उत्तराखंड की सियासत में एक बयान ने माहौल गरमा दिया बीच सड़क, कैमरों के सामने और सीधे पुलिस अफसर से—नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का गुस्सा साफ झलकता दिखा..आँख नीचे रखकर बात कीजिए। ये शब्द सिर्फ चेतावनी नहीं थे, बल्कि सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल थे। डंपरों से कुचलकर आठ दिन में पाँच लोगों की मौत,और फिर भी कार्रवाई पर सवाल— यही वजह है कि नेता प्रतिपक्ष ने कहा,सत्ता आती-जाती रहती है, अपना काम ईमानदारी से कीजिए।”आखिर किस लापरवाही ने यशपाल आर्य को इतना आक्रोशित कर दिया,और क्यों इस बयान से मच गया पूरा सियासी हड़कंप पूरी खबर मेरी इस रिपोर्ट में। गुस्सा भी है सवाल भी है और शायद सियायत भी आप थोड़ी बहुत कह सकते है। दोस्तो ये तस्वीर काशीपुर में सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के बाद की है। जहां क्षेत्र में हालात तनाव बने हैं. गुस्साए लोग मृतक के शव को लेकर सड़क में बैठ गए। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष ने भी मौके पर पहुंचकर लोगों को अपना समर्थन दिया हालांकि पुलिस के आश्वासन के बाद लोग सड़क से उठ गए. बाद में नेता प्रतिपक्ष ने परिजनों से मुलाकात की लेकिन उससे पहले सड़क पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य पुलिस को चेतावनी दे ते दिखिई दिए।
दोस्तो उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर में खनन वाहनों की बेलगाम रफ्तार ने एक बार फिर एक परिवार की खुशियां उजाड़ दी। कुंडेश्वरी चौकी क्षेत्र अंतर्गत ढकिया नंबर एक में दर्दनाक सड़क हादसे के बाद हालात पूरे दिन तनावपूर्ण बने रहे. पोस्टमार्टम कर शव परिजनों के सुपुर्द किया गया तो परिजन समेत गुस्साए लोगों ने शव को सड़क पर रखकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी जैसे ही घटना की जानकारी पुलिस को लगी वैसे ही पुलिस फोर्स भी मौके पर पहुंच गई। आक्रोशित लोगों को पुलिस ने समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। देर शाम नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य भी मौके पर पहुंचे और लोगों के साथ धरने पर बैठे। इस दौरान उन्होंने प्रशासन को जमकर खरी खोटी सुनाई। दोस्तो कई घंटों के हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस द्वारा ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन के बाद धरना समाप्त किया गया। जिसके बाद नेता विपक्ष ने मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढाढस बंधाया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले सात दिनों में पांच मौत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आए दिन ओवरलोडिंग खनन वाहनों से लोगों की मौत हो रही है, प्रशासन मौन बैठा है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की शह में खनन का कारोबार फल फूल रहा है। सुबह से लोग यहां पर बैठे हैं, लेकिन शासन प्रशासन का कोई एक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, संवेदनशीलता मर चुकी है उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा ऐसे अधिकारियों को सूचीबद्ध किया गया है।
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है लेकिन उसी देवभूमि को कलंकित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब पहली मौत हुई तब ही अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए थी। सुबह 8 बजे से रात्रि के 8 बजे तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे प्रतीत होता है कि अफसर शाही बेलगाम हो चुकी है, कहीं न कहीं माफियाओं से गठजोड़ इसका राज होगा। उन्होंने कहा कि बदलाव होगा, ऐसे अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। गौरतलब है कि बीते दिन खनन सामग्री से लदे एक ट्रक ने बाइक सवार एक व्यक्ति को पीछे से टक्कर मार दी थी। जिस कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। गुस्साए लोगों ने ट्रक को आग के हवाले कर दिया था। पुलिस ने जैसे तैसे मामले को शांत किया। देर शाम एक बार फिर बवाल शुरू हो गया था तो दोस्तों, काशीपुर की ये घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और प्रशासनिक संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल बनकर सामने आई है। खनन वाहनों की बेलगाम रफ्तार ने एक और जान ले ली, और उसके बाद घंटों तक लोग सड़क पर इंसाफ की गुहार लगाते रहे।नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का सख्त तेवर, पुलिस को दी गई चेतावनी और प्रशासन पर लगाए गए गंभीर आरोप इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जनता का सब्र अब जवाब देने लगा है।पांच मौतें, कई चेतावनियाँ और फिर भी कार्रवाई में देरी—यही वजह है कि आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा।अब बड़ा सवाल यही है कि क्या खनन माफियाओं पर सच में नकेल कसी जाएगी?क्या प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाएगा या फिर ऐसे हादसे यूँ ही दोहराए जाते रहेंगे?