Uttarakhand जनता की चिंता या फिर कुछ और? Trivendra Singh Rawat | CM Dhmai | Uttarakhand News

Spread the love

दोस्तो, क्या उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर बीजेपी के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं?जब अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री खुलकर ये कहें कि “कानून-व्यवस्था में खामियां हैं”, तो सियासी हलकों में हलचल होना तय है। Law and order in Uttarakhand सांसद और पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए साफ कहा कि सुधार की जरूरत है। उन्होंने न सिर्फ कमियों को स्वीकार किया, बल्कि पुलिस को नसीहत भी दी क्या ये सिर्फ प्रशासनिक सुधार की बात है या फिर इसके पीछे सियासत की कोई गहरी परत भी छिपी है? आइए समझते हैं पूरा मामला। दोस्तो राजधानी देहरादून और हरिद्वार समेत राज्य के दूसरे जिलों में हाल ही में घटी आपराधिक घटनाओं ने उत्तराखंड जैसे शांत राज्य की चिंता बढ़ा दी है। देहरादून में हुई हत्याओं के बाद कांग्रेस ने पुलिस और राज्य सरकार के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। अब उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार से BJP सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस बढ़ते अपराध पर एक बड़ा बयान दिया है। साथ ही उन्होंने उत्तराखंड पुलिस को नसीहत भी दी है। उन्होंने माना भी है कि बीते कुछ समय में राज्य की कानून-व्यवस्था में कुछ खामिया जरूर सामने आई हैं लेकिन पहले मै आपको कांग्रेस का आक्रोश दिखाता हूं जो देरादून में देखने को मिला कानून व्यवस्था को लेकर।

जी हां दोस्तो ये तो गैर हैं बल तो कानून व्यवस्था को चौपट बता रहे हैं चलिए ठीक है, विपक्षी हैं, लेकिन इधर बीजेपी के ही पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा सासंद भी आयना दिखाने का काम कर रेहैं। दोस्तो उत्तराखंड में बढ़ते अपराध दर पर चिंता जताते हुए BJP सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पुलिस को नसीहत दी और कहा कि पुलिस को जमीन-जायजादों के मामलों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि यह राजस्व विभाग की जिम्मेदारी है। जमीन-जायजादों के मामलों पर राजस्व विभाग को फैसला करना चाहिए। अगर पुलिस इस पर बहुत ज्यादा ध्यान देगी, तो इसका असर पुलिसिंग पर पड़ेगा। रावत ने ये भी कहा कि उत्तराखंड में हाल की घटनाएं चिंता पैदा करने वाली हैं क्योंकि उत्तराखंड एक शांत राज्य के तौर पर जाना जाता है। राज्य की अच्छी इमेज है, लेकिन इस तरह की घटनाएं नेगेटिव इमेज बनाती हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में देश-विदेश से टूरिस्ट आते हैं और बड़ी संख्या में तीर्थयात्री भी आते हैं। अगर टूरिस्ट और तीर्थयात्री सुरक्षा की कमी को लेकर चिंता करेंगे, तो इससे राज्य की इमेज को नुकसान होगा। राज्य में कई विभाग हैं, हर एक की अपनी जिम्मेदारी है क्योंकि उनका काम बंटा हुआ है, इसलिए हर डिपार्टमेंट को अपनी ड्यूटी निभानी चाहिए। कुछ दिनों से मैंने अनुभव किया है कि कानून व्यवस्था में कहीं न कहीं खामियां आई हैं, इसलिए मैं समय-समय पर सुझाव देता हूं कि जो आपका काम है वो करिए ताकि जो काम में समस्याएं आ रही हैं हो वो कम हो सकें.- त्रिवेंद्र सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री –

दोस्तो आपको बता दूं कि, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पिछले 15 से 20 दिनों में छह मर्डर के मामले सामने आए हैं। दूसरे जिलों में भी ऐसी ही कई घटनाएं सामने आई हैं, जिससे विपक्ष को सरकार और पुलिस को घेरने का मौका मिल गया है। वहीं अब पुलिस की कार्यशैली पर खुद बीजेपी के बड़े नेता त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ही सवाल खड़े कर दिए हैं। दोस्तो, उत्तराखंड जैसे शांत और पर्यटन-प्रधान राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने सरकार और पुलिस—दोनों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देहरादून में महज़ 15–20 दिनों में छह हत्याएं और अन्य जिलों में भी बढ़ती वारदातें ऐसे में विपक्ष हमलावर है, लेकिन अब खुद सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी कानून-व्यवस्था में खामियों की बात स्वीकार की है। रावत ने साफ कहा—हर विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाए, पुलिस अपने मूल काम पर फोकस करे, तभी हालात सुधरेंगे। सवाल अब ये है कि क्या इस बयान के बाद सिस्टम में कोई ठोस बदलाव दिखाई देगा, या फिर ये चिंता भी बयानबाज़ी तक सीमित रह जाएगी? उत्तराखंड की छवि, पर्यटन और आम लोगों की सुरक्षा—इन सब पर टिकी है कानून-व्यवस्था की साख। देखना होगा कि सरकार और पुलिस इस चुनौती से कैसे निपटती है। हम इस मुद्दे पर आपको लगातार अपडेट देते रहेंगे।