Tharali 32 करोड़ की योजना खुली पोल! | Nanda Devi Rajjat | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो उत्तराखंड के नंदा देवी राजजात मार्ग से जुड़ी खबर ने राज्य की जनता को हिला कर रख दिया है। 32 करोड़ रुपये की बनी सड़क, जो सबसे पहले बारिश में ही टूटने की खबरों के साथ सामने आई, सवाल खड़े कर रही है – आखिर इस प्रोजेक्ट में क्या गड़बड़ी हुई?इधर जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले पर मोर्चा खोल दिया है और सड़क निर्माण में कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग की है क्या यह महज निर्माण में कमी है या कहीं भारी भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है? अपनी इस रिपोर्ट के जरिए मै आपको दिखाउंगा कैसे भ्रष्टाचार के इस बड़े खेल पर कैसे जनता, अधिकारी और विधायक इस गंभीर मुद्दे को लेकर सड़कों से लेकर हॉल तक हंगामा कर रहे हैं। दोस्तो ये खबर थराली से हैं। जी हां वहीं जो थराली आपदा में बर्बादी की मिशाल बनी। वहीं विश्व प्रसिद्ध नंदा देवी राजजात यात्रा की लाइफलाइन कही जाने वाली ‘थराली-देवाल-वाण’ की ये सड़क जिसे आप देख रहे हैं। दोस्तो इस सड़क के डामरीकरण और सुधारीकरण काम में भारी अनियमितता के आरोप लग रहे हैं लगभग ₹32.69 करोड़ की भारी-भरकम राशि से बन रही यह सड़क शुरू होने से पहले ही धंसने लगी है और इस बात की तस्दीक कर रही हैं ये तस्वीरें जहां मिट्टी के ढेर पर खड़ी कर दी दीवारें हैं।

दोस्तो बंदरढौन समेत कई स्थानों पर निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब है कि मिट्टी के ढेरों पर ही वायरक्रेट और दीवारें खड़ी कर दी गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भूस्खलन जोन में किया गया यह काम आने वाली यात्रा के दौरान किसी बड़े हादसे को दावत दे सकता है तो उधर इस मामले में जनता तो जनता सवाल कर ही रही है। अब नेताओं ने उठा दिए तीखे सवाल। ब्लॉक प्रमुख प्रवीण पुरोहित की जुबानी आप सुनेगे तो आप को असल गड़बड़ी और आगामी खतरे को जान पाएंगे क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर विभाग और मुख्य ठेकेदार पर कमीशनखोरी और लीपापोती का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि काम को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने से गुणवत्ता पूरी तरह खत्म हो गई है। कितनी बड़ी चुनौती राजजात यात्रा को लेकर ये सिस्टम पैदा कर रहा है। आप यहां तक और ये बयान सुनकर ये जान गए होगें की खेल कुछ ना कुछ तो हुआ इसलिए गुमवत्ता विहीन काम कर सीर्फ खाना पूर्ती की जा रही है। पूर्व विधायक डॉ. जीतराम: उन्होंने कहा कि बड़े ठेकेदारों के बजाय अगर स्थानीय लोगों को छोटे टेंडर मिलते, तो रोजगार भी मिलता और काम भी बेहतर होता। इसके अलावा सरकार की योजनाओं पर भी वो सवाल उठा रहे हैं। इसके साथ ही टेंडर के खेल को भी बहुत बखूबी तरीके से बता रहे हैं साथ ही पूर्व विधायक ने पैसे के बंदर बांट का आरोप लगा दिया। इसके अलावा कुछ जनप्रतिनीधी चेतावनी दे रहे हैं कि राजजात जैसी महत्वपूर्ण यात्रा के पैसे का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा अगर सुधार नहीं हुआ, तो जनप्रतिनिधि आंदोलन करेंगे। इसके अलावा दोस्तो एक बड़ा सवाल इस बात का भी है कि क्या सिस्टम की इस हीलाहवाली से राजजात यात्रा पर संकट? मंडराएगा क्योंकि दोस्तो स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अभी यह हाल है, तो यात्रा के दौरान भारी वाहनों और श्रद्धालुओं के दबाव में यह मार्ग ताश के पत्तों की तरह ढह सकता है।

इस बात की ओर ध्यान देने की जरूरत शासन-प्रशासन को है कि निर्माण कार्य मानकों को पूरा कर रहा है यहां एक महत्वपूर्ण सड़क निर्माण में क्या टेंडर परिक्रिया में खेल हुआ क्या ठेकेदार मानको को दरकिनार कर इस सड़क का निर्माण किया जा रहा है। ऐसे में दोस्तो सवाल ये भी है कि क्या करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सड़कों का यही हश्र होगा? क्या ठेकेदारों की जेब भरने के लिए यात्रियों की जान जोखिम में डाली जा रही है? दोस्तो ये सवाल इसलिए क्योंकि विश्व प्रसिद्ध नंदा देवी राजजात यात्रा की लाइफलाइन मानी जाने वाली थराली–देवाल–वाण सड़क बड़ी महत्वपू्ण मानी जाती है और इसी को लेक कैसे गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अगर सड़क पहली ही बारिश या हल्के दबाव में धंसने लगे, तो ये सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि आने वाले समय के लिए खतरे की घंटी है। दोस्तो जनप्रतिनिधियों ने कमीशनखोरी, टेंडर प्रक्रिया और घटिया निर्माण के आरोप लगाए हैं। स्थानीय लोगों को डर है कि यात्रा के दौरान भारी भीड़ और वाहनों का दबाव इस मार्ग को असुरक्षित बना सकता है। सवाल सीधा है—क्या आस्था के इस महापर्व के नाम पर गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है? अब निगाहें शासन-प्रशासन पर हैं। क्या समय रहते निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच होगी? क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? और सबसे अहम—क्या राजजात यात्रा से पहले इस सड़क को सुरक्षित और मानकों के अनुरूप बनाया जाएगा? क्योंकि यह सिर्फ एक सड़क का मामला नही लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आस्था से जुड़ा प्रश्न है।