जी हां दोस्तो उसने अपराध की दुनिया से निकलकर उसने खड़ा किया हजार करोड़ का साम्राज्य, जमीन-पत्थर और बड़े कारोबारी सौदे उसके राज का हिस्सा बने लेकिन सफलता के साथ आया खौफनाक अंत, जिसने सभी को हिला कर रख दिया। Dehradun Vikram Sharma Murder Case कैसे अपराध से दूर रहते हुए बना ये साम्राज्य और आखिरकार दम तोड़ना ऐसे जैसे कुछ था ही नहीं पूरी खबर मेरी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो वैसे आप कहेंगे कि मै बात किसकी कर रहा हूं। दरसल मैं बात कर रहा हूं उसका जिसको राजधानी में गोलियों से भून दिया गया विक्रम शर्मा की दोस्तो विक्रम शर्मा एक गैंगस्टर था। क्या विक्रम शार्मा कोई कारोबारी थे कौन थे विक्रम शर्मा सब ये जनाना चाहते हैं। ये सवाल इसलिए है क्योंकि आप देख रहे हैं तमाम सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पर विक्रम की हत्या के बाद कई वीडियो उनके चर्चा में हैं, लेकिन मै आपको बताने जा रहा हूं देहरादून में जिम की सीड़ियों में दम तोड़ने वाले विक्रम शर्मा का सबसे बड़ा सच आप सुनेंगे तो दंग रह जाएंगे। दोस्तो देहरादून के व्यस्त इलाके में स्थित सिल्वर सिटी मॉल में शुक्रवार सुबह को हुई गोलीबारी ने देहरादून से लेकर जमशेदपुर शहर तक को हिला कर रख दिया है। दिनदहाड़े जिस व्यक्ति की हत्या की गई, उसका नाम सामने आते ही उसका आपराधिक अतीत, बहु-राज्यीय नेटवर्क और सालों पुराना रिकॉर्ड फिर सुर्खियों में आ गया। मृतक की पहचान विक्रम शर्मा के रूप में हुई है। विक्रम शर्मा, एक ऐसा नाम जो कभी झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर में प्रभाव, सुरक्षा घेरे और आपराधिक मामलों की चर्चाओं के कारण जाना जाता था।
वही विक्रम शर्मा, जिसका जन्म देहरादून में हुआ था. उसने जमशेदपुर शहर को अपना ठिकाना बनाया। 19 अप्रैल 2017 को उसे रांची पुलिस ने देहरादून से गिरफ्तार किया था। किस्मत देखिये, वर्षों बाद उसी देहरादून शहर में उसकी हत्या कर दीगई। उसी शहर में वह खाक में मिल गया, जहां से उसकी कहानी शुरू हुई थी। विक्रमशर्मा पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखता था और उसका बचपन देहरादून में बीता। जब वह 18-19 साल का हुआ तो वह झारखंड के औद्योगिक इलाका जमशेदपुर पहुंचा। कुछ ही दिनों में वह जमशेदपुर में सक्रिय हो गया रंगदारी, हत्या जैसी कई घटनाओं में विक्रम शर्मा का नाम जुड़ा। लंबे समय तक संगठित आपराधिक नेटवर्क की गतिविधियों से जूझता भी रहा। इसी माहौल में विक्रम शर्मा का नाम स्थानीय स्तर पर रंगदारी, दबाव और आपराधिक मामलों से जुड़ने लगा। विक्रम शर्मा अपराध की दुनिया में जमशेदपुर में सक्रिय गैंगस्टर अखिलेश सिंह का दाहिना हाथ रहा। लोग उसे अखिलेश सिंह का वह सबसे करीबी सहयोगी और ‘ गुरु’ तक बताते रहे हैं। उसके खिलाफ 50 से अधिक आपराधिक मामलों की चर्चा विभिन्न रिपोर्टों में सामने आती रही है, हालांकि इन मामलों की वर्तमान कानूनी स्थिति की जांच एजेंसिजें यां अलग-अलग स्तर पर करती रही हैं, लेकिन यह तथ्य कि उसका नाम लंबे समय तक पुलिस रिकॉर्ड में रहा, उसकी छवि को प्रभावित करता रहा।
19 अप्रैल 2017 को रांची पुलिस ने उसे देहरादून से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसका नाम कुछ समय तक सुर्खियों से दूर रहा, लेकिन पूरी तरह गायब नहीं हुआ हाल के वर्षों में वह देहरादून में रहकर कारोबारी गतिविधियों से जुड़ा रहा. स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जाता रहा कि उसने खुद को सीधे आपराधिक गतिविधियों से दूर रखने की कोशिश की, लेकिन पुराने नेटवर्क और रंजिशें अक्सर लंबे समय तक पीछा नहीं छोड़ती है अक्सर, यह मौत तक पहुंच कर ही खत्म होती है। विक्रम शर्मा के आर्थिक नेटवर्क को लेकर लंबे समय से तरह- तरह की बातें होती रही हैं। सूत्रों का दावा है कि उसका कारोबार कई राज्यों तक फैला था और संपत्ति का आंकड़ा सैकड़ों करोड़ रुपये से अधिक बताया जाता रहा है। कुछ हलकों में यह आंकड़ा एक हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है। जमीन, निवेश, साझेदारी और अन्य कारोबारी गतिविधियों में उसकी हिस्सेदारी होने की बातें सामने आती रही हैं। जांच एजेंसिजें यां अब उसके वित्तीय लेन-देन और संभावित कारोबारी विवादों की भी जांच कर रही हैं। झारखंड में सक्रिय रहने के दौरान उसकी आवाजाही अक्सरॉ निजी सुरक्षा कर्मियों और कई वाहनों के काफिले के साथ होती थी। स्थानीय लोगों के बीच यह उसकी ताकत और रसूख का प्रतीक माना जाता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था दो पहलुओं को दर्शाती है- एक, संभावित खतरे का आकलन और दूसरा प्रभाव का सार्वजनिक प्रदर्शन। दोनों ही स्थितियां यह संकेत देती हैं कि उसका जीवन सामान्य कारोबारी जीवन से अलग और जोखिमभरा था। हाल के वर्षों में वह देहरादून में रह रहा था. सवाल यह उठ रहे हैं कि इतने चर्चित अतीत वाले व्यक्ति की शहर में मौजूदगी और मूवमेंट पर निगरानी किस स्तर तक थी। हत्या के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। हत्या के बाद पुलिस ने कई एंगल से जांच शुरू की है- पुराना गैंगवार, कारोबारी विवाद, आर्थिक हितों का टकराव और निजी दुश्मनी। सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या यह सुनियोजित साजिश थी या अचानक उभरा विवाद। देहरादून में जन्मा एक युवक, जिसने औद्योगिक शहरों में प्रभाव बनाया, सैकड़ों करोड़ की संपत्ति की चर्चाओं में रहा, सुरक्षा घेरे और काफिले के साथ चला, उसका अंत उसी शहर में गोलियों अब पुलिस जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं। क्या यह गैंगवार का नतीजा था? क्या कारोबारी विवाद ने हिंसक रूप लिया? या फिर पुरानी दुश्मनी ने अंतिम वार किया? इन सवालों के जवाब आने बाकी हैं लेकिन इतना तय है कि यह घटना अपराध, कारोबार और प्रभाव की उस जटिल दुनिया की याद दिलाती है, जहां अतीत कभी पूरी तरह पीछे नहीं छूटता।