Save Joshimath: दरारों का दर्द लेकर राजधानी देहरादून मार्च करेंगे युवा, पैदल नापेंगे 300 किलोमीटर

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Joshimath Crisis: धंसते जोशीमठ को बचाने के लिए जद्दोजहद जारी है। जोशीमठ में पड़ रही दरारों के दर्द को लेकर नगर के युवाओं ने दून तक जोश और उत्साह के साथ पदयात्रा बुधवार को शुरू की है। स्थानीय लोगों ने युवाओं को फूल मालाएं पहनाईं और नारेबाजी करते हुए उन्हें विदा किया। देहरादून तक पैदल मार्च कर रहे सचिन रावत और आयुष डिमरी कहते हैं कि वह अपनी इस 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा को लगभग 12 दिनों में तय करेंगे। 1 दिन में लगभग 25 से 30 किलोमीटर तक की दूरी तय करके इस यात्रा को अंजाम देंगे। आयुष और सचिन कहते हैं कि खिसकते जोशीमठ को देख उनका मन बड़ा ही दुखी है और उन्होंने इसलिए जोशीमठ से राजधानी तक पैदल मार्च करके सुरक्षित जोशीमठ के साथ-साथ सुरक्षित उत्तराखंड का संदेश देने का निश्चय किया है।

स्थानीय लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाते हुए उनकी इस पहल की सराहना की। फूल मालाएं पहनाकर और तहसील से नगर के विभिन्न मार्गों तक जुलूस निकालते हुए नारेबाजी की और मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं देते हुए उन्हें विदा किया। युवाओं ने अपनी इस यात्रा के संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा है। इन दोनों ही युवाओं के रास्ते भर में रहने और खाने इत्यादि की व्यवस्था जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति की ओर से की जाएगी। समिति की ओर से इन युवाओं के प्रत्येक पड़ाव पर इनके विश्राम की व्यवस्था तथा भोजन इत्यादि की व्यवस्था का प्रबंध किया जाना है। बता दे, जोशीमठ को बचाने के लिए जिससे जो बन पड़ रहा है, वो शख्स वो काम कर रहा है। स्थानीय लोग चाहते है कि उनकी समस्याओं का जल्दी से समाधान हो।