अंकिता को लेकर छलका महिलाओँ का दर्द! | Ankita Bhandari Case | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो उत्तराखंड में एक बेटी को इंसाफ के लिए महिलाओं ने संभाली है कमान और छलक रहा है महिलाओँ का दर्द। Ankita Bhandari Case Uttarakhand पूरे उत्तराखंड में महिलाओं ने छेड़ी एक ऐसी जंग, इसका अंजाम बीजेपी वालों को भी नही आ रहा समझ और तो और अब तो बीजेपी नेताओँ ने ही खोल दिया है पार्टी के खिलाफ मोर्चा कह दिया थू है ऐसी बीजेपी पर, अब इस जनआक्रोश से कैसे निपटेगी बीजेपी। क्या सरकार लेगी अंकिता मामले में सीबीआई जांच का फैसला बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो अब कुछ दलों की मात नहीं हो रही कुछ महिलाओं की बात नहीं हो रही। देहरादून में उमड़े जनसैलाब ने ये बता दिया कि उत्तराखंड की बेटी को इंसाफ की मांग को लेकर किसी बैनर की जरूरत नहीं किसी के आह्वान की जरूरत नहीं ये एक आंदोलन जो चल पड़ा है हर कोई उससे जुड़ते जा रहा है। दोस्तो जहां बीजेपी की महिला नेता ने बीजेपी को थू थू वाली पार्टी करार दिया है, तो वहीं देहरादून में उमड़ि महिलाओं की भीड़ में एक नहीं सैकड़ों वो महिलाएं शामिल थी जो अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर जा पहुंच चुकी हैं, चलने में दिक्कत लेकिन लाठी लेकर देहारदून में प्रचंड ठंड में हुकार भरती नजर आई अब तो तमाम लोक गायाक लोक कलाकार भी अंकिता के मामले में इंसाफ की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं।

दोस्तो कैसे अंकिता को न्याय को लेकर बुलंद आवाज ने बीजेपी के तमाम छोटे बड़े नेताओं की नींध उड़ाने का काम किया है ये तो सबने देखा, लेकिन इसी कड़ी में जब बीजेपी नेताओँ ने मोर्चा खोला। माहौला और तनावपूर्ण दिखाई देने लगा है वो इस लिए क्योंकि बीजेपी के नेताओं ने मोर्चा खोला, और वहीं महिलाओं ने अपने दर्द और आक्रोश को खुलकर व्यक्त किया। नेताओं के खिलाफ नाराज़गी जताते हुए महिलाओं ने कहा—‘थू है ऐसी BJP पर यह सिर्फ नाराज़गी नहीं, बल्कि वर्षों से दबे हुए सवालों और न्याय की पुकार का इजहार है। कैसे महिलाओं का दर्द और जनता का गुस्सा एक साथ सड़कों पर उमड़ रहा है,और कैसे यह आंदोलन पूरे राज्य में न्याय की मांग को मजबूती दे रहा है ये साफ दिखाई दे रहा है। मै आपको एक पीड़ा दिखा रहा हूं देखिए और इसे समझने की कोशिश कीजिएगा। दोस्तो ये दर्द ये तस्वीर देहरादून में हुए प्रदर्शन के दौरान सामने आई हैं ये महिला कोई और नहीं बल्की बीजेपी मंडल अध्यक्ष हैं और ये उनका दर्द है छलक है। दोस्तो वो कहती है कि “ ऐसी भाजपा पर कीड़े पड़ें। इन्होंने हमारे पहाड़ की 19 साल की बेटी को मार दिया। ये दरिंदे पहाड़ों में रिज़ॉर्ट खोलकर हमारी बेटियों से सर्विस मांग रहे हैं। “थू है ऐसी BJP पर. अंकिता भंडारी को इंसाफ मिलना चाहिए, कीड़े पड़े ऐसी BJP पर, ये शब्द किसी और के नही बीजेपी की एक मंडल अध्यक्ष के है, और मुझे लगता है कि लगभग उत्तराखंड के हर एक नागरिक के दिल में अंकित भंडारी मामले में बीजेपी नेताओं की संलिप्तता के चलते आक्रोश का गुबार है अंकिता को न्याय मिलना चाहिए, क्योंकि ये लड़ाई राजनैतिक नही, बेटियों के लिए है। इस बात को देहरादून में एक वयोवृद्ध महिला भी बोती दिखाई दी। चेहरे पर झुरियां हो तमाम हाथ में लाठी का सहारा हो लेकिन जुबा सिर्फ एक बात बोल रही है कि अंकिता को न्याय मिलना चाहिए।

