उत्तराखंड विधानसभा के पूर्व सचिव मुकेश सिंघल की मुश्किल बढ़ने वाली है। बताया जा रहा है कि पूर्व सचिव विधानसभा के खिलाफ अब विजिलेंस जांच करेगी। शासन ने इसकी अनुमति दे दी है। सिंघल पर आरोप है कि उन्होंने विधानसभा में 32 पदों पर भर्ती परीक्षा के लिए विवादित एजेंसी आरएम टेक्नो साल्यूशंस का चयन किया। परीक्षा कराने के बाद एजेंसी को बिल प्राप्त होने के दो दिन के भीतर 59 लाख का भुगतान कर दिया। राज्य स्तरीय सतर्कता समिति ने पूर्व विधानसभा सचिव के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जांच की अनुमति दी है। वहीं दूसरी ओर वह एक ओर मामले में घिरे हुए है। बताया जा रहा है की राज्य गठन के बाद से अब तक सचिवालय में कुल 396 नियुक्तियां ऐसी की गई हैं जिनके लिए कोई विज्ञप्ति जारी नहीं की गई।
सचिव विधान सभा मुकेश सिंघल की नियुक्ति भी नियम विरुद्ध की गई है। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से गठित तीन सदस्यीय कमेटी की जांच में सभी नियुक्तियों के साथ सचिव की नियुक्ति को भी नियम विरुद्ध बताया गया। जिसके बाद 2016 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को हटा दिया गया। विधानसभा के पूर्व सचिव मुकेश सिंघल की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। बैकडोर भर्ती मामले में विशेष जांच समिति ने उनकी भूमिका पर सवाल उठाए थे। समिति की रिपोर्ट के आधार पर स्पीकर ने उन्हें विस सचिव पद से निलंबित कर दिया था। इसी मामले में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया। बाद में उन्हें पदावनत (डिमोट) कर संयुक्त सचिव बना दिया गया। अब सिंघल विजलेंस जांच के घेरे में आ गए हैं।