषित बच्चों की संख्या 2983 तक पहुंच गई। दोस्तो ये आंकड़े बताने के लिए काफी हैं कि चलाई जा रही योजनाओं और पोषण कार्यक्रमों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है और इसी को आधार बनाकर कांग्रेस के विधायक ने कुपोषित वाली टीप्पणई की लेकिन भाषा की मर्यादा पर सवाल अब खूब उठ रहे हैं सदन में अभद्र भाषा के प्रयोग को लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा है कि सदन के भीतर कोई भी व्यक्ति हो उसे सदन की मर्यादा का ख्याल होना चाहिए। विधानसभा के सदस्यों को सदन के प्रति गंभीर और अनुशासित होने की जरूरत है। ऐसे शब्दों का प्रयोग कभी भी नहीं करना चाहिए। वही कैबिनेट मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत ने कहा है कि सदन के भीतर सरकार हो या विपक्ष सभी को बहुत सोच समझ कर बोलना चाहिए। सदन के भीतर आपके आचरण को बाहर जनता भी देखती है। ऐसे में सभी को सदन की मर्यादा का ख्याल होना चाहिए। तो दोस्तो उत्तराखंड विधानसभा में “कुपोषित वाला बयान” सदन में न सिर्फ चर्चा का विषय बन गया, बल्कि इससे सदन की मर्यादा और राजनीतिक शिष्टाचार पर भी सवाल उठ खड़े हुए हैं। एक तरफ कांग्रेस विधायक ने गंभीर सामाजिक मुद्दों पर तर्क प्रस्तुत किया, वहीं संसदीय कार्य मंत्री ने तीखे शब्दों में जवाब दिया। इस पूरी बहस ने स्पष्ट कर दिया कि सदन में आचार-व्यवहार और भाषा का चयन कितना महत्वपूर्ण है। नेता प्रतिपक्ष और कैबिनेट मंत्री दोनों ने भी सदस्यों को सदन की मर्यादा बनाए रखने की हिदायत दी और कहा कि जनता सब देख रही है आप क्या कहेंगे जरूर बताएगा मानीय की इस तु तड़ाकवाली भाषा।