अचानक छावनी में तब्दील हो गई राजधानी | Paper Leak | UKSSSC | Hakam Singh Rawat | Uttarakhand News

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अचानक ऐसा क्या हूआ कि कि देहरादून को छावनी में तब्दील कर दिया गया, हर तरफ पुलिस ही पुलिस नजर आई। किसी को भी कहीं पर इक्ठ्ठा होने की इजातत नहीं थी, क्यों धारा 163 लगानी पड़ गई। क्या कुछ बड़ा होने वाला था राजधानी, कोई साजिश का इनपुट मिला था खुफिया एंजसियों को, वो बताने के लिए आया हूं दोस्तो की अचानक क्यों पुलिस के पहले में आ गई राजधानी दून। जी दोस्तो ये तीन तस्वीरे ही वजह बताई गई देहरादून को छावनी में तब्दील होने की। जहां हर तरफ इंसाफ की मांग दिखाई दी, कानून व्यवस्था पर सवाल सुनाई दिया और नकल माफिया को लेकर खूब हल्ला हुआ बल। सीधे कहूं। देहरादून की सड़कों पर  एक बार फिर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। यमुनोत्री से निर्दलीय विधायक संजय डोभाल के नेतृत्व में सैंकड़ों की संख्या में लोग सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने और कूच करने का ऐलान किया गया लेकिन ये अकेला प्रदर्शन नहीं है। बेरोजगार युवा पेपर लीक के खिलाफ हल्ला बोल रहे हैं, तो टिहरी में पुलिस की मनमानी के खिलाफ यूकेडी का प्रदर्शन जारी है।

तीन मोर्चों पर फैले ये विरोध प्रदर्शन देहरादून को छावनी में तब्दील कर रहे हैं। दोस्तो यहां राजधानी में राजनीतिक और सामाजिक उबाल के दौर से गुजर रही है बल। जहां एक तरफ यमुनोत्री से निर्दलीय विधायक संजय डोभाल के नेतृत्व में सैंकड़ों समर्थक सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं, वहीं दूसरी ओर बेरोजगार युवा भर्ती परीक्षा के पेपर लीक के खिलाफ हल्ला बोल रहे हैं। इसके साथ ही टिहरी पुलिस के खिलाफ यूकेडी (उत्तराखंड क्रांतिकारी दल) भी प्रदर्शन कर रहा है। इस तरह एक साथ तीन विरोध प्रदर्शन ने देहरादून की सड़कों को छावनी में तब्दील कर दिया है। दगड़ियो निर्दलीय विधायक संजय डोभाल ने आरोप लगाया है कि उनके विधानसभा क्षेत्र यमुनोत्री में लगातार उनकी और जनता की अवहेलना हो रही है। डोभाल ने कहा कि नौकरशाही बेलगाम हो चुकी है और मनमर्जी पर उतारू है। इस अवहेलना और उपेक्षा के खिलाफ विधायक और उनके समर्थक देहरादून पहुंचे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का ऐलान किया। डोभाल के भाई और नगर पालिका बरकोट के अध्यक्ष विनोद डोभाल ने भी सरकार पर क्षेत्र की उपेक्षा के आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों को रास्ते में रोकने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने पैदल मार्च कर अपना विरोध जताया। इधर बेरोजगार युवाओं ने भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। सैकड़ों युवा देहरादून के परेड मैदान में जमा होकर सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

युवाओं का आरोप है कि सरकार और नौकरशाही नकल माफियाओं से मिलीभगत कर रही है। ये प्रदर्शन युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है कि वे अपनी मांगों को लेकर कितने संगठित और सशक्त हैं। सरकार के लिए यह चुनौती है कि वह समय रहते इस मसले को गंभीरता से ले और युवाओं को न्याय दिलाए। तीसरे मोर्चे पर टिहरी पुलिस के खिलाफ उत्तराखंड क्रांतिकारी दल (यूकेडी) ने भी प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पुलिस की कथित मनमानी और प्रशासनिक दमन के खिलाफ था। यूकेडी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की, लेकिन  ये प्रदर्शन उतना उग्र नहीं दिखाई दिया लेकिन राजधानी का माहौल तो गर्म दिखाई दिया और पुलिस के लिए भी कई सारी चुनौतियां एक साथ आकर खड़ी हो गई। दोस्तो इन तीनों प्रदर्शन के कारण देहरादून की मुख्य सड़कों पर जाम लग गया है और पूरे शहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया है।

पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात की है। देहरादून में चल रहे ये तीन विरोध प्रदर्शन न केवल सरकार के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं, बल्कि प्रशासन और नौकरशाही के लिए भी एक आईना हैं। यमुनोत्री से लेकर बेरोजगार युवाओं तक, और पुलिस के खिलाफ उठ रही आवाजें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि जनता अब अपनी समस्याओं को लेकर चुप नहीं रहेगी। सरकार और प्रशासन के लिए जरूरी है कि वे इन मुद्दों को समझें, जनता की मांगों को गं भीरता से लें और तत्काल कार्रवाई करें। अन्यथा ये प्रदर्शन और भी तेज और बड़े पैमाने पर हो सकते हैं, जो उत्तराखंड की स्थिरता के लिए खतरा बन सकते हैं।