Uttarakhand के पहाड़ में तनाव, फोर्स उतारनी पुड़ी!| kotdwar | Dehradun News | Uttarakhand News

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कोटद्वार से इस वक्त बड़ी खबर सामने आ रही है पटेल नगर में एक कपड़े की दुकान का नाम ‘बाबा’ क्या रखा गया, शहर में विवाद भड़क उठा। मामला इतना बढ़ा कि देहरादून और ऋषिकेश से बजरंग दल के कार्यकर्ता कोटद्वार पहुँच गए। शहर की सड़कों पर नारेबाज़ी हुई, झुलूस निकाला गया और विरोध ने उग्र रूप ले लिया। दुकान के नाम को लेकर शुरू हुआ ये विवाद अबकानून-व्यवस्था का सवाल बन गया है,हालात को संभालने के लिए पुलिस को मौके पर उतरना पड़ा और कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। दोस्तो पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में एक कपड़े की दुकान का नाम अब सिर्फ नाम नहीं रहा, बल्कि वह विवाद और तनाव की वजह बन गया है। पटेल नगर स्थित एक कपड़ा दुकान का नाम ‘बाबा’ रखे जाने को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब सड़कों तक आ पहुंचा है। सवाल यह है कि क्या किसी दुकान का नाम रखना इतना बड़ा मुद्दा बन सकता है कि शहर का माहौल बिगड़ जाए? दोस्तो ये तस्वीर तब की है जब बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं ने दुकान के नाम पर आपत्ति जताई, तो दीपक कुमार ने बीच-बचाव करते हुए उनका विरोध किया। यही विरोध बाद में विवाद की जड़ बन गया।

इसके बाद देहरादून और ऋषिकेश से बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता दीपक कुमार को चुनौती देने के लिए कोटद्वार पहुंच गए। क्या बाहरी जिलों से लोगों का इस तरह पहुंचना स्थिति को और भड़काने वाला नहीं था? पटेल मार्ग स्थित इस कपड़ों की दुकान के नाम को लेकर खड़ा हुआ विवाद धीरे-धीरे तूल पकड़ता चला गया। आरोप है कि इस दौरान कुछ युवकों द्वारा बजरंग दल कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी की गई, जिसके विरोध में संगठन के कार्यकर्ता आक्रोशित हो उठे। इसी आक्रोश के चलते मालवीय उद्यान में जमकर हंगामा हुआ। सवाल उठता है कि क्या विरोध का यह तरीका सही था? दोस्त सके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शहर में झुलूस निकाला और फिर विरोध करने वाले युवक के जिम के बाहर प्रदर्शन किया। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को कार्यकर्ताओं को वहां से हटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। क्या प्रशासन पहले ही स्थिति को संभाल सकता था? और क्या इस पूरे विवाद में संवाद की कोई गुंजाइश नहीं थी? फिलहाल पुलिस हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन कोटद्वार में तनाव का माहौल बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एक नाम के विवाद से उपजा यह टकराव आगे और बढ़ेगा या समय रहते समझदारी से समाधान निकाला जाएगा? शहर की शांति अब इसी जवाब पर टिकी है। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद के कोटद्वार में एक दुकान के नाम को लेकर जमकर हंगामा हुआ।

मामला एक नाम को लेकर शुरू हुआ, लेकिन कुछ ही देर में हालात तनावपूर्ण हो गए। इस नोंक-झोंक की वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रही है। इसमें देखा जा सकता है कि कुछ हिंदूवादी संगठन के लोग कोटद्वार के पटेल मार्ग स्थित एक कपड़े की दुकान का नाम बाबा रखे जाने पर नाराजगी जताते हुए दिखाई दे रहे हैं। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने कड़ा एक्शन लेने की बात कही है। एक बार फिर बात पर गौर कीजिए कि क्या है पूरा मामला?दोस्तो कोटद्वार में एक दुकान का नाम बाबा रखे जाने का विरोध बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने किया। विरोध प्रदर्शन करते हुए बजरंग दल के कार्यकर्ता दुकान तक पहुंच गए। उन्होंने बाबा नाम बदलने को कहा। इसी दौरान दुकान के बगल में जिम चलाने वाले एक व्यक्ति ने हिंदू संगठनों के हंगामा का विरोध कर दिया। उसने विरोध कर रहे लोगों को वहां से हटाया। भले ही दुकान को लेकर यह विवाद शांत हो गया हो लेकिन सोशल मीडिया में अभी यह वीडियो छाया हुआ है। कोटद्वार के पटेल मार्ग में समुदाय विशेष के शोएब अहमद नाम के व्यक्ति ने कपड़ों की दुकान खोली है। बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर के नाम से चल रही इस दुकान का विरोध करते हुए कुछ बजरंग दल के कार्यकर्ता नाराजगी जताते हुए दुकान पर पहुंच गए। वहां मौजूद समुदाय विशेष के बुजुर्ग व्यक्ति से दुकान का नाम बदलने की बात कहने लगे।

दुकानदार का कहना था कि उनकी दुकान पिछले 30 सालों से इसी नाम से चल रही है। बजरंग दल के कार्यकर्ता जब दुकानदार से बात कर रहे थे, इसी दौरान वहां जिम में काम करने वाला दीपक नाम का व्यक्ति आ गया। दीपकने बजरंग दल के लोगों का विरोध कर दिया। जब लोगों ने उसका नाम पूछा तो उस व्यक्ति ने अपना नाम मोहम्मद दीपक बताया। उसने कहा कि बाबा नाम रख लेने से क्या हो गया? इस पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह हमारे सिद्ध बाबा का नाम है। इस पर दीपक ने कहा कि इतनी सारी दुकानों पर बाबा का नाम लिखा है। इस पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कहा कि वह सब हिंदू हैं। यह दुकान समुदाय विशेष के व्यक्ति की है,तो कुल मिलाकर,कोटद्वार में एक कपड़े की दुकान के नाम से शुरू हुआ यह विवाद अब शांति और कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती बन चुका है।प्रदर्शन, झुलूस और हंगामे के बाद फिलहाल हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।अब बड़ा सवाल यही है किक्या प्रशासन सख्ती और संवाद के जरिए स्थिति को शांत कर पाएगा?क्या शहर में दोबारा अमन-चैन लौटेगा, या यह विवाद और गहराएगा?फिलहाल पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर हैं और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।