गुलदार को लेकर आई चौंकाने वाली सबसे बड़ी रिपोर्ट, देखिए..उत्तराखंड के किस जिले में क्या है हाल ?

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गुलदार को लेकर एक हैरान कर देने वाली रिपोर्ट सामने आई है…जलवायु परिवर्तन के बाद से हालात बदलते जा रहे हैं…दिन प्रतिदिन कुछ न कुछ नया मिलता रहता है…ऐसे की एक चौकाने वाली रिपोर्ट गुलदार को लेकर आई है..जो हैरान और परेशान करने वाली है…गुलदार के हमले में किसी का बच पाना बहुत आसान नहीं होता…गुलदार अपने शिकार को बड़े ही चालाकी से अपने आगोश में लेते हैं….उत्ताराखंड की बात करें तो गुलदार का आंकड़ा यहां ज्यादा है..ऐसे में गुलदार के हमले की खबरें भी आती रहती हैं…लेकिन आज कल गुलदारों को आबादी वाले इलाके क्यों पसंद आ रहे हैं…इसकी चिंता लंबे समय से थी..लेकिन आखिरकार वो रिपोर्ट आ ही गई जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी…गुलदार का अटैक और गुलदार की नीयत क्या है..कैसे गुलदार आपकी आंगन तक पहुंच जाता है…आज हम अपनी रिपोर्ट में गुलदार को लेकर बड़ा खुलासा करने जा रहे हैं…गुलदार को लेकर हम एक एक सारी रिपोर्ट का खुलासा करेंगे..जिस रिपोर्ट ने वन विभाग ही नहीं..बल्कि जन जन की नींद उड़ा चुकी है…क्या है गुलदार को लेकर आई रिपोर्ट..अगले एक मिनट तक आप हमारे साथ बने रहिए..हम खुलासा करेंगे कि..गुलदार आपकी आंगन तक कैसे पहुंच गया है….

71 प्रतिशत से ज्यादा वन क्षेत्र वाले उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में पिछले कुछ समय में गुलदार की दहशत बढ़ गई है….गुलदार घात लगाकर महिलाओं, बच्चों या पालतू पशुओं को अपना शिकार बना रहा है….अब तो स्थिति यह है कि गुलदार घर में घुस कर बच्चों को उठा रहा है….इसके कारण ग्रामीण इलाके में बच्चे कई-कई दिन स्कूल नहीं जा पाते…कई गांव सिर्फ इसलिए खाली हो गए कि वहां रहने वाले लोग अब गुलदार का निवाला नहीं बनना चाहते….खाना-पानी की तलाश इन्हें जंगल से बाहर रिहायशी इलाकों में गुलदारों का पहुंचना जारी है…विभाग के आंकड़े कहते हैं कि..उत्तराखंड में 3 हजार से ज्यादा गुलदार हैं…लेकिन जानकार कहते हैं कि…ये संख्या और ज्यादा हो चुकी है…लेकुिन धीरे धीरे साल बितता गया तो गुलदार की दहशत भी बढ़ती गई है….उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष में इस साल अब तक 40 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं…इनमें से 13 लोगों की जान गुलदार ने ली है….मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की वजह से दोनों का ही नुकसान हो रहा है….इस दौरान 82 गुलदार भी मारे गए हैं…वन महकमा और विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हैं…साल 2000 से अब तक गुलदार के हमले में 514 लोगों की जान गई है….जबकि 1868 लोग घायल हुए हैं…वही साल 2000 से अब तक 1741 गुलदारों की मौत रिकॉर्ड में दर्ज है….

गुलदार आबादी की ओऱ जाता है तो सबसे पहले इंसान शिकार नहीं होते हैं..बल्कि कुत्ते पहले निवाले होते हैं…लेकिन बारिश के सीजन में कुत्ते छिपे रहते हैं..तो मानसून सीजन में गुलदार कुत्तों का शिकार नहीं कर पाता.,.ऐसे में वो इंसान पर ही हमला कर देता है…ज्यादा तक मामलों में बच्चे और महिलाएं ही हैं..जो गुलदार के निशाने पर आ जाती हैं…आंकड़ों के मुताबिक रुद्रप्रयाग में आठ साल में सात लोगों की जान गई है…हरिद्वार में एक सप्ताह में तीन लोगों पर हमला कर चुका है गुलदार..कोटद्वार में तो हाल ये है कि…यहां तो गुलदार बाइक का पीछा करते हैं…ऐसे गुलदार के कई मामले आ चुके हैं..जो चर्चा में रहते हैं…क्योंकि पिछले कुछ सालों में जिस तरह से गुलदार के हमले बढ़े हैं…वो चिंता में जरुर डालेंगे..क्योंकि ऐसे हमले हफ्ते में एक बार तो सुनने में आ ही जाते हैं…