दोस्तो देहरादून की सड़कों पर उतरी ये वयोवृद्ध महिला सिर्फ़ एक प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि उत्तराखंड की मूल आत्मा की आवाज़ है। उनके शब्दों में दर्द भी है, आक्रोश भी और न्याय की पुकार भी अंकिता भंडारी मर्डर केस की CBI जांच की मांग को लेकर उमड़े जनसैलाब में इस बूढ़ी माँ की मौजूदगी बताती है कि यह सिर्फ़ एक मामला नहीं रहा —यह जन आंदोलन बन चुका है। कहती हैं कि, मैं अंकिता भंडारी और उसकी मां का दर्द समझ सकती हूं कि एक मां का दर्द क्या होता है। दोस्तो जो प्रदर्शन के जरिए आवाज उठा पा रहा है वो उठ रही है, लेकिन कई लोग ऐसे हैं जो इन धरना प्रदर्शन से दिखाई देते हैं लेकिन उनकी भी वो ही मांग है जो आंदोलनकारि महिलाओं की है। दोस्तो लोक गायिका रेशमा शाह ने उत्तराखंड की बेटे अंकिता भंडारी के लिए न्याय की आवाज उठाते हुए कहा कि जो उसके साथ इतना बड़ा अत्याचार हुआ। उसकी हत्या की गई थी और मैं यह कहना चाहती हूं जो इस हत्या में शामिल है और जिनकी साजिश थी उनको कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए और सीबीआई जांच होनी चाहिए। मैं एक मां की, मेरी भी, मैं एक मां हूं और मेरी भी एक बेटी है। दोस्तो वो कहती हैं कि मैं अंकिता भंडारी और उसकी मां का दर्द समझ सकती हूं कि एक मां का दर्द क्या होता है। जिस मां के बेटी के साथ इतना बड़ा अन्याय हुआ, इतना बड़ा अत्याचार हुआ। मैं यही कहना चाहूंगी कि सीबीआई जांच हो और अंकिता भंडारी के जो, जिन्होंने उसकी हत्या की है और उनके जो साथ, जिनकी साजिश थी उनको कड़ी से कड़ी सजा मिले और मैं मेरा परिवार सदा आपके साथ है और समस्त जनता से मैं यही कहना चाहूंगी कि अंकिता भंडारी को न्याय मिले।

दोस्तों, देहरादून की सड़कों पर हमने देखा कि यह सिर्फ प्रदर्शन नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा और न्याय की पुकार है जहाँ कुछ लोग नेताओं के मोर्चा खोलने से माहौल तनावपूर्ण दिखाने की कोशिश कर रहे थे, वहीं महिलाओं का गुस्सा और पीड़ा इतनी जोर से सामने आई कि हर किसी के कानों में गूंज गई। वयोवृद्ध महिलाएं, जिनके कदम धीमे हैं और जिनका शरीर ठंड और उम्र की मार झेल रहा है, उन्होंने भी लाठी के सहारे न्याय की आवाज़ बुलंद की बीजेपी की मंडल अध्यक्ष से लेकर लोक गायिका रेशमा शाह तक—हर किसी ने साफ शब्दों में कहा, अंकिता भंडारी को न्याय चाहिए, और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। यह आंदोलन अब केवल राजनीतिक नहीं रहा, यह हर मां, हर बेटी और पूरे उत्तराखंड की लड़ाई बन चुका है।जनता का गुस्सा, महिलाओं की आवाज़ और हर संवेदनशील नागरिक की पुकार यह साफ दिखा रही है कि अंकिता को न्याय मिलेगा, चाहे इसके लिए कितनी भी ठंडी, कितनी भी लंबी सड़क क्यों न तय करनी पड़े। इससे साफ है कि न्याय की यह मांग सड़कों से संसद तक, पहाड़ों से शहरों तक गूंज रही है, और सरकार अब नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ सुनना ही मजबूरी है